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नागौर का सपूत सरहद पर शहीद

देर रात पार्थिव देह पहुंची नागौर, रविवार को सैन्य सम्मान के साथ फिड़ौद गांव में अंत्येष्टिपेट्रोलिंग करते समय पैर फिसलने से बिगड़ी तबीयत

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शहीद

फिड़ौद ग्राम के सूबेदार



पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नागौर. लाल सरहद पर शहीद हो गया, घर वालों को ये खबर देने की हिम्मत नहीं हो रही। कौन बताए उनके बुजुर्ग पिता को कि उनका सपूत दुनिया से कूच कर गया है? मोबाइल नम्बर तो जवान की पत्नी का भी है, लेकिन हिम्मत नहीं हो पा रही। जब इनको ही नहीं बता पा रहे तो बेटे-बेटी को किस तरह से इस जानकारी को साझा करें।

शनिवार शाम को नागौर के फिड़ौद गांव के गिने-चुने लोग, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह जोधा या फिर शहीद का एक मात्र भतीजा ही था, जो इस उलझन में थे कि पार्थिव देह आने में चंद घंटे बाकी हैं, रविवार सुबह राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि होनी है, घर वालों को कैसे बताया जाए। शहीद की बहनें भी व्याकुल थीं, उन्हें कुछ-कुछ यह जरूर पता लगा था कि भाई की तबीयत खराब हो गई, लेकिन असलियत उनसे भी छिपा ली गई थी।

भारत पाक सीमा पर जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा के माछील सेक्टर में पेट्रोलिंग करते हुए नागौर की मूंडवा तहसील के फिड़ौद ग्राम के सूबेदार बजरंगलाल डूकिया (47) शहीद हो गए। भारत पाक सीमा पर एलओसी पर गुरुवार की शाम पेट्रोलिंग करते समय इन्होंने वीर गति प्राप्त की। अभी तक आधिकारिक तौर पर तो पैर फिसलने से यह हादसा बताया जा रहा है, दोपहर बाद बजरंग लाल की पार्थिव देह विमान से दिल्ली पहुंची, जहां से सड़क मार्ग से देर रात नागौर आई।

१५ जाट रेजीमेंट में सूबेदार

१५ जाट रेजीमेंट के सूबेदार बजरंगलाल डूकिया भारत पाक सीमा पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। २० जून १९७६ को जन्मे बजरंग लाल २८ फरवरी १९९५ को सेना में भर्ती हुए थे। २७ साल तक उन्होंने देश सेवा की। बजरंग लाल मूलत: मूंडवा तहसील के फिड़ौद ग्राम के एक सामान्य किसान परिवार से थे। प्रारम्भिक शिक्षा इसी गांव में हुई। इनकी शादी २२ मई १९९७ को नैनीदेवी के साथ हुई। इनकी पुत्री बिंदु (२१) बीएड कर रही है, जबकि पुत्र लोकेश ग्रेजुएशन। बजरंग लाल की माता का कुछ समय पूर्व ही स्वर्गवास हुआ था। पिता प्रभुराम (८२) पिछले कई दिनों से बजरंग लाल को याद कर रहे थे। रविवार सुबह सैन्य सम्मान के साथ इनकी अंत्येष्टि पैतृक गांव फिड़ौद में होगी।
अजीब सी कशमकश
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल जोधा ने बताया कि दोपहर बाद से अजीब सी उलझन में रहे कि उनके बुजुर्ग पिता, शहीद की पत्नी और बच्चों को यह जानकारी कैसे दें। भतीजे को इस बारे में बताया। देर शाम बजरंग लाल की बहनों को इस तरह की खबर मिली कि उसकी तबीयत ड्यूटी के दौरान खराब हो गई, इसी को लेकर वो इधर-उधर फोन कर जानकारी लेने में जुट गईं, पर उन्हें भी कौन बताए कि बजरंगलाल अब दुनिया में नहीं रहे।