
हर मिनट में आठ सौ गोली चलाएगी नई कार्बाइन,-ज्वॉइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन (जेवीपीसी) हथियारों के बेड़े में शामिल-थानों के संतरी एसएलआर के साथ, रिवाल्वर की जगह लेगी आटो पिस्टल
सूत्रों के अनुसार फिलहाल दो जेवीपीसी अभी नागौर पुलिस को मिली हैं। इस कार्बाइन की गोली न रुकेगी न ही फंसेगी। हर मिनट में करीब आठ सौ गोलियां बरसाएगी। जल्द ही इसकी और खेप भी यहां आएगी। पुलिस कमाण्डो के साथ चुनिंदा पुलिसकर्मियों को इसके लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। बताया जाता है के ये नई अत्याधुनिक कार्बाइन पहले आ गई थी , जबकि इसके कारतूस बाद में आए। इसलिए थोड़ा देर से ही सही अब इसे चलाने का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। किसी बड़ी आपराधिक घटना के दौरान यह कार्बाइन काफी काम आएगी। यह काफी हल्का कार्बाइन है और बिना मैगजीन के इसका वजन सिर्फ तीन किलोग्राम है। यह कार्बाइन बुलेट प्रूफ लक्ष्य व स्टील को भी भेदने में सक्षम है। इससे करीब दो सौ मीटर दूर खड़े दुश्मन पर भी अचूक निशाना साधा जा सकता है। इसमें एक बार में 30 कारतूसों की मैगजीन लोड होती है।
वर्तमान में चल रही इंसास एक मिनट में छह सौ गोलियां बरसाती है।
बदलाव के इस दौर में काफी समय से नागौर पुलिस को हथियारों के मद्देनजर अत्याधुनिक करने की कोशिश चल रही थी। आईजी अजमेर रेंज के बदलते रहे नागौर एसपी ने भी समय-समय पर इसकी जरुरत जताते हुए पुलिस के जिम्मेदारों तक मुख्यालय को इस बाबत प्रस्ताव भेजे। समय-समय पर उनमें से कुछ को मंजूर भी किया पर हथियार देने के मामले में थोड़ा हाथ तंग ही रहा। अत्याधुनिक हथियार आए भी, लेकिन उनकी संख्या काफी कम सी रही। अगस्त 2015 को गैंगस्टर आनंदपाल की फरारी और एके-47 लूटने के बाद इस मांग ने जोर पकड़ा कि नागौर पुलिस को अत्याधुनिक हथियारों से पूरी तरह लैस किया जाए। उसके बाद के पुलिस अधीक्षकों ने इस बाबत प्रस्ताव भेजने का क्रम निरंतर जारी रखा।
संतरी के पास अब एसएलआर
सूत्रों का कहना है कि जिले के सभी थानों से रायफल नदारद हो चुकी है। आमतौर पर किसी भी थाने में घुसते समय रायफल लिए संतरी दिखाई देता था, संतरी तो अब भी है पर अत्याधुनिक एसएलआर (सेल्फ लोडिंग रायफल ) के साथ। कुछ समय तक थानों सहित नागौर जिला पुलिस के पास छह-सात सौ रायफल थीं जो लगभग सारी ‘गायब’ हो गई हैं। पूरे जिले में सिर्फ नौ रायफल शेष हैं, वो भी किसी मुकदमे से संबंधित होने की वजह से।
रिवाल्वर की जगह लेगी पिस्टल
सूत्र बताते हैं कि जल्द ही रिवाल्वर की जगह पिस्टल लेगी। ये ऑटो पिस्टल भी हो सकती है या ग्लॉक पिस्टल भी। कुछ समय पहले से रिवाल्वर को भी आउटडेट समझकर किनारे किया जा रहा है। वर्ष 2020 में अजमेर रेंज से सौ से अधिक रिवाल्वर नागौर पुलिस को मिली थी। इस समय नागौर जिला पुलिस के पास करीब 139 रिवाल्वर हैं। थानों में डीओ के अलावा थाना प्रभारी के साथ चार कांस्टेबलों में एक अथवा किसी सीनियर अधिकारी को रिवाल्वर मिलती है। कई बड़े थानों में दस-बारह रिवाल्वर तक हैं। इनके स्थान पर ऑटो पिस्टल या ग्लॉक पिस्टल लेने वाली है। रिवाल्वर में छह कारतूस होते हैं, जबकि ऑटो/ग्लॉक में 13-13 कारतूस।
एसपी समेत 11 के पास ग्लॉक पिस्टल
सूत्रों का कहना है कि अभी पूरे जिले में सिर्फ 11 ग्लॉक पिस्टल हैं। एसपी, एएसपी, सीओ के अलावा केवल लाडनूं सीआई के पास ग्लॉक पिस्टल है। जिलेभर में आटो पिस्टल की संख्या 106 है। पूरे जिले में 807 एसएलआर, 60 इंसास हैं। राजस्थान पुलिस के पास कार्बाइन, एके-47, स्टेनगन, इंसास, रिवाल्वर-पिस्टल, एमपी-5 मशीन गन, राइफल, एसएलआर, एलएमजी, एंटी राइड गन और पम्प गन आदि 23 प्रकार के हथियार हैं। फिलहाल ट्रेनिंग के दौरान कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर, आरपीएस और आईपीएस को पद के अनुसार निर्धारित हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
ट्रेनिंग देना सबसे बड़ी चुनौती
सूत्रों का कहना है कि पुलिस अत्याधुनिक हथियारों से लैस तो हो रही है पर इसके प्रशिक्षण का मामला थोड़ा ढीला चल रहा है। कुछ को छोड़ दें तो बाकी में हथियार चलाने को लेकर निपुणता नहीं आई। वैसे तो प्रशिक्षण चांदीमारी के जरिए भी चलता है। बावजूद इसके इसमें व्याप्त खामियों को दूर करने की मांग गई बार पुलिसकर्मी तक उठा चुके हैं।
नहीं चला पुलिस से लूटे हथियारों का पता
- एके-47, तीन पिस्टल,बारह बोर पंप एक्शन गन, वायरलैस सेट आदि ले गए उपद्रवी
तकरीबन पौने पांच साल बाद भी पुलिस से लूटे गए हथियारों का पता नहीं चल पाया है। सांवराद गांव में आनंदपाल के एनकाउण्टर के बाद विरोध चल रहा था। तब12 जुलाई को यहां बड़ी सभा का ऐलान हुआ और उपद्रवी पुलिस पर भारी पड़ गए। मोर्चा संभालने वाले तत्कालीन एसपी परिस देशमुख के साथ नागौर की जिला विशेष शाखा के हैड कांस्टेबल महावीर सिंह, एसपी के गनमैन महावीर, एसपी के चालक मंछाराम, अजमेर की प्रशिक्षु आईपीएस मोनिका सेन, उनके गनमैन शंकर, कांस्टेबल पुरखाराम आदि को भीड़ ने बीच में ही रोक लिया। उपद्रवी भीड़ एक एके-47, एक ग्लॉक पिस्टल, दो नौ एमएम की पिस्टल, बारह बोर पंप एक्शन गन, दो बुलट प्रुफ जैकेट और दो बुलट प्रुफ हेलमेट, एक वायरलैस सेट और पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन लूट ले गई। इसमें एसपी के गनमैन महावीर से एक एके 47, ग्लॉक पिस्टल तो तत्कालीन प्रशिक्षु आईपीएस मोनिका के गनमैन शंकर से एक नौ एमएम की पिस्टल व आरएसी के प्लाटून कमाण्डर से नौ एमएम की पिस्टल थी। कुछ दिन बाद सीकर जिले के दातारामगढ़ निवासी जयपाल सिंह शेखावत से एक पिस्टल, पांच कारतूस और एक मैगजीन बरामद की। बताया जाता है कि यह नौ एमएम की पिस्टल आरएसी के प्लाटून कमाण्डर से छीनी हुई थी। तब पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारियों ने दावा किया था कि जल्द ही लूटे गए हथियार बरामद किए जाएंगे, लेकिन इस पिस्टल के बाद न हथियार बरामद हुए न ही अन्य सामान। तत्कालीन एसपी के गनमैन महावीर का मोबाइल जरूर मिला बाकी तो किसी का मोबाइल तक वापस नहीं आया।
इनका कहना है
अत्याधुनिक हथियारों से नागौर पुलिस पूरी तरह लैस हो रही है। नई कार्बाइन जेवीपीसी भी आ गई है। नए हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
-राजेश मीना, एएसपी नागौर
Published on:
23 Feb 2022 10:04 pm
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