
मात्र सात परिक्रमा लगाने से ठीक हो जाता है लकवा रोग
कुचेरा/नागौर. लकवा (paralysis) रोग भले ही चिकित्सा विज्ञान के लिए एक पहेली बना हुआ है, लेकिन बुटाटी धाम स्थित संत चतुरदास महाराज मन्दिर में केवल सात परिक्रमा लगाने से यह रोग छू मन्तर हो जाता है। गोद में या स्ट्रेक्चर पर उठाकर लाए गए मरीज भी अपने आप परिक्रमा लगाने लग जाते हैं। करीब चार सौ साल पूर्व बुटाटी गांव के चारण कुल में जन्मे संत चतुरदास महाराज आजीवन ब्रह्मचारी रहे। युवावस्था में हिमालय पर्वत पर रहकर गहन तपस्या करने के बाद भगवत् दर्शन हो जाने पर वे वापस बुटाटी गांव आ गए। यहां तपस्या व गौ सेवा करने लगे। बाद में वे देवलोक गमन हो गए। प्रचलित दंत कथाओं के अनुसार उन्होंने अपने हिस्से की जमीन दान देने की बात कही। पूर्व में गांव के पश्चिम दिशा में केवल एक चबूतरे के निर्माण से शुरू हुआ बाबा की आस्था का केंद्र अब विशाल मन्दिर व धाम बन गया है।
यह है लकवा रोग
लकवा या पाईरेलाईसिस रोग में मनुष्य के शरीर का एक हिस्सा, एक हाथ, एक पैर, अथवा कोई अंग या पूरा शरीर हिलना बंद कर देता है तथा वह ठीक से चलने फिरने में असमर्थ हो जाते हैं। वहीं जीभ पर लकवे का असर पडऩे से बोली भी स्पष्ट नहीं रहती है। बुटाटी धाम मन्दिर में आकर सात दिन ठहरकर परिक्रमा लगाने से यह रोग दूर हो जाता है। कलियुग में भी बाबा का चमत्कार देखकर देश के हर कोने के लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं। यहां परिक्रमा लगाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों व विभिन्न धर्मों एवं सम्प्रदायों के लोग यहां आते हैं।
ठहरना, भोजन व अन्य सुविधाएं मिलती है निशुल्क
यहां देश के हर कोने से आने वाले लकवा रोगियों व उनके साथ आए परिजनों के ठहरने, बिस्तर व राशन का सामान संत चतुरदास महाराज मन्दिर विकास समिति की ओर से नि:शुल्क दिया जाता है। धाम पर कहीं भी पैसों का लालच नहीं चलता, यहां पहले आओ पहले पाओ के आधार पर अमीर-गरीब सबको समान समझा जाता है। यहां कमरे, ट्राई साईकिल, बिस्तर आदि सब सुविधाएं नि:शुल्क दी जाती हैं।
धार्मिक सौहाद्र्र का वातावरण
धाम पर देश के हर कोने से व हर धर्म व जाति के लोग आते हैं। यहां हिन्दू, जैन, सिक्ख, ईसाई, मुस्लिम आदि सभी धर्मों के लोग समान भाव से आकर परिक्रमा लगाते हैं। यहां हर माह की एकादशी को मेले का सा माहौल रहता है। संत चतुरदास महाराज मन्दिर विकास समिति मन्दिर के विकास, गौ शाला संचालन के साथ साथ गांव के विकास के लिए भी सदैव तत्पर रहती है।
कैसे पहुंचे बुटाटी
बुटाटी गांव राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 89 पर नागौर-अजमेर मार्ग पर स्थित है। नागौर व अजमेर से चलने वाली राजस्थान रोडवेज की बसों से यहां पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा जोधपुर से भी बुटाटी के लिए निजी बस सेवा उपलब्ध है। रेल मार्ग से आने वाले यात्री देश के किसी भी कौने से वाया जयपुर, रेण, अजमेर, नागौर या जोधपुर, मेड़तारोड पहुंचकर बुटाटी धाम पहुंच सकते हैं।
Updated on:
26 Jul 2018 08:56 pm
Published on:
26 Jul 2018 08:09 pm

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