
करीब दस माह से सेक्स वर्कर को फूड पैकेट नहीं मिल रहे हैं। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले की करीब तीन चौथाई सेक्स वर्कर को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मुफ्त गेहूं तक भी नहीं मिल पा रहा है।,करीब दस माह से सेक्स वर्कर को फूड पैकेट नहीं मिल रहे हैं। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले की करीब तीन चौथाई सेक्स वर्कर को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मुफ्त गेहूं तक भी नहीं मिल पा रहा है।,करीब दस माह से सेक्स वर्कर को फूड पैकेट नहीं मिल रहे हैं। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले की करीब तीन चौथाई सेक्स वर्कर को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मुफ्त गेहूं तक भी नहीं मिल पा रहा है।
नागौर. करीब दस माह से सेक्स वर्कर को फूड पैकेट नहीं मिल रहे हैं। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले की करीब तीन चौथाई सेक्स वर्कर को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मुफ्त गेहूं तक भी नहीं मिल पा रहा है। वो इसलिए कि ये खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़ ही नहीं पाई हैं। आम लोगों की तरह जीवन-यापन करने की सरकारी कोशिश ऐसी कारगुजारी से दम तोड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले में इस समय 842 सेक्स वर्कर हैं। इनमें केवल 194 ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत चिन्हित हैं। यानी इन्हें ही हर माह पांच किलो गेहूं मुफ्त मिल रहा है। कोढ़ में खाज वाली कहावत यहां भी चरितार्थ हो रही है, शेष 648 के नसीब में तो यह भी नहीं है और उस पर मुफ्त मिल रहा फूड पैकेट तक और बंद हो गया। ऐसा नहीं है कि सेक्स वर्कर के हित में कार्यरत गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) की ओर से सरकार को कई पत्र भी भेजे गए लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सेक्स वर्कर को मुख्य धारा में लाने की सरकार की कवायद सुस्त पड़ गई है।
सूत्र बताते हैं कि सेक्स वर्कर के हित में कार्य करने वाले एनजीओ की तमाम कोशिश भी कामयाब नहीं हुई। इन सेक्स वर्करों को मार्च-23 तक फूड पैकेट मिले। असल में सरकार की ओर से रसद विभाग के जरिए ये फूड पैकेट एनजीओ तक पहुंचते हैं, जो हर सेक्स वर्कर को यह मुहैया कराता है। इस पैकेट में पांच किलो आटा-चावल, तेल, मसाले-नमक होते है। ये कब से शुरू हुए, इस पर भी अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। सरकार की ओर से ये पैकेट कोरोना काल से दिए जाने की बात कही जा रही है तो विश्वस्त सूत्र इन्हें पिछले साल सितम्बर से देने का दावा करते हैं। बहरहाल कुछ भी हो इस साल की शुरुआत में फरवरी-मार्च के बाद ये पैकेट देना बंद कर दिया गया।
खत पर खत, बमुश्किल गुजारा
सूत्रों ने बताया कि फूड पैकेट बंद होने पर एनजीओ की ओर से जिला रसद अधिकारी सहित तमाम उच्च अधिकारियों को इस बाबत खत पर खत भेजे। वो इसलिए भी कि सेक्स वर्कर फूड पैकेट ना मिलने की परेशानी को लेकर कई बार अपनी व्यथा सुना चुकी थीं। इसके चलते एनजीओ संचालक ने अपने स्तर पर खूब प्रयास किए पर सेक्स वर्कर को सरकार से मिल रहे सहयोग को चालू नहीं करवा पाए। यह भी सामने आया कि सेक्स वर्कर अपने परिवार व बच्चों के साथ गुजारा कर रही हैं। ऐसे में रहने के साथ खाने व अन्य इंतजाम के लिए भी भारी परेशानी उठा रही हैं।
पूरी तरह गोपनीय
तमाम कानूनी अड़चनों के बीच सेक्स वर्कर की जिंदगी पूरी तरह गोपनीय है। उनकी यह परेशानी तो उस समय उजागर हुई जब सरकार ने ही उन सेक्स वर्करों को तलाशना शुरू कर दिया जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा से चिन्हित हैं यानी मुफ्त में गेहूं ले रही हैं। गोपनीय तरीके से यह आदेश दो अफसरों के जरिए एनजीओ तक पहुंचा तो उनकी मुश्किल सामने आई। यह भी पता चला कि एक चौथाई को ही सहायता के रूप में मुफ्त गेहूं मिल पा रहा है, शेष दस महीने से सरकार का मुंह ताक रही है।
...आगे क्या होगा
सूत्रों का कहना है कि सरकार ने हाल ही में पूछा कि जिले में कितने सेक्स वर्कर मुफ्त गेहूं ले रहे हैं? अब यह भी रहस्य बना हुआ है कि ऐसा क्यों पूछा गया। संभवतया कुछ समय तक फूड पैकेट के साथ मुफ्त गेहूं का लाभ कुछ सेक्स वर्करों ने उठाया। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि सरकार फूड पैकेट के बदले मुफ्त गेहंू देने का प्लान कर रही है। हालांकि बीच में आचार संहिता-चुनाव के बाद आने वाली सरकार क्या करती है? यह समय ही बताएगा।
कोरोना काल में भी हुआ था बंद
सेक्स वर्करों को फूड पैकेट देने का सिलसिला कुछ बरसों से चल रहा है। एक बार कोरोना काल में अगस्त 21 में भी इनको फूड पैकेट देना बंद कर दिया गया था। सोनागाछी की एक सेक्स वर्कर ने कोरोना काल में देह व्यापार से जुड़ी महिलाओं की परेशानी को लेकर एक याचिका दायर की थी। इसमें कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन में इनकी परिस्थितियों का हवाला देते हुए राहत की गुहार की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सेक्स वर्कर को राशन सामग्री वितरण करने का आदेश दिया था। आदेश नवंबर 2020 से राजस्थान में अमल में आया था।
कम -ज्यादा होती रहती हैं
एनजीओ सेक्स वर्करों की काउंसलिंग करती है। वे इन्हें सरकारी योजनाओं से अवगत कराती हैं। देह व्यापार छोडकऱ मूल स्वरूप में ये कम ही लौटती हैं, यह भी तथ्य सामने आया। एनजीओ उनके स्वास्थ्य व कल्याण के हर स्तर पर प्रयास करता है। फूड पैकेट नहीं मिलने के साथ अन्य सरकारी सहायता नहीं प्राप्त होने पर भी उनमें गुस्सा है। चिन्हित सेक्स वर्कर की हर छह महीने में एचआईवी जांच व तीन महीने में चेकअप कराया जाता है।
इनका कहना
कुल 842 सेक्स वर्कर में से 194 को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ा हुआ है। इन 194 को मुफ्त गेहूं दिया जा रहा है। ये जानकारी दे दी गई है। आदेश मिलने पर आगे की कार्ययोजना तय होगी।
-अंकित पचार, डीएसओ, नागौर।
Published on:
13 Dec 2023 09:14 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
