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साइबर टीम के साथ पुलिस अफसर पहुंचे नागौर डेयरी, खंगाले फाइल/फोल्डर

-दूध परिवहन में करीब ग्यारह करोड़ घोटाले का मामला- देर रात तक डटी रही पुलिस टीम, संविदाकर्मी अनिल के फोल्डर के साथ छेड़छाड़, नामजद चार ठेकेदार पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार, मिलीभगत की आशंका के चलते अब नए सिरे से जांच

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घोटाले का मामला

दूध परिवहन में करीब ग्यारह करोड़ घोटाले का मामला

नागौर. डेयरी के घपले के आरोप में भले ही चार ठेकेदारों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अब यह जांच नए सिरे से शुरू हो गई है। मंगलवार को भी पुलिस अफसर साइबर टीम के साथ डेयरी पहुंचे। हिसाब-किताब का मिलान करने के दौरान कुछ रेकॉर्ड अधूरा मिला है। उधर, पुलिस की ओर से डेयरी प्रबंधन से इसके लिए दस्तावेज मांगने का सिलसिला जारी है। गौरतलब है कि दूध परिवहन में बिना जमा कराए ही करीब ग्यारह करोड़ की गड़बड़ी सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार नागौर सीओ ओमप्रकाश गोदारा के नेतृत्व में जांच चल रही है। सीओ गोदाराके साथ हैड कांस्टेबल नारायण व साइबर एक्सपर्ट डेयरी पहुंचे। यहां के एकाउंटेंट से वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के दौरान ठेकेदारों की जमा राशि के साथ बकाया का मिलान करवाया। बताया जाता है कि अलग-अलग बरसों में इस मिलाने और निकले बकाया को लेकर पुलिस के पास पहुंची ऑडिट रिपोर्ट पर संशय चल रहा था। इसके चलते पुलिसकर्मी खुद वहां पहुंचे और लेखाकार के साथ कम्प्यूटर पर फिर से हिसाब खंगाला। यही नहीं जांच का मकसद यह था कि अनियमितता के दौरान संविदा के एकाउंट कर्मी अनिल ने फोल्डर के साथ छेड़छाड़ तो नहीं की । इसके साथ कम्प्यूटर में दर्ज उन फोल्डर/फाइल को भी चैक किया गया जो गड़बड़ी के दौरान काम में आए थे।

सूत्र बताते हैं कि आरोपी ठेकेदार रामनिवास जाट, विजय चौधरी निवासी कुचामन, मालाराम निवासी मकराना व रामचंद्र निवासी खींवसर के रिमाण्ड का मंगलवार को छठा दिन था। पूछताछ में पुलिस इनसे कुछ खास नहीं उगलवा पाई है। सीओ ओमप्रकाश ने डेयरी प्रबंधन से दोबारा ऑडिट रिपोर्ट के साथ बकाया पर दिए गए नोटिस के अलावा अन्य जानकारी मांगी। कुछ दस्तावेज का अब भी पुलिस को इंतजार है। पुलिस का कहना है कि कोरोना काल में सर्वाधिक गड़बड़ी पाई गई है। इसमें काफी समय एमडी एसएस चौहान रहे जो अब रिटायर हो चुके हैं।

संविदाकर्मी अनिल या....

सूत्रों का कहना है कि डेयरी के इस घपले में सबसे बड़ी गड़बड़ यह सामने आई कि जब एक-दो दिन से अधिक का उधार नहीं दिया जाता तो इन आरोपी ठेकेदारों को क्यों मिलता रहा? यही नहीं जब चार साल की ऑडिट जांच के दायरे में है, समय-समय पर बकाया निकलता तो फिर इन्हें ही उस रूट पर चलने का ठेका कैसे मिल गया? और तो और संविदा कर्मी अनिल तो एफआईआर दर्ज होने के बाद से गायब है, लेकिन बीच में उसके लंबे अवकाश के दौरान किस कर्मचारी ने ड्यूटी यानी कैश लेने का काम किया था, वो कौन था, क्या उससे पूछताछ हुई? अब पुलिस इन्हीं सवालों के इर्दगिर्द अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।

उधर, डेयरी प्रबंधन में नाराजगी

सूत्र बताते हैं कि चार ठेकेदार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की इस जांच से डेयरी प्रबंधन भी परेशान है। बार-बार कागज मांगने के संदर्भ में भी उनका आरोप है कि ये सब पहले ही उपलब्ध करा चुके हैं। अब उनका यह भी कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश पर ठेकेदारों के घपले प्रूव होने के साथ गिरफ्तारी और चालान की बात जब अतिरिक्त महाधिवक्ता ने हाइकोर्ट में कह दी तो पुलिस क्यों अब नए सिरे से जांच कर रही है।

इनका कहना

गड़बड़ी के दौरान संविदाकर्मी अनिल के बनाए फोल्डर/फाइल को जांचा गया कि इससे कहीं छेड़छाड़ तो नहीं हुई, इसके अलावा राशि जमा करने के अलावा ठेकेदारों की अन्य डील के फाइल-फोल्डर साइबर टीम ने जांचे। अनिल की अनुपस्थिति में किसने उसका काम किया, उसे भी घेरे में लिया जाएगा। घोटाले में किस-किसकी मिलीभगत है, इसकी जांच की जा रही है।

-ओमप्रकाश गोदारा, सीओ नागौर

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पुलिस जो भी दस्तावेज मांग रही है उपलब्ध करा रहे हैं, वैसे दस्तावेज पहले भी दे चुके हैं।

-डॉ भरत सिंह चौधरी, एमडी, नागौर डेयरी।