
मापदण्ड बदलने से ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांवों के पशुपालकों को मवेशियों के उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। पहले पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोलने के लिए निकटतम पशु चिकित्सालय/उपकेन्द्र एवं संस्था से चार किमी की दूरी होनी चाहिए थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।जानकारी के अनुसार पशुपालन विभाग ने हाल ही में आदेश जारी किए हैं, जिसमें पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोलने के संबंध में नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार के इस कदम से पशुपालकों को काफी राहत मिलेगी। इसके तहत उन ग्राम पंचायत मुख्यालयों व राजस्व ग्रामों में ही पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जाएंगे, जहां पूर्व में पशु चिकित्सा संस्था स्वीकृत नहीं हुई हो। पशुधन की संख्या तीन हजार (पूर्व में निर्धारित) ही रखी गई है। इसके अलावाग्रामीण तथा शहर क्षेत्र में पशु चिकित्सालय खोलने तथा शहरी क्षेत्र में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोलने के लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्र में पशु चिकित्सा उप केन्द्र खोलने के नियम बदलने के पीछे राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय में पशु चिकित्सा केन्द्र उपलब्ध कराना है।
पहले से कम होगी जमीन की जरूरत
विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब ग्राम पंचायत मुख्यालय पर पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोलने के लिए कम जमीन की आवश्यकता पड़ेगी। उपकेन्द्र खोलने के लिए पहले जहां 200 वर्गगज जमीन की जरूरत पड़ती थी। उसकी जगह अब सिर्फ 100 गुणा 100 वर्गफीट की ही जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा तीन-चार कमरों का पक्का नि:शुल्क भवन उपलब्ध होने पर उपकेन्द्र खोलने की प्राथमिकता देने का नियम पहले की तरह यथावत रहेगा।
पहले आ रही थी दिक्कत
पहले पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोलने के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत पड़ती थी। इससे काफी परेशानी आती थी। पहले 200 वर्ग गज जमीन की जरूरत पड़ती थी। ऐसे में ग्राम पंचायत प्रशासन को जमीन आवंटन करने में काफी परेशानी होती थी। अब जमीन कम करने से कम जगह पर भी उपकेन्द्र खुल सकेंगे और जगह का आवंटन भी जल्दी हो सकेगा।
चिकित्सालय के लिए ये हैं नियम
ग्रामीण क्षेत्र में पशु चिकित्सालय खोलने के लिए वर्तमान में कई नियम है। इनके अनुसार निकटतम पशु चिकित्सालय/उपकेन्द्र एवं संस्था से छह किमी की दूरी होनी चाहिए। न्यूनतम कुल पशुधन की संख्या 6 किमी की परिधि में 5000 होनी चाहिए। पक्की सडक़/पानी, बिजली, दूरभाष आदि की सुविधाएं उपलब्ध होने पर प्राथमिकता दी जाए। साथ ही 200 वर्गगज जमीन तथा 3-4 कमरों का पक्का भवन उपलब्ध होने पर प्राथमिकता दी जाए।
Published on:
05 May 2017 11:31 am
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