
Nagaur News: प्रदेश की खारे पानी की सांभर झील के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। यहां भूगर्भ से अवैध तरीके से पानी निकालने के लिए इन दिनों झील को बेखौफ छलनी किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि झील का जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। झील के पानी का दोहन करने के लिए रात-रातभर ड्रिलिंग मशीनें चल रही हैं। नलकूप लगाकर नमक बनाने के लिए झील के नीचे से जमीन से दोहन कर पानी खारड़ों (नमक क्यार) में ले जाया जा रहा है। जबकि प्रदेश की इस खारे पानी की झील में ड्रिलिंग मशीन से नलकूप नहीं लगाया जा सकता है। डीडवाना-कुचामन, अजमेर एवं जयपुर जिले की सीमा से घिरी सांभर झील में चुनावी माहौल के बीच अवैध नलकूप लगाने के लिए चली ड्रिलिंग मशीनों से झील संरक्षण के सारे दावे खोखले नजर आ रहे हैं।
नमक कर रहे तैयार: सांभर झील के भू-गर्भ से पानी नमक बनाने के लिए काम लिया जा रहा है। सांभर झील की जमीन के नीचे से निकलने वाला पानी अधिक नमक देने वाला होने से अब यहां अधिकतर ने खारड़ों (नमक क्यार) में नमक तैयार करने के लिए यही रास्ता अख्तियार कर लिया है।
हर बार लीपापोती कर की जा रही है कार्रवाई
झील संरक्षण का मुद्दा एनजीटी में जाने के बाद कोर्ट की ओर से भी अधिकारियों को झील से अवैध गतिविधियों को खत्म करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन हर बार प्रशासन की ओर से लीपापोती कर कार्रवाई की जा रही है।
पत्रिका की पड़ताल में खुलासा
केस -1
रात 9 बजे पत्रिका टीम खाखड़की रोड से शाकम्भरी माता मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर पहुंची। यहां ड्रिलिंग मशीन चल रही थी। जानकारी जुटाने पर पता चला कि अवैध नलकूप लगाया जा रहा था।
केस -2
पत्रिका टीम रात 3 बजे खाखड़की रोड से पश्चिम दिशा में पहुंची तो यहां भी ड्रिलिंग मशीन नलकूप के लिए गड्ढा कर रही थी। इस मशीन पर 9 श्रमिक जुटे थे। बोरिंग करने की बात की तो मशीन पर काम करने वालों ने कहा कि रात के अंधेरे में बिना टेंशन नलकूप लगाने के लिए हो-ल हो जाएगा।
केस -3
रात 10.42 बजे मोहनपुरा क्षेत्र में पहाड़ी से दक्षिण की तरफ पहुंचे तो बोरिंग मशीन नेमजी की बताई गई। ग्राहक बनकर जानकारी जुटाई तो मशीन संचालकों ने दो सौ रुपए प्रति फीट के हिसाब से झील में हो-ल करने के मांगे।
क्या है नियम
झील में बोरवेल नहीं कराया जा सकता है। इसमें अवैध गतिविधि नहीं हों इसके लिए कलक्टर ने धारा 144 (निषेधाज्ञा) लगाई हुई है।
टीम...जो हर गतिविधि पर रख रही नजर
झील में बोरवेल करने वालों ने मोबाइल टीमें भी बना रखी है, जो झील में आने वाले अधिकारी और अन्य लोगों पर नजर रख रहे हैं। यह खुलासा पत्रिका की टीम के झील में पहुंचने पर हुआ है।
फैलाव: डीडवाना-कुचामन, अजमेर, जयपुर, सीकर तक, समुद्रतट से ऊंचाई 360 से 365 मीटर (लगभग)
फैक्ट फाइल
7500 वर्ग किलोमीटर कैचमेंट एरिया
230 वर्ग किलोमीटर बारिश के दौरान
0.61 मीटर गहराई सांभर झील की
96 किलोमीटर परिधि है सांभर झील की
Updated on:
20 Mar 2024 03:53 pm
Published on:
20 Mar 2024 03:32 pm
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