
RGHS Scheme
नागौर. जिले में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। जून 2025 के बाद से जिले में आरजीएचएस के तहत पंजीकृत निजी दवा दुकानदारों और निजी अस्पतालों के भुगतान अटके पड़े हैं। समय पर भुगतान नहीं होने से दवा दुकानदारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी है। इसका सीधा असर पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं पर पड़ रहा है। इस संबंध में बामनवास विधायक इंदिरा मीणा ने विधानसभा के चौथे सत्र में सवाल भी लगाए थे, लेकिन उनका जवाब नहीं दिया गया।
आरजीएचएस में पंजीकृत निजी केमिस्टों का कहना है कि योजना के तहत दवा आपूर्ति के करोड़ों रुपए बकाया हैं। कई मेडिकल स्टोरों को पिछले छह से सात माह से भुगतान नहीं मिला। लंबे समय से भुगतान अटका रहने के कारण केमिस्टों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और कई दुकानदार अब उधार में दवाएं देने की स्थिति में नहीं हैं। इससे मरीजों को तकलीफ हो रही है।
केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के साथ मॉनिटरिंग कमजोर है। फाइलें महीनों तक विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़ी रहती हैं। इससे भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। संगठनों का कहना है कि कई बार आवश्यक दस्तावेज और बिल समय पर जमा होने के बावजूद भुगतान नहीं किया जाता। व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो केमिस्ट एसोसिएशन ने आरजीएचएस योजना का बहिष्कार कर हड़ताल की चेतावनी दी है।
जानकारों के अनुसार, आरजीएचएस में प्रभावी मॉनिटरिंग का अभाव, तकनीकी खामियां और समय पर बजट आवंटन नहीं होने से यह संकट गहराया है। जिले सहित प्रदेशभर में जून 2025 के बाद के अधिकांश बिल अभी तक स्वीकृत नहीं हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर नोडल अधिकारियों के बार-बार बदलने से भी व्यवस्था प्रभावित हुई है।
निजी अस्पतालों की स्थिति भी चिंताजनक
आरजीएचएस योजना से जुड़े निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि जून 2025 के बाद के क्लेम अब तक लंबित हैं। ऑपरेशन, जांच, भर्ती और दवा से जुड़े बिलों का भुगतान अटकने से अस्पतालों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है। कई अस्पताल प्रबंधन आरजीएचएस से जुड़े मरीजों को भर्ती करने से कतराने लगे हैं। उन्हें भुगतान मिलने तक सीमित सेवाएं दे रहे हैं। इससे योजना का उद्देश्य कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
सहकारी उपभोक्ता भंडार भी संकट में
दूसरी ओर, नागौर जिले के सहकारी उपभोक्ता भंडारों पर भी भुगतान संकट है। भुगतान नहीं मिलने से कई स्थानों पर दवा काउंटर बंद करने की स्थिति आ गई है। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा । इसका सीधा असर जिले के पेंशनर्स और काफी संख्या में ओपीडी मरीजों पर पड़ रहा है। इन्हें मजबूरी में बाजार से महंगी दर पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि आरजीएचएस योजना लागू होने से उन्हें राहत की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान हालात में योजना बोझ बन गई है। दवा काउंटर बंद होने, निजी केमिस्टों का दवा देने से इनकार और अस्पतालों की सीमित सेवाओं के कारण मरीजों को उपचार में परेशानी उठानी पड़ रही है।
दवा और इलाज की व्यवस्था हो सकती है ठप
दवा दुकानदारों व निजी अस्पताल संचालकों ने चिकित्सा विभाग से तत्काल बकाया भुगतान जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं होने पर नागौर जिले में आरजीएचएस के तहत दवा और इलाज की व्यवस्था ठप हो सकती है। इससे हजारों पेंशनर्स, कर्मचारी और मरीजों को परेशानी होगी।
मरीजों के बिल लम्बे समय से पेंडिंग
पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि मरीजों के बिल भी लम्बे समय से पेंडिंग पड़े हैं। जलदाय विभाग में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के कैंसर का इलाज जोधपुर एम्स अस्पताल से चल रहा है, लेकिन दवाइयों के बिल पिछले दो साल से पेंडिंग हैं। विभाग ने सिर्फ एक बिल को अप्रूव किया है ।
2.70 करोड़ बकाया
जिले में सहकारी उपभोक्ता भंडार के 2.70 करोड़ रुपए बकाया हैं। बकाया भुगतान को लेकर हर महीने पत्र लिख रहे हैं। समय पर भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों को वेतन देने में परेशानी आती है।
- सरोज चौधरी, अध्यक्ष, दी नागौर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार, नागौर
जयपुर से होता है भुगतान
आरजीएचएस का भुगतान जयपुर स्तर से होता है। हमारे पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
- डॉ. जेके सैनी, सीएमएचओ, नागौर।
Updated on:
04 Jan 2026 11:35 am
Published on:
04 Jan 2026 11:34 am
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