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पोथी बताती है कौन थे आपके पूर्वज

सुरेश कुमार नागौर/लाम्बा जाटान. पूर्वजों के इतिहास व उत्तरोत्तर नामावली को संरक्षित रख उनके वंशजों को सुनाने की भाट (राव) बही प्रथा 21 वीं सदी में भी जारी है। गांवों में विभिन्न जातियों के वंशजों में राव भाट के आगमन पर कुटुंब में त्योहार जैसा उत्साह रहता है।

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आज भी सरगरा समाज के लोग रावों के लिए विशेष भोजन की दावत देते हैं। सृष्टि की उत्पत्ति व भगवान के अवतार से चंद्र व सूर्यवंशी भागों में बांटकर पीढ़ी दर पीढ़ी जन्म तारीख, ननिहाल, ससुराल व जातियों का विस्तृत विवरण डिंगल व पिंगल भाषा में बहियों में मिल जाता है।
रावों की रोटी
गांवों में बही भाट के लिए बनाए जाने वाले विशिष्ट भोजन को रावों की रोटी कहा जाता है। रावों को सम्बंधित वंशजों द्वारा परिवार के सभी घरों में भोजन के लिए न्यौता दिया जाता है। इसमें हलवा, खीर, केर- सांगरी सहित कई प्रकार के विशिष्ट प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। भोजन के बाद राव श्लोक द्वारा परिवार को मंगलकामना व खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान
करते हैं।

राव बही का वाचन
समस्त परिवार में भोजन के बाद रावों द्वारा परिवार की प्राचीन कोटड़ी में बैठकर ऐतिहासिक बही का वाचन किया जाता है। रावों की बही में जन्म व मृत्यु का पंजीकरण प्राचीन समय से किया जाता रहा है। आदिकाल से इस बही को संरक्षित रखा हुआ है। बही के पूजन के बाद राव उच्च आसन पर बैठकर वंशजों के यशगान व पीढिय़ों का वाचन करते हैं। रावों में आगमन के साथ ही ढाणियों में एक निश्चित बैठक स्थल पर अखंड ज्योति जलाई जाती है। बही वाचन के दौरान परिवार के समस्त सदस्य उसका श्रवण
करते हैं।
पेश होता है नजराना : रावों को उनके समाज वंशजों के घरों में रहवास के दौरान हर्ष के साथ अतिथि सेवा की जाती है। राव भाट की बही में अपने परिवार के नए सदस्य का नाम दर्ज करवाने पर यजमान नजराना पेश करते हैं। नजराने में यजमान द्वारा हजारों रुपए की राशि के साथ जेवर व वस्त्र भी दिए जाते हैं।