
चौसला. दीपावली पर्व के दौरान एक मोहल्ले में रंगीली बनाती बालिकाएं।
चौसला. रंगोली शब्द सुनते ही दिलों-दिमाग में रंगों की उमंगें हिलौरें लेने लगती है। शुभ मौके पर घर के द्वार में रंगोली सजाना हमारी भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है और हमें हमारे वास्तविक रीति रिवानों से बांधे रखती है। आदि काल से चली आ रही इस परंपरा का वजूद कायम है। पहले विभिन्न रंगों से घर-आंगन में रंगोली सजाई जाती थी, लेकिन वर्तमान में आधुनिक चकाचौंध में परम्परागत रंगोली की कद्र घटती जा रही है। लोग आजकल रेडिमेड रंगोली लाकर घरों को सजा रहे है। रंगोली के बिना दीपावली अधूरी है। ग्रामीण क्षेत्र के कई घरों में आज भी यह परंपरा कायम है। तथा कई इलाकों में दिवाली के पांचों दिन घरों में अलग-अलग प्रकार की रंगोली बनाकर पूजा की जाती है। बाजार में आजकल तो रेडिमेड विभिन्न प्रकार की रंगोली आसानी मिल जाती है। यह सामान्य से थोड़ी अलग दिखने वाली डिजाइन है। जिसमें आठ कोण होते है। इसमें सफेद रंग का प्रयोग बहुत ही खूबसूरती से किया गया है, जो रंगोली के डिजाइन को उभारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बीच में हरा रंग के अलावा विभिन्न रंगों का इस्तेमाल किया गया है।
Published on:
29 Oct 2018 06:41 pm
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