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राजस्थान में भू-राजस्व से संबंधित अधिनियमों में हो सरलीकरण, तभी कम हो राजस्व मुकदमों का अंबार

Nagaur News: राजस्व अधिकारियों की कार्यकुशलता में कमी व लंबे समय से रिक्त पदों के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है।

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नागौर

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Alfiya Khan

Jan 28, 2025

file photo

श्यामलाल चौधरी
नागौर। भू-राजस्व से संबंधित अधिनियमों के नियमों का सरलीकरण हो जाता तो भाई भतीजों के बीच जमीन बंटवारे, पड़ोसी और रास्ते के विवादों के मुकदमों का अंबार नहीं लगता। इस संबंध में बनी कमेटी ने आठ महीने में कोई सुझाव नहीं दिया।

हालत यह है कि पिछले वर्ष में ही विचाराधीन मुकदमों की संख्या ही 6.57 लाख से ऊपर जा चुकी थी और अब एक वर्ष में संख्या ओर बढ़ चुकी है। राजस्व अधिकारियों की कार्यकुशलता में कमी व लंबे समय से रिक्त पदों के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है।

सरकार ने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 व राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 व इसके अंतर्गत बने नियमों की समीक्षा एवं सरलीकरण के लिए 30 अप्रेल 2024 को एक सरलीकरण कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने राजस्व मंडल अजमेर के साथ समस्त संभागीय आयुक्त एवं जिला कलक्टरों से सरलीकरण के संबंध में सुझाव मांगे थे। आठ महीने बाद भी कमेटी ने अपने सुझाव नहीं दिए।

लंबित प्रकरणों के प्रमुख कारण

राजस्व मामलों के विशेषज्ञ व वरिष्ठ आरएएस अधिकारी ने बताया कि राजस्व प्रकरण बढ़ने के पीछे राजस्व अधिकारियों के रिक्त पद भी प्रमुख कारण है। राजस्व अधिकारियों एवं रीडर को प्रशिक्षण की भी आवश्यकता है।

फैक्ट फाइल

■ एक अप्रैल 2019 तक कुल लंबित राजस्व प्रकरण 4,51,996
■ एक अप्रेल 2019 से 31 मार्च 2024 तक कुल पंजीकृत प्रकरण 7,30,815
■ पांच साल में फैसले किए गए 5,24,672
■ 31 मार्च, 24 तक लम्बित प्रकरण 6,58,139
■पांच साल में बढ़े मुकदमे 2,06,143

राजस्व के पारिवारिक प्रकरण अधिक

विशेषज्ञों के अनुसार राजस्व प्रकरणों में बंटवारे, सहखातेदारों, भाइयों के बीच जमीन को लेकर विवाद होना, रास्तों के विवाद प्रमुख हैं। पिछले बरसों से पिता की सम्पत्ति में बेटों के साथ बेटियों को बराबर का हकदार बनाने से भी प्रकरण बढ़े हैं।

पुराने प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण

राज्य सरकार के त्वरित और गुणवत्तापूर्वक न्याय करने के निर्देशों के अनुरूप पुराने प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। साथ ही पीठासीन अधिकारियों का नियमित तौर पर राजस्व न्यायालयों में बैठना, विभिन्न वाद संबंधी औपचारिकताएं जैसे नोटिस तामीली, कुर्रेजात रिपोर्ट आदि कार्य समय पर पूरे कर रहे हैं।
- डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, जिला कलक्टर, जयपुर

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