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Video: पंचायतीराज की बात आए…जुबां पर नागौर का नाम आए, विकास की दरकार

ग्राउंड रिपोर्ट : नागौर, खींवसर और मेड़ता विधानसभा क्षेत्र की थाह, सत्ता के विकेंद्रीकरण और ग्राम स्वराज के तहत देश में पंचायतीराज की नींव रखने वाले नागौर में लोगों को विकास के सपने तो खूब दिखाए गए, लेकिन हकीकत में अभी ये अधूरे

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Video: पंचायतीराज की बात आए...जुबां पर नागौर का नाम आए, विकास की दरकार

जयप्रकाश सिंह / नागौर। सत्ता के विकेंद्रीकरण और ग्राम स्वराज के तहत देश में पंचायतीराज की नींव रखने वाले नागौर में लोगों को विकास के सपने तो खूब दिखाए गए, लेकिन हकीकत में अभी ये अधूरे हैं। कोटा से लंबा सफर तय करके नागौर पहुंचा तो रेलवे स्टेशन से बाहर बड़े शहर जैसा माहौल नजर नहीं आया।

भले ही नागौर प्रदेश के बड़े जिलों में शुमार है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पूरे शहर में ढूंढने पर भी सिटी बस और कैब जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिली। शहर में हेंड टूल्स बनाने का काम बड़े पैमाने पर है। पहले ये काम घरों-दुकानों पर होता था, पर अब कारखाने भी लग गए हैं। नागौर के बारे में खास बात ये भी है कि राजस्थान के मानचित्र पर एक क्रॉस बनाएं तो इसका केंद्र नागौर जिले में पड़ता है।

कलक्ट्रेट से आगे जैसे ही बीकानेर रोड पर आया तो पुराने अस्पताल से लेकर कृ षि उपजमंडी तक बन रहा रेलवे ओवरब्रिज अधूरा मिला। इसका शिलान्यास छह साल पहले हुआ था, लेकिन अभी आधा भी नहीं बन पाया है। यहां चाय की दुकान चलाने वाले शक्तिसिंह का कहना था कि निर्माण अधूरा होने से जाम लगा रहता है। यही स्थिति नागौर कालेज के पास से रेलवे ओवर ब्रिज की है।

कृषि उपजमंडी में मिले मसाला बोर्ड सदस्य भोजराज सारस्वत का कहना था कि उच्च गुणवत्ता का होने के कारण यहां के जीरे की खूब मांग है। फसल खराब होने के बावजूद भाव में तीन गुना तेजी है। यहां के जीरे पर बड़ी कंपनियों की नजर है। व्यापार मंडल अध्यक्ष मूलचंद भाटी बोले, यहां मूंग की पैदावार सबसे ज्यादा है। जीरे के साथ यहां सौंफ, इसबगोल और पान मैथी की खेती भी होती है। अधिकतर सरकारी महकमों के कार्यालय अब शहर से बीकानेर रोड पर शिफ्ट हो रहे हैं। इस रोड पर मेडिकल कालेज भवन का निर्माण कार्य मई में ही पूरा होना था, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है।

खींवसर विधानसभा क्षेत्र की तरफ बढ़ा तो रास्ते में लोकदेवता तेजाजी महाराज की जन्मस्थली खरनाल गांव आया। खस्ताहाल सडक़ों से होते हुए गांव में 200 करोड़ की लागत से बन रहे तेजाजी महाराज के निर्माणाधीन मंदिर पर पहुंचा। यहां पुजारी के बेटे रामनिवास ने बताया कि 28 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां आने का कार्यक्रम बन रहा है। खींवसर पहुंचने पर देखा कि इस क्षेत्र में लाइमस्टोन की बहुतायत है। इसके प्रोडक्ट बनाने वाली कई इकाइयां भी मिलीं। यहां हाईवे के किनारे खड़े लोगों ने जलभराव की शिकायत की। सरकार की योजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में खास उत्साह नजर नहीं आया। शैतानराम बोले, बिजली ही नहीं आती तो राहत का क्या फायदा।

खींवसर से मेड़ता सिटी की तरफ रुख किया तो रास्ते में मेड़ास, भदौरा, गोवाकलां गांव मिले। गांव के अंदर की सडक़ें खस्ताहाल थीं। खजवाना से रूण होते पहले मेड़ता रोड पहुंचा। यहां से करीब 15 किलोमीटर का सफर तय करके भक्त शिरोमणि मीराबाई की नगरी मेड़ता सिटी पहुंच गया। यहां नगरपालिका कार्यालय के बाहर मिले, जिला बार एसोसिएशन के सचिव अभिमन्यु शर्मा ने कस्बे को जिला नहीं बनाने पर गुस्सा जताया। सीएलजी मेम्बर राजीव पुरोहित का कहना था कि यहां सैटेलाइट या उप जिला अस्पताल बनना चाहिए था।