
Nagaur. Sant Ramtaram Maharaj while reciting the story in Rampol and Ramnami Mahant Murliram Maharaj present on the stage
नागौर. रामचरित मानस जीवन जीने की कला सिखाती है। यह आदर्श जीवन का आधार स्तंभ है। रामपोल में चातुर्मास सत्संग में संत रमता महाराज प्रवचन में रामचरित मानस की विशेषताएं समझाएं रहे थे। उन्होंने कहा कि इसका पठन व पाठन सभी को करना चाहिए। किसी ग्रंथ को पढऩे से पहले उस ग्रंथ की महत्ता जाननी जरूरी होती है। व्यक्ति को शांत चित्त होकर वह मन एकाग्र करके प्रभु के चरणों में ध्यान लगा कर उस ग्रंथ रामचरितमानस का मनन करना चाहिए। रामायण जीवन में इसलिए जरूरी है कि उसमें ही हमें पता चलता है कि कैसे व्यक्ति को अपने जीवन की आधारशिला रखनी चाहिए। व्यक्ति की आधारशिला मजबूत होगी, तो जीवन में किसी भी विकट परिस्थिति का सामना व्यक्ति कर सकता है। ऐसा संभव जब ही होगा जब व्यक्ति अपने मन को प्रभु के चरणों की तरफ बढ़ेगा। जीवन के विकारों की दिशा को प्रभु की तरफ मोडऩे की आवश्यकता है। यह करने पर उसे उसे कर्मों को काटने की क्षमता मिलेगी, तभी वह भक्ति मार्ग पर चल सकता है। महंत संत मुरलीराम महाराज ने भी इस पर प्रकाश डाला। इस मौके पर बाल संत राम गोपाल रामस्नेही ने बताया कि 24 जुलाई को रामपोल में गुरु पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाएगा। इसमें नंदकिशोर बजाज, कांतिलाल कंसारा, इच्छराम कंसारा, नंदलाल प्रजापत, दीनदयाल शर्मा, मदनमोहन आदि थे।
Published on:
20 Jul 2021 08:28 pm
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