
बुटाटी धाम मंदिर में करोड़ों के गबन का मामला (पत्रिका फोटो)
Rajasthan Butati Dham Temple Nagaur: नागौर जिले के बुटाटी धाम स्थित संत श्री चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति की ओर से की गई वित्तीय अनियमितताओं का जांच कमेटी की ओर से खुलासा करने के बाद मंदिर समिति की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार को सांसद हनुमान बेनीवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों एवं धर्मप्रेमियों ने मंदिर में आए दान का गबन करने के मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग की।
उधर, जांच कमेटी ने जिला कलक्टर को जो रिपोर्ट सौंपी है। उसमें मंदिर समिति के सदस्यों की ओर से संचालित सभी बैंक खातों, सावधि जमा एवं ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक (फ्रीज) लगाने व इन खातों का पूर्ण नियंत्रण एवं संचालन अधिकार नवनियुक्त प्रशासक को हस्तांतरित करने की अनुशंसा की है। जांच कमेटी ने संस्था के सुचारू संचालन, दैनिक पूजा-पाठ की निर्बाध व्यवस्था के लिए राजपत्रित अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करने को कहा है।
गौरतलब है कि कमेटी ने जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया मंदिर समिति के कार्यकाल के दौरान करीब 22 करोड़ 74 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता, देवस्थान निधियों के दुरुपयोग तथा सुनियोजित गबन का प्रथम दृष्टया खुलासा किया है।
गबन के इस मामले को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। सांसद ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा कि श्रद्धालु मंदिर में अपनी श्रद्धा, विश्वास और सेवा भाव से चढ़ावा अर्पित करते हैं।
उस धन का दुरुपयोग और गबन जनभावनाओं के साथ विश्वासघात है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। सांसद ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
उधर, रविवार को समाचार प्रकाशित होने के बाद बुटाटी धाम संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने गत दिनों जिला कलक्टर को सौंपे ज्ञापन का हवाला देते हुए मंदिर समिति की जांच रिपोर्ट पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई।
उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर के निर्देश पर गठित जांच समिति के अध्यक्ष एवं तत्कालीन उपखंड अधिकारी डेगाना ने जांच प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया। कमेटी ने जांच के दौरान उनका पक्ष नहीं सुना और उनकी ओर से प्रस्तुत जवाब एवं दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लिए बिना ही रिपोर्ट तैयार कर दी।
देवेंद्र सिंह ने दावा किया कि जांच के लिए मांगे गए सभी मूल दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए गए थे और जांच में पूरा सहयोग किया था। इसके बावजूद समिति के पदाधिकारियों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने जांच रिपोर्ट को निष्पक्ष नहीं बताते हुए नए सिरे से अन्य अधिकारी से जांच कराने की मांग रखी है।
Updated on:
13 Jul 2026 05:32 pm
Published on:
13 Jul 2026 05:32 pm
