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धर्म की राजनीति करने वालों को नहीं भेजे संसद-विधानसभा

- पत्रिका चेंज मेकर अभियान के तहत कार्यशाला का आयोजन

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नागौर. राजनीति को भ्रष्टाचार व अपराध मुक्त बनाने के लिए राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे अभियान चेंजमेकर के तहत रविवार को राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लोगों के साथ परिचर्चा की गई। इस दौरान उनका कहना था कि वर्तमान में राजनीति धर्म पर आधारित हो गई है, जिससे देश में हिंसा की घटनाएं बढ़ रही है। अनपढ़-अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के कारण राजनीति में नौकरशाही हावी हो गई है। ऐसे लोगों को संसद तथा विधानसभा में भेजना चाहिए, जिसका जनता से सीधा जुड़ाव हो।

एकता वाली बात को समझे
वर्तमान में युवा वर्ग की सोशियल मीडिया की वजह से हो रही सीमित सोच को देखते हुए राजस्थान पत्रिका का चेंजमेकर अभियान वारदान साबित होगा। मैं व्यक्तिगत तौर पर पत्रिका का आभार व्यक्त करता हूं क्यों कि पत्रिका एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो आमजन की हर समस्या को उठाता है। वर्तमान में धर्म और जाति के नाम पर हो रही राजनीति चिंताजनक है। इससे हिंसा की घटनाएं बढ़ रही है। पिछले सात सालों में हिंसा से जुड़ी साढे चार हजार घटनाएं इसका उदहारण है। राष्ट्र की विविधता में एकता वाली बात को समझना होगा।
महेन्द्र पंवार रातंगा, नवचयनित पटवारी,
विकास की राजनीति हो
राजस्थान पत्रिका का चेंजमेकर अभियान सराहनीय है। इससे निश्चित तौर पर राजनीति में बदलाव आएगा। मेरे इस अभियान से जुडऩे का मुख्य उद्देश्य राजनीति में बदलाव लाना ही है। आज देश में धर्म की राजनीति हो रही है, वहीं राज्यों में जातिगत और पंचायत स्तर पर परिवारवाद की राजनीति है। इसे बदलने के लिए शिक्षित युवाओं को आगे आना होगा।
रणजीत धौलिया, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, बीआर मिर्धा कॉलेज, नागौर,
नए लोग राजनीति से जुड़ेंगे
पत्रिका के इस अभियान के कारण नए लोग राजनीति से जुड़ेंगे, जो अब तक राजनीति से दूर भागते थे। आज राजनीति में कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ व अपराधी लोग हैं। इसका परिणाम है कि राजनीति में नौकरशाही हावी हो गई है। नौकरशाही की मनमानी के कारण विकास कार्यों पर विराम लग गया है। चेंजमेकर अभियान से पढ़े-लिखे व जागरूक युवाओं के आगे आने से राजनीति में बदलाव निश्चित है।
शिवदयाल गोलिया, कार्यकर्ता, छात्र संगठन,
राजनीति में बदलाव के लिए चलाए गए इस अभियान के लिए राजस्थान पत्रिका को धन्यवाद। वर्तमान राजनीति में केवल जाति विशेष के लोग ही ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्यों कि आज हम यही चाहते है कि हमारे लोग सांसद, विधायक बने। हमें अपने दिमाग से अपने पन की बात को निकालना होगा। पार्टियों को चाहिए कि वो जातिगत बाहुल्यता को छोडकऱ टिकट दें।
प्रमिल नाहटा, जिलाध्यक्ष, जय जिनेन्द्र युवा मंच,
पत्रिका ने जब-जब अभियान चलाया है उसे पार पहुंचाया है। वर्तमान राजनीति में केवल यही देखने को मिलता है कि कोई विधायक या सांसद बन जाए तो वह जनता के बीच आना भूल जाता है। उनके सामने कितना भी गिड़गिड़ाओ सुनते ही नहीं है। नेता ऐसा होना चाहिए जो किसी वर्ग विशेष को नहीं देखते हुए प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चले। जनता से जिसका जुड़ाव हो। किसी भी समस्या को अपनी समस्या समझे।
दिनेश प्रजापत, शिव सेना जिला मीडिया प्रभारी,