सर्वार्थ सिद्धि योग में सावन के अंतिम सोमवार पर बरसेगी शिव कृपा

Nagaur. 16 अगस्त , सोमवार को अनुराधा नक्षत्र. नक्षत्र आने से मानस नामक योग का निर्माण हो रहा है साथ ही सुबह 6 बजकर14 से रात्रि 3 बजकर एक मिनट तक अर्थात पूरे दिन ही सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा।

By: Sharad Shukla

Published: 15 Aug 2021, 11:11 PM IST

नागौर. पंचाग के अनुसार 22 अगस्त को सावन मास का समापन हो जाएगा। इसलिए 16 अगस्त को अंतिम सोमवार माना गया है। इस सावन महीने को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है.सावन के महीने में भगवान् भोले नाथ की पूजा को महत्त्वपूर्ण और प्रभावकारी माना जाता है. इस बार सावन महीने में 4 सोमवार का अद्भुत संयोग है और इस बार श्रावण मास रविवार से शुरू हो कर रविवार को ही खत्म हो रहा है।. इस सावन के मास में अनेक प्रकार के शुभ योग बने हैं। इन दिनों पूजा करने और रुद्रभिषेक करने से शिव की पूजा करने वालों को सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि 16 अगस्त , सोमवार को अनुराधा नक्षत्र. नक्षत्र आने से मानस नामक योग का निर्माण हो रहा है साथ ही सुबह 6 बजकर14 से रात्रि 3 बजकर एक मिनट तक अर्थात पूरे दिन ही सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। नवग्रहों के राजा सूर्य देव भी रात्रि 1 बजकर 16 पर कर्क राशि से श्रम की राशि अर्थात सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। अत: इस दिन विशेष शुभ फल की प्राप्ति के लिए दूध में शहद मिला कर पीपल के पत्ते का चम्मच बना कर उससे शहद मिश्रित दूध का अभिषेक करना चाहिए। सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से बहुत ही पवित्र और विशेष माना गया है. ग्रहण योग सावन के आखिरी सोमवार पर वृश्चिक राशि में बन रहा है. ग्रहण योग का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, लेकिन वृश्चिक राशि वाले इस योग से अधिक प्रभावित होंगे। चंद्रमा जब केतु के संपर्क में आता है तो चंद्रमा के गुण नष्ट हो जाते हैं यानी चंद्रमा पीडि़त हो जाता है। चंद्रमा के पीडि़त होने से व्यक्ति को मानसिक, तनाव, अज्ञात भय, मन में बुरे विचार आदि आने लगते हैं. इसलिए इसकी अशुभता को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। 16 अगस्त को चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। जहां पर केतु पहले से विराजमान हैं. इसलिए धन, सेहत और संबंधों के मामले में सावधान रहने की जरूरत है. केतु और चंद्रमा से ग्रहण योग बन रहा है. ये ग्रहण योग लगभग दो दिनों तक रहेगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से इस अशुभ योग से बचा जा सकता है. भगवान शिव की पूजा करने से केतु की अशुभता में कमी आती है। चंद्रमा भगवान शिव के उपासक हैं. इसलिए इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करें, लाभ प्राप्त होगा। सोमवार को राहु काल का विशेष ध्यान रखना चाहिए. राहु काल में पूजा और शुभ कार्य प्रारंभ नहीं किए जाते हैं. अत: राहु काल प्रारंभ होने से पहले ही पूजन अभिषेक आदि अगर शुरू कर दिया जाए तो उसमें राहुकाल का दोष मान्य नहीं रहता है।सावन सोमवार को पंचांग के अनुसार सुबह 7 बजकर 46 मिनट से सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक राहु काल रहेगा।

Sharad Shukla Reporting
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