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अब जिले के सरस डेयरी की हर जानकारी मिल जाएगी

सरस डेयरी की प्रशासनिक बैठक में लिए गए अहम निर्णय, सभी को नए सिरे से सौंपी जिम्मेदारियां

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नागौर. जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि. की सोमवार को हुई बैठक में डेयरी की नई वेबसाइट बनाने, उत्पादकता के साथ गुणवत्ता को बेहतर करने एवं कार्य विस्तार आदि की गतिविधियों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन किशनलाल भींचर ने की। भींचर ने प्लांट सेंक्शन, स्टोर एवं मार्केटिंग आदि शाखा प्रभारियों को नसीहत दी कि अब उन्हें अब अपनी कार्य क्षमता के विस्तार के साथ गतिविधियों का भी विस्तार करना होगा। इस दौरान सभी शाखाओं के प्रभारी अधिकारियों को विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारियां दी गई। भींचर ने कहा कि उनके कार्यों की अब साप्ताहिक समीक्षाएं होंगी। सभी अपने गतिविधियों की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयारकर प्रबन्ध निदेशक एस. एस. चौहान को दिया करेंगे। इसके बाद इसकी स्क्रीनिंग कर उनकी गतिविधियों का आकलन किया जाएगा। डेयरी की नई वेबसाइट के लिए कहा गया कि इसमें अब तक के सभी डेटा का संकलन करने के साथ ही प्रतिदिन की गतिविधियों का अंकन भी किया जाएगा। डेयरी से जुड़ी योजनाओं के संचालन एवं उसकी उपलब्धियों का तथ्यात्मक अंकन करना यथासमय आवश्यक रहेगा। लापरवाही हुई तो संबंधित को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। चेयरमैन ने कहा कि सभी को अपना कार्य नियमित निपटाना होगा। कार्यों के लंबित रहने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई में विभाग शिथिलता नहीं बरतेगा।
किसानों को समझाई औषध पौधों की महत्ता
नागौर. औषधीपरक पौधों की महत्ता से युवा पीढ़ी अनजान है। वर्तमान में इसकी अधिकाधिक आवश्यकता होने के बाद भी इसे भुलाया जा रहा है। जबकि यह जड़ी-बूटियां कई गंभीर रोगों के लिए रामबाण हैं। पीपुल फॉर एनीमल्स की ओर से निकटवर्ती हरीमा गांव में पर्यावरण प्रशिक्षण केन्द्र में औषधीपरक पौधों की कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर जयपुर अरण्य भवन में उपवन संरक्षक सुखराम काला किसानों को संबोधित कर रहे थे। काला ने कहा कि बेल, गिलोय, नीम एवं पीपल सरीखे पौधे विभिन्न रोगों के इलाज में बेहद ही कारगर हैं। इनकी पत्तियां ही नहीं, बल्कि छाल एवं जड़ भी बीमारियों को खत्म करने में समक्ष होती हैं। वर्तमानम 1670 प्रकार की जड़ी बूटियों के पौधों की प्रजाति नष्ट होने के कगार पर है। इसे नहीं बचाया गया तो फिर भविष्य में अफसोस करेंगे। पीपुल फॉर एनीमल्स के जिलाध्यक्ष हिम्मताराम भांभू ने कार्यक्रम की सार्थकता पर चर्चा की। इसमें लिखमाराम खोजा, टीकूनाथ, हेमाराम मुण्डेल, रामनिवास, रामेश्वर डिडेल, रामपाल गहलोत आदि मौजूद थे।