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संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रहे दुर्लभ प्राणी

लोमड़ी, झाऊ चूहा, वन बिलाव, नेवला को संरक्षण की दरकार

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संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रहे दुर्लभ प्राणी

कुचेरा. आवास की खोज में निकला झाऊ चूहा।

कुचेरा. नागौर जिले के वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में विचरण कर रहे दुर्लभ मरुस्थलीय वन्य प्राणी संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। ग्लोबल वोर्मिंग के कारण बदलते जलवायु परिवेश, तारबंदी - जाली के बढ़ते चलन से आवासीय स्थलों की कमी सहित अन्य विभिन्न कारणों के कारण लोमड़ी, वनबिलाव, झाऊ चूहा, नेवला, गोह, पाटा गोह आदि वन्य प्राणियों का अस्तित्व संकट में है।

कहीं सियार, भेड़ियों की तरह चित्रों में न समा जाए

बुजुर्गों के अनुसार पहले क्षेत्र में सियार, भेड़िए, लक्कड़ बग्गे आदि वन्य प्राणी बहुतायत में पाए जाते थे। जंगलों की कटाई से आवास नहीं बचने, जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न कारणों से वे पलायन कर गए और वर्तमान में उनके केवल किताबों में चित्र ही देखने को मिल रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों ने बचे हुए दुर्लभ वन्यजीवों का अस्तित्व बचाने के लिए उनके संरक्षण की मांग उठाई है।
बिल बनाने को नहीं आसरा
वन्यजीव प्रेमियों ने बताया कि पूर्व में खेतों की मेड़ आदि पर बड़ी-बड़ी माठ छोड़ी जाती थी। बड़े -बड़े रेतीले धोरे भी रहते थे। जिनमें लोमड़ी, वनबिलाव, नेवले, गोह, पाटा गोह, झाऊ चूहे आदि बिल बनाकर रहते थे। जमीन की बढ़ती कीमतों, मिट्टी की खुदाई आदि से सिंव, माठ व रेतीले धोरे उठाने से बिल बनाने को जगह नहीं मिल पाती है। इससे इन दुर्लभ वन्यजीवों को आसरे का संकट खड़ा हो गया है।

दुर्घटना भी बन रही कारण

क्षेत्र से निकल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग- 58 सहित विभिन्न सड़कों पर तेज गति से चल रहे वाहनों की चपेट में आकर आए दिन दुर्घटना के शिकार होने से भी दुर्लभ वन्यजीवों में कमी हुई है।
इनका कहना है
खेतों की सिंव व माठ हटाकर तारबंदी व जाली के बढ़ते चलन, रेतीले धोरों को ट्रोलियों में भरकर बेचने सहित कई कारणों से लोमड़ी, वन बिलाव, झाऊ चूहा आदि के प्राकृतिक आवास लुप्त होने के साथ ही इन वन्य प्राणियों का अस्तित्व भी संकट में पड़ने लगा है। इन्हें उचित संरक्षण मिलना चाहिए।

गोरीशंकर बिश्नोई, वन्यजीव प्रेमी।
राष्ट्रीय राजमार्ग- 58 सहित विभिन्न सड़कों पर तेज गति से चल रहे वाहन दुर्लभ वन्य जीवों का काल बन रहे हैं। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में वाहन चालकों को सावधान रहना चाहिए। इन दुर्लभ वन्यजीवों के आवास पर भी उनके बच्चे इन्तजार कर रहे होते हैं।
कंवरीलाल डारा, वन्यजीव प्रेमी

लोमड़ी, नेवला, वनबिलाव, झाऊ चूहा आदि दुर्लभ वन्य जीवों का अस्तित्व संकट में है। इन्हे बचाने के लिए सरकार को रणनीति बनाकर उपाय करना चाहिए।

हनुमान पूनिया, वन्यजीव प्रेमी।