
Shardiya Navratri will start after 30 years in Chitra Nakshatra, Budhaditya and Vaidhriti Yoga
-कलश स्थापना के लिए इस बार 45 मिनट का रहेगा मुहूर्त
नागौर. 30 साल बाद चित्रा नक्षत्र, बुधादित्य और वैधृति योग में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 15 अक्टूबर से हो रहा है। यह संयोग 30 साल बाद बना है। हाथी ज्ञान, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है। हाथी का संबंध भगवान गणेश और महालक्ष्मी से भी है। इस कारण पूरे साल मांगलिक कार्यों के साथ बारिश भी अच्छी होगी। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि शुरुआत बहुत शुभ है। अत्याधिक बारिश होने से किसानों की खुशहाली का संकेत मिलता है। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। रात्रि एवं अमावस्या के दिन घट स्थापित करने की मनाही होती है। घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है। अगर किसी कारण वश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं। प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। सामान्यत: यह लगभग 48 मिनट का होता है। हालांकि इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त तथा द्विस्वभाव लग्न धनु सर्वश्रेष्ठ है। इसी दिन चित्रा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। निर्णय सागर पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को यानी पहले दिन कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को 12 बजकर 1 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक है। ऐसे में कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त इस बार 45 मिनट ही रहेगा। नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां सिद्धिदात्री और मां महागौरी का पूजन किया जाएगा।
शारदीय नवरात्रि की इस प्रकार रहेंगी तिथियां
15 अक्टूबर 2023 - मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि
16 अक्टूबर 2023 - मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि
17 अक्टूबर 2023 - मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि
18 अक्टूबर 2023 - मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि
19 अक्टूबर 2023 - मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि
20 अक्टूबर 2023 - मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि
21 अक्टूबर 2023 - मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि
22 अक्टूबर 2023 - मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी
23 अक्टूबर 2023 - महानवमी, (नौवां दिन) शरद नवरात्र व्रत पारण
24 अक्टूबर 2023 - मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, दशमी तिथि (दशहरा)
कलश स्थापना की सामग्री
मां दुर्ग के लिए लाल रंग का आसन, कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी होनी चाहिए।
कैसे करें कलश स्थापना
नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर मंदिर को व्यवस्थित करने के पश्चात गणपति मंत्र का जाप करने के साथ मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योति जलानी चाहिए। कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज डालें। अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाने के बाद लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधें। गंगाजल यदि है तो बढिया रहेगा, लेकिन नहीं है तो फिर फिर इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलानी चाहिए। इसमें रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालने के बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाने चाहिए। बिना छिले एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध कर उसको कलश के ऊपर रखना चाहिए। अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के बीच रख दें, जिसमें जौ डाले गए हैं। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्प लिया जाता है। इन प्रक्रियाओं के दौरान मां दुर्गा के आवाहन आदि प्रत्येक प्रक्रिया के मंत्र का जाप करना चाहिए।
Published on:
05 Oct 2023 10:15 pm
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