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राजस्थान में ‘रेल बस‘ को लेकर बड़ा फैसला, यात्रियों को मिली राहत

मेड़ता सिटी से मेड़ता रोड के बीच संचालित होने वाली रेल बस को 1 फरवरी से बंद करने के फैसले के बाद रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत फिलहाल आगामी 7 दिनों तक रेल बस का संचालन फिर शुरू किया है...

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नागौर

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Dinesh Saini

Feb 01, 2020

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नागौर/मेड़ता सिटी। मेड़ता सिटी से मेड़ता रोड के बीच संचालित होने वाली रेल बस को 1 फरवरी से बंद करने के फैसले के बाद रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत फिलहाल आगामी 7 दिनों तक रेल बस का संचालन फिर शुरू किया है। रेलवे के इस फैसले के बाद शनिवार को दोपहर 12:00 बजे बाद रेल बस का संचालन हुआ। शनिवार को रेल बस 3 फेरे करेंगी। उल्लेखनीय है कि 1 फरवरी से मेड़ता रोड से मेड़ता सिटी के बीच चलने वाली रेल बस को बंद करने के फैसले के बाद राजस्थान पत्रिका ने इस मुद्दे को उठाया और प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर यात्रियों की समस्या उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई, जिससे चैते रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को कुछ राहत दी है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 7 दिनों तक रेल बस का संचालन किया जाएगा।


वर्ष 1994 में तत्कालीन कांग्रेस के सांसद नाथूराम चौधरी ने भारत की पहली रेलबस का मेड़ता सिटी से संचालन शुरू किया था। तब मेड़ता सिटी से मेड़ता रोड के लिए चार रेलबसे चलती थी। समय बीतने के साथ-साथ रेलबसे नकारा होती गई। तीन रेलबस पहले की कंडम घोषित कर दी गई। इसके बाद मेड़ता से मेड़ता रोड के बीच एक रेलबस का ही संचालन किया जा रहा था। 26 साल बीत जाने के बाद अब अंतिम रेलबस भी 'रिटायर्ड' हो गई है। सूत्रों के अनुसार अभी तक इस मार्ग पर वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई सूचना अथवा निर्देश नहीं होने के बाद भी रेल बस का संचालन बंद किया जा रहा था। वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से मेड़ता सिटी के नागरिकों के लिए रेल के रास्ते मेड़ता रोड जाने का एकमात्र साधन भी बंद हो जाता। फिलहाल अब यह सात दिनों के लिए टल गया है।

किसानों के मसीहा तथा मारवाड़ी के गांधी कहे जाने वाले सांसद स्व. मिर्धा द्वारा आज से 26 वर्ष पूर्व मेड़तावासियों को यह सौगात दी थी। जो 70 सीटर रेलबस मेड़ता से मेड़ता रोड के बीच 15 किमी दूरी तय करती है। एक समय यह मेड़ता की लाइफ लाइन टे्रन भी कहलाने लगी। साथ ही रेलबस से प्रमुख ट्रेनों का लिंक हो जाने से आमजन को यह सुविधा भी रास आ रही थी। इससे रोज हजारों यात्रियों और अपने रोजगार के लिए अप-डाउन करने वालों के लिए बेतौर सबल साबित हुई। कालांतर में जनसंया बढऩे पर यात्रीभार बढ़ा पर सीट वहीं 70 रही। जिसके चलते इसकी यात्रा में कई बार यात्रियों को जलालत भी झेलनी पड़ती थी।