
रेण. शरद पूर्णिमा अवसर पर दरियाव खेजडा आश्रम में प्रवचन करते संत पांचाराम महाराज व श्रद्धालु।
रेण. एनएच 89 स्थित दरियाव खेजड़ा आश्रम में संत पांचाराम के सान्निध्य में शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। संत पांचाराम ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शरद पूर्णिमा का महत्व है। इस दिन रात्रि में चंद्रमा सोलह कलाओं के साथ खिलता है। तथा अमृत की वर्षा होती है। उन्होंने कहा कि जन्म-मरण रूपी रोग का निवारण सद्गुरु की दी गई ज्ञान रूपी औषधियों से होती है। सत्संग ही जीवन की सभी समस्याओं का एकमात्र निदान है। सत्संग जीवन का रस है, विचारों का अमृत तथा जीवन का आनंद है। परमानंद की प्राप्ति के लिए सत्संग के अतिरिक्त अन्य कोई मार्ग नहीं है। प्रभु का नाम-स्मरण तथा कीर्तन से महान आध्यात्मिक शक्ति का प्रादुर्भाव होता है। इस दौरान संत हरिदास, रमताराम, राजाराम ,साध्वी सिंवरी बाई, रामगीता, श्रद्धालु भीकाराम अजनबी, हुकमीराम घटेला, बीरमराम जांखड, दयालराम रुणवाल, घनश्याम जांगीड़, जगदीश गढ़वाल, जेठाराम बीजाण्डा, धनाराम, सेवाराम, मीसाराम लेटियाल, रामकिशोर जांखड़ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
Published on:
25 Oct 2018 06:38 pm
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