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Nagaur patrika news Diary…नव वर्ष के पहले दिन चला शुभकामनाएं देने दौर, मंदिरों में सजे भगवान

नव वर्ष के पहले दिन सरकारी और निजी कार्यालयों में एक-दूसरे को बधाई देकर कामकाज की शुरुआत की गई। हालांकि, दिनभर कार्यों की गति धीमी रही, लेकिन बधाइयों का दौर लगातार चलता रहा।

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नागौर. नव वर्ष के पहले दिन सरकारी और निजी कार्यालयों में एक-दूसरे को बधाई देकर कामकाज की शुरुआत की गई। हालांकि, दिनभर कार्यों की गति धीमी रही, लेकिन बधाइयों का दौर लगातार चलता रहा। इसी बीच धार्मिक गतिविधियाँ भी पूरे जोशो-खरोश से आयोजित की गईं। मंदिरों में महादेव की सजावट की गई, तो कहीं पौष बड़ा सहित विशेष आयोजन किए गए। नव वर्ष के पहले दिन सरकारी कार्यालय खुले तो कामकाज की शुरुआत एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने से शुरू हुई तो शाम तक इसका दौर जारी रहा। हालांकि, यह दिन छुट्टियों जैसा था, इसलिए कार्यों में कोई विशेष प्रगति नहीं हो पाई, लेकिन फिर भी उत्साह का माहौल पूरे दिन बना रहा। बाजारों में भी लोग एक-दूसरे को 'हैप्पी न्यू ईयर' कहकर शुभकामनाएं देते नजर आए।
जयमल जैन पौषधशाला में सामायिक और गुरु वाणी का वाचन
नव वर्ष के पहले दिन विशेष धार्मिक आयोजन सुमतिचन्द्र म. सा., जयसुंदर मुनि म. सा. और महासतीजी नयन श्री जी के सानिध्य में जयमल जैन पौषधशाला में हुआ। आयोजन सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो सामायिकों के साथ हुआ। जिसमें भक्तों ने गुरु भगंवतो और जिनवाणी सुनी। इस दौरान कई जनों ने नियम ग्रहण किए। आयोजन में हरकचंद ललवाणी, कमलचंद ललवाणी, प्रेमचंद चौरडिय़ा, किशोरचंद ललवाणी, नरपत चंद ललवाणी, नवनीत चौरडिय़ा, मूलचंद ललवाणी, जितेन्द्र चौरडिय़ा एवं संजय पींचा ने आदि मौजूद थे।
श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में विशेष श्रंगार और पूजा अर्चना
नव वर्ष के दिन गिनाणी तालाब के पास स्थित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मंदिर के महादेव को चांदी के सिक्कों और कमल पुष्पों से विशेष श्रंगार किया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने महादेव के शृंगारित स्वरूप के दर्शन किए। इसके अतिरिक्त, कई जगहों पर पौष बड़ा का आयोजन किया गया।


प्रत्येक मनुष्य को द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने जाना चाहिए

नागौर. शहर की करणी कॉलोनी में स्थित शिव शक्ति मंदिर के पास चल रही शिव महापुराण कथा का विश्राम हुआ। कथा वाचन करते हुए गौतम कृष्ण महाराज ने कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं है, और पुत्र सदैव माता-पिता का ऋणी रहता है। उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में प्रत्येक मनुष्य को इनके दर्शन अवश्य करने चाहिए, क्योंकि दर्शन मात्र से पाप, ताप और संताप का नाश होता है। उन्होंने कहा कि नर से नारायण बनने की क्षमता केवल मनुष्य में ही होती है, और यह शिव कथा सुनने, कहने तथा भगवान शिव की आराधना से ही संभव है। शिव कृपा से ही साधु-संतों का सान्निध्य प्राप्त होता है। उन्होंने कथा के दौरान श्रद्धालुओं को गृहस्थ धर्म में छोटी-छोटी बातों को विष की तरह पान कर जीवन को सुखमय बनाने की सीख दी गई। कथा की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में हुए हवन में श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित की।

नागौर । नववर्ष के प्रथम दिन सामाजिक संस्था डी सेवन डोर फाउण्डेशन, नागौर द्वारा स्टेशन रोड स्थित पुराना राजकीय चिकित्सालय के बाहर पौष बड़ा का निशुल्क वितरण किया गया, जिसमे तिल के लड् डू, मीठे गुलगुले व दाल के पकौडी चटनी के साथ नाश्ता प्लेट राहगीरों को मनुहार कर खिलाये गये ।

सतोगुण की प्रधानता से ही जीवन में शांति, सुख की प्राप्ति होती है

नागौर. हाउसिंग बोर्ड स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को संत हरिशरण महाराज ने कहा कि यह पूरा संसार कन्हैया का है, और मनुष्य को इस सत्य को स्वीकार कर जीवन में संयम और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण की सरल व सारगर्भित व्याख्या करते हुए कहा कि सतोगुण की प्रधानता से ही जीवन में शांति, सुख और सच्ची भक्ति की प्राप्ति होती है। मानव जीवन का उद्देश्य केवल भोग नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति है। अन्न, धन और संसाधनों के दुरुपयोग से बचने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि संयम ही सच्ची साधना है, और वही मनुष्य को प्रभु से जोड़ता है। कथा में भगवान शंकर द्वारा कन्हैया के बाल रूप में यशोदा मैया को दर्शन न कराने की लीला के साथ पूतना वध प्रसंग का सजीव वर्णन किया गया। उन्होंने कृष्ण-बलराम की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जो भक्त आनंदपूर्वक इन लीलाओं को सुनता है, वही वास्तव में बड़भागी है। माखन चोरी की लीला में गुजरी के घर कन्हैया द्वारा मक्खन खाने, बाल सखा मनसुखा सहित सभी सखाओं द्वारा माखन भक्षण और प्रभात काल में गुजरी द्वारा कृष्ण को पकड़ लेने का प्रसंग के दौरान श्रोता मंत्र मुग्ध रहे। गुजरी का यह स्वीकार करना कि मक्खन भी तेरा और गइया भी तेरी, इस सत्य को उजागर करता है कि संसार की हर वस्तु ईश्वर की ही है। ब्रज भाषा में गोपियों के यशोदा मैया से की गई शिकायतें, कन्हैया को न डांटने का आग्रह, लल्ला और गुजरी की रोचक नोकझोंक के साथ बाल लीलाओं के वर्णन से माहौल कृष्ण्मय बना रहा। कान्हा कांकरिया मत मार, मारे फूटे गागरिया भजन पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। यशोदा मैया का कृष्ण को बांधने के प्रयास और बार-बार रस्सी के छोटा पड़ जाने के प्रसंग की व्याख्या करते हुए समझाया कि भगवान प्रेम से बंधते हैं, बल से नहीं। उन्होंने कहा कि प्रभु मुक्ति के दाता हैं, और भक्ति में मस्त रहकर ही जीवन को सुखी बनाया जा सकता है।