18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जर्दा खाने और सिगरेट-बीड़ी पीने में नागौर तीसरे पायदान पर

-जनप्रतिनिधि तम्बाकू के विरोध में जागृति फैलाने के लिए नहीं आते आगे, राजस्थान में अस्सी हजार हर साल तम्बाकू जनित बीमारियों से मर रहे हैं, मीडिया कार्यशाला आयोजित

2 min read
Google source verification
 तम्बाकू

अकेले नागौर जिले में रोजाना तम्बाकू से जुड़े उत्पाद पर लगभग 3 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। जर्दा खाने या फिर सिगरेट/बीड़ी पीने में भी नागौर प्रदेश में तीसरे पायदान पर है।



नागौर. अकेले नागौर जिले में रोजाना तम्बाकू से जुड़े उत्पाद पर लगभग 3 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। जर्दा खाने या फिर सिगरेट/बीड़ी पीने में भी नागौर प्रदेश में तीसरे पायदान पर है।

यह जानकारी शुक्रवार को निरोगी राजस्थान के तहत तम्बाकू मुक्त राजस्थान अभियान में तम्बाकू मुक्त नागौर बनाने के लिए आयोजित मीडिया कार्यशाला में समन्वयक राजन चौधरी ने दी। चौधरी ने कहा कि विधायक/सांसद हों या कोई जनप्रतिनिधि, इसके विरोध में आगे नहीं आता। इस संबंध में वे अब तक तीस विधायकों से भेंट कर चुके हैं। चौधरी ने बताया कि विश्व में तम्बाकू उत्पादों के उपभोग से प्रतिवर्ष भारत में प्रतिवर्ष 15 लाख लोगों की मौत होती है,जबकि राजस्थान में प्रतिवर्ष करीब 80 हजार लोग मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में प्रतिदिन 220 लोग तम्बाकू से होने वाली बीमारी के कारण मौत के आगोश में चले जाते हैं। राज्य की 2.40 करोड की जनता प्रतिदिन 61 करोड का अनाज नहीं खाते, जबकि एक तिहाई लोग तम्बाकू उत्पाद खा जाते हैं।

जिला तम्बाकू नियन्त्रण प्रकोष्ठ व एसआरकेपीएस के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्याशाला में सीएमएचओ डॉ.महेश वर्मा ने कहा कि कोटपा-2003 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विद्यालयों में तम्बाकू के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर युवा पीढ़ी को तम्बाकू मुक्त रखा जा सकता है। तम्बाकू मुक्त शिक्षण संस्थान बनाने से एसआरकेपीएस के संयुक्त तत्वाधान में कोटपा-2003 के तहत कार्यवाही व जागरूकता के कार्य किए जा रहे है। डॉ. वर्मा कहा कि नागौर को तम्बाकू मुक्त शिक्षण संस्थान अतिशीघ्र बनाया जाएगा।

एसआरकेपीएस के प्रतिनिधि विकास कुमारराम ने बताया कि एम्स जोधपुर के अनुंसधान व अध्ययन के अनुसार 7000 टन कचरा तम्बाकू उत्पादों से होता है। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि तम्बाकू उत्पादों से होने वाले कचरे से 30 लाख बाल्टी प्लास्टिक की बनाई जा सकती है। 60 हजार पेड बचाए जा सकते हैं। जिला तम्बाकू नियन्त्रण प्रकोष्ठ के जिला समन्वयक(एनटीसीपी) शाकिर खान ने कोटपा-2003 के बारे मे जानकारी दी। डीपीएम राजीव सोनी, एपीआरओ अभिमन्यु सिंह व आईईसी जिला समन्वयक हेमन्त उज्ज्वल भी कार्यशाला में मौजूद रहे।