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हिस्ट्रीशीटर की चल-अचल सम्पत्ति का हिसाब रखेगी पुलिस, अवैध कब्जे तुड़वाने के लिए भी खुद बनेगी फरियादी

-हिस्ट्रीशीटर की जोड़ी गई पाई-पाई पर पुलिस की नजर- जरुरत पड़ने पर की जा सकती है सम्पत्ति कुर्क - जिले के 413 हिस्ट्रीशीटर में से एक चौथाई भू-माफिया -बढ़ते अपराध पर अंकुश लगाने या फिर बेनामी सम्पत्ति खुर्द-बुर्द करने की कोशिश

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 हिस्ट्रीशीटर की पाई-पाई का हिसाब

अब पुलिस के पास हिस्ट्रीशीटर की पाई-पाई का हिसाब होगा। पुलिस इनकी चल-अचल के साथ बेनामी सम्पत्ति का खाका तैयार करने में जुट गई है। अतिक्रमण की जमीन अथवा उस पर बनी इमारत के हिस्ट्रीशीटर के बारे में भी पुलिस संबंधित जिम्मेदारों को जानकारी देगी।

संदीप पाण्डेय

नागौर. अब पुलिस के पास हिस्ट्रीशीटर की पाई-पाई का हिसाब होगा। पुलिस इनकी चल-अचल के साथ बेनामी सम्पत्ति का खाका तैयार करने में जुट गई है। अतिक्रमण की जमीन अथवा उस पर बनी इमारत के हिस्ट्रीशीटर के बारे में भी पुलिस संबंधित जिम्मेदारों को जानकारी देगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि इनकी रंगदारी पर तो लगाम लगे ही, जरुरत पडऩे पर सम्पत्ति को कुर्क/नीलाम करने में भी पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़े। नागौर जिले में इस समय करीब 413 हिस्ट्रीशीटर हैं।

सूत्रों के अनुसार बढ़ते अपराध पर अंकुश लगाने के लिए हिस्ट्रीशीटरों की सम्पत्ति की जानकारी एकत्र की जा रही है। पुलिस सभी हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ अभियान चलाकर अवैध कारगुजारी/धंधे, जबरन वसूली के साथ सरकारी जमीन पर कब्जा कर फार्म हाउस/भवन निर्माण सहित दबंगई करते हुए वसूली, नहीं देने पर कब्जा करने सहित अन्य कारगुजारी से एकत्र संपत्ति का विवरण एकत्र करने में लगी है। वो इसलिए भी ताकि इस संपत्ति को सीज करने सहित अतिक्रमण से मुक्त करवाया जाए। मसलन किसी अवैध कब्जे की जमीन पर बनी इमारत के बारे में नगर परिषद/पालिका को सूचित कर कार्रवाई करवाने का काम भी पुलिस करेगी।

सूत्र बताते हैं कि अपराध के जरिए अर्जित सम्पत्ति पर पुलिस की चौकस निगाह रहेगी। इसके लिए वो आयकर/परिषद/पालिका ही नहीं न्यायालय की भी मदद लेगी है। हिस्ट्रीशीटर के पिता अथवा भाई के अलावा पुत्र/पत्नी के नाम की सम्पत्ति भी संदेह के दायरे में रहेगी। बेनामी सम्पत्ति में कोई ऐसी जमीन/मकान जिसके दस्तावेज भले ही हिस्ट्रीशीटर के नाम न हो पर उसके कब्जे/निर्माण में उसकी भूमिका रही हो, उसको भी हिस्ट्रीशीटर के खाते में दर्ज किया जाएगा।

शुरुआत में ही पकड़ में आई चतुराई

सूत्रों का कहना है कि हिस्ट्रीशीटरों की सम्पत्ति खंगालने की शुरुआत में ही जो हकीकत सामने आ रही है वो कम रोचक नहीं है। कुछ हिस्ट्रीशीटर के पास सम्पत्ति के नाम पर न कोई वाहन न मकान। रहन-सहन में कोई कमी नहीं पर पड़ताल में गरीब नजर आ रहे हैं। इन्होंने अपने नाम पर भी रख-रखी है मामूली सम्पत्ति। बताया जाता है कि अपराध की दुनिया में पुलिस/वकील के दांव-पेच को देखते हुए सरकार की सख्ती ने अब उन्हें ज्यादा चतुर बना दिया है। वे खुद के नाम ज्यादा सम्पत्ति रखने से बचने लगे हैं। इसी के चलते वे सम्पत्ति अपने ही नाते-रिश्तेदारों के नाम करा रहे हैं , ताकि कभी संकट में फंसने पर सम्पत्ति को कोई नुकसान न हो।

जमीन कब्जाई और दौलत कमाई

सूत्र बताते हैं कि जिले के एक चौथाई हिस्ट्रीशीटर भले ही आपराधिक वारदात करते रहे हों पर उनका मूल काम जमीन कब्जाकर पैसा कमाना रहा। अकेले नागौर शहर में एक हिस्ट्रीशीटर ने करोड़ों की जमीन पर कब्जा जमा रखा था। इसके अलावा भी अनेक हिस्ट्रीशीटर ने धौंस/दबाव से महंगी जमीन को कब्जाया। कहीं कौड़ी के दाम पर खरीदा तो कहीं कब्जे के लिए लाखों वसूले। और अब भी नागौर, कुचामन, डीडवाना, खींवसर समेत कई क्षेत्रों में भू-माफिया के साथ हिस्ट्रीशीटर का गठजोड़ है।

दो महीने में सात नए हिस्ट्रीशीटर

इसी साल के शुरुआती दो महीने में सात बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खोली गई है। इनमें मौलासर-खुनखुना दो-दो तो डीडवाना में एक की हिस्ट्रीशीट खुली है। दो की हिस्ट्रीशीट बंद हुई है, जिले में अब 413 हिस्ट्रीशीटर हैं। इसके साथ जिलेभर में आदतन अपराधियों का पुराना रेकॉर्ड खंगाला जा रहा है। साथ ही उन बदमाशों की भी फेहरिस्त बनाई जा रही है जो पिछले तीन-चार साल में कितने सक्रिय अथवा निष्क्रिय रहे। सर्वाधिक तीन दर्जन हिस्ट्रीशीटर कुचामन में हैं। इसके बाद मेड़ता सिटी का नंबर आता है यहां 31, कोतवाली थाना इलाके में 27 लाडनूं में 28, चितावा में 24, मूण्डवा में 21, डीडवाना में 14, गोटन में 15 तो खींवसर में 14 हिस्ट्रीशीटर हैं। अन्य थानों में भी कई बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खुली हुई है। जिले के 32 थानों में अकेला महिला थाना है, जहां एक भी हिस्ट्रीशीटर नहीं हैं।

इनकी भी थानावार लिस्ट हो रही है तैयार

साम्प्रदायिक दंगों में शामिल अथवा धार्मिक उन्माद के साथ आपत्तिजनक संदेश फैलाने/वायरल करने वालों की अलग से थानेवार लिस्ट तैयार की जा रही है। अब तक के साम्प्रदायिक अथवा जातिगत दंगों में शामिल रहे अपराधियों की वर्तमान स्थिति, पुलिस रेकॉर्ड के साथ उनको भी निगरानी में रखा जा रहा है। इसके अतिरिक्त सोशल साइट पर किसी धर्म के संबंध में गलत टिप्पणी करने वालों को भी चिन्हित किया जा रहा है। यही नहीं धमकी देकर वसूली करने के लिए सोशल साइट अथवा मोबाइल पर धमकी देने वालों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सोशल मीडिया के जरिए अपराध करने के मंसूबे रखने वालों की धर-पकड़ के लिए अलग से टीम बनाई गई है।

इनका कहना

जिलेभर के हिस्ट्रीशीटर की सम्पत्ति खंगाली जा रही है। गुप्त सूचना के जरिए अपराध के जरिए धन कमाने वालों पर भी निगरानी की जा रही है। जमीन पर कब्जा/भवन निर्माण संबंधी कार्रवाई करवाएंगे, जरुरत पड़ी तो अवैध रूप से हड़पी सम्पत्ति कुर्क की जाएगी। इसके साथ सोशल साइट के जरिए अपराध करने वालों की भी फेहरिस्त तैयार की जा रही है।

-राममूर्ति जोशी, एसपी नागौर।