
कहीं ज्यादा खर्च के बाद भी चुनाव हार गए तो कहीं कम खर्च के साथ भी जीत का परचम फहराया। कोई ऐसा भी रहा जिसने ज्यादा वोट तो पाए पर खर्च भी ज्यादा किया।
कहीं ज्यादा खर्च के बाद भी चुनाव हार गए तो कहीं कम खर्च के साथ भी जीत का परचम फहराया। कोई ऐसा भी रहा जिसने ज्यादा वोट तो पाए पर खर्च भी ज्यादा किया। नागौर जिले की दस विधानसभा सीट पर चुनावी खर्च का ब्योरा प्रस्तुत किया तो यही हकीकत सामने आई। हकीकत में खर्च का आकलन तो कैसे हो, यह आंकड़े वो हैं जो प्रत्याशियों की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। मेड़ता से कांग्रेस प्रत्याशी शिवरतन वाल्मीकि सबसे खर्चीले प्रत्याशी रहे। उन्होंने सर्वाधिक 35 लाख 29 हजार 889 रुपए खर्च किए। खर्च के मामले में दूसरे नंबर पर मकराना विधानसभा सीट से चुनाव जीते कांग्रेस के जाकिर हुसैन गैसावत तो नावां विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र चौधरी रहे।
चुनाव का परिणाम आए एक महीने से अधिक हो गए। चुनाव के दौरान खर्चे को लेकर प्रत्याशियों पर हमेश अंगुली उठती रही है। चुनाव आयोग की बंदिश और खर्च का सिलसिलेवार विवरण देना भी अब अति आवश्यक हो गया है। कांग्रेस/भाजपा के साथ अन्य दलों के ही नहीं निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया। हालांकि खर्च के लिहाज से ब्योरा पेश करने वाले कई विजयी कंजूस से नजर आए। कुछ निर्दलीय ने चंद हजारों में अपना काम चलाया। राजनीतिक दल के कई प्रत्याशियों ने पार्टी से मिली मदद का भी ब्योरा दिया है।
प्रत्याशियों की ओर से दिए गए खर्च पर नजर डालें तो नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले की दस विधानसभा सीट में से मेड़ता सिटी पर कांग्रेस प्रत्याशी शिवरतन वाल्मीकि ने 35 लाख 29 हजार 889 रुपए खर्च किए जो जिले में सर्वाधिक हैं। जबकि उनको हराने वाले भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण राम ने 28 लाख 34 हजार 397 रुपए ही खर्च किए। तीसरे स्थान पर आई रालोपा की इंदिरा बावरी ने तकरीबन साढ़े नौ लाख में ही पूरा चुनाव लड़ लिया।
मकराना विधानसभा सीट से चुनाव जीते कांग्रेस के जाकिर हुसैन गैसावत ने चुनाव खर्च 34 लाख 48 हजार 30 रुपए बताया जबकि उनके मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी सुमिता भींचर ने भी खर्च खूब किया। उनका यह खर्च करीब 31 लाख 32 हजार रुपए रहा। इसी तरह नावां सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र चौधरी ने चुनाव पर करीब 33 लाख रुपए खर्च किए जबकि यहां से जीत दर्ज कराने वाले भाजपा के विजय चौधरी ने इनके मुकाबले करीब 24 लाख 89 हजार रुपए खर्च किए यानी महेंद्र चौधरी के मुकाबले आठ लाख रुपए कम।
यहां भी जीतने वालों का कम खर्च
नागौर विधानसभा क्षेत्र से हारी भाजपा प्रत्याशी ज्योति मिर्धा ने चुनाव पर करीब 26 लाख 85 हजार रुपए खर्च किए जबकि उन पर जीत दर्ज कराने वाले कांग्रेस के हरेंद्र मिर्धा ने महज 18.91 लाख रुपए खर्च किए। तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय हबीबुर्रहमान ने 9.82 लाख रुपए खर्च किए। निर्दलीय सुरेंद्र दौतड़ ने भी 4.58 लाख रुपए बहाए। इसी तरह खींवसर विधानसभा का चुनाव भी खर्च के मामले में कम रोचक नहीं है। यहां वोटों के भारी अंतर से हारने वाले कांग्रेस के तेजपाल मिर्धा ने करीब साढ़े 29 लाख रुपए जबकि भाजपा के रेंवतराम डागा ने 27 लाख 59 हजार 836 रुपए खर्च किए। यहां से चुनाव जीतने वाले रालोपा के हनुमान बेनीवाल ने महज 17 लाख 30 हजार 828 रुपए खर्च किए। एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी दुर्गसिंह ने दस लाख बीस हजार रुपए चुनावी व्यय का ब्योरा दिया है। परबतसर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास गावडिय़ा का खर्च सिर्फ दस लाख 28 हजार 333 रहा जबकि चुनाव हारने वाले भाजपा के मानसिंह किनसरिया ने 17 लाख 89 हजार से अधिक खर्च किए।
निर्दलीय ने सर्वाधिक खर्च कर जीत हासिल की
डीडवाना विधानसभा सीट से निर्दलीय यूनुस खान ने 29 लाख 83 हजार रुपए से अधिक खर्च कर जीत हासिल की। उनके मुकाबले में भाजपा के जितेंद्र सिंह लोधा ने 26 लाख 19 हजार तो कांग्रेस के चेतन सिंह चौधरी ने 21 लाख 56 हजार रुपए खर्च किए। जायल सीट पर भाजपा की मंजू बाघमार ने 26 लाख 53 हजार रुपए खर्च किए जबकि उनके सामने हारने वाली कांग्रेस की मंजू मेघवाल ने इनसे आधे 12 लाख 90 हजार रुपए खर्च किए। यहां रालोपा के बीएल भाटी ने करीब सात लाख खर्च किए। डेगाना विधानसभा सीट से भाजपा के अजय सिंह किलक ने 17 लाख 68 हजार रुपए खर्च किए जबकि कांग्रेस के विजय पाल मिर्धा ने 15 लाख 14 हजार रुपए। यहां रालोपा के लक्ष्मण सिंह मुवाल ने 8 लाख 64 हजार रुपए बहाए। लाडनूं से कांग्रेस के मुकेश भाकर ने 18 लाख 80 हजार रुपए खर्च कर भाजपा के करणी सिंह पर जीत हासिल की। करणी सिंह ने चुनाव में बीस लाख 14 हजार से अधिक खर्च किए थे।
हजारों में ही सिमट गए
चुनाव खर्च का ब्योरा देने वाली बसपा-आप ही नहीं अन्य पाटियों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों का हिसाब-किताब कोई खासा नहीं था। कुछ हजारों से दो-ढाई लाख तक में अधिकाधिक प्रत्याशी ने चुनाव लड़ लिया। कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों ने खर्च की सीमा जरूर बढ़ाई । हर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में खड़े होने वाले एक या दो प्रत्याशियों पर यह आरोप जरूर लगा कि किसी प्रत्याशी को हराने अथवा जिताने के लिए समझौते के तहत वे ऐसा कर रहे हैं। यह भी सुनने को मिला कि उनके फाइनेंसर भी कोई और हैं।
Published on:
06 Jan 2024 09:46 pm
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