
sister is taking care of physically handicapped brother
बजरंग पारीक/कुचामनसिटी/नागौर। सात फेरे लेकर साथ जीने और मरने की कसम खाने वाली जीवनसंगिनी ने बुरे वक्त में भले ही साथ छोड़ दिया, लेकिन हाथ पांव से अपाहिज होने के बाद अब छोटी बहन ही इकलौते भाई का सहारा बनी हुई है। शहर में एक अपाहिज व्यक्ति को ट्राई साइकिल पर उसकी बहन बाजार से घुमाकर लाती है और उसकी देखभाल करती है। उसका खाना पकाती भी है और खिलाती भी है। यूं तो भाई-बहन के प्यार को प्रदर्शित करने वाले कई किस्से कहानियां व नगमे है, लेकिन नागौर जिले के कुचामन कस्बे में स्टेशन रोड पर रहने वाले मुन्ना व मुन्नी भाई-बहन के प्यार का अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं। वर्षों पहले एक बीमारी के चलते शरीर से लाचार हुआ मुन्ना कब का जिंदगी से हार मान मौत को गले लगा चुका होता, लेकिन छोटी बहन मुन्नी के सहारे ने उसे जीवन के संघर्ष में कभी हारने नहीं दिया।
यह दास्तान है शहर में स्टेशन रोड पर एक झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले 55 वर्षीय मुन्ना की। 30 साल पहले मुन्ना भी हमारी तरह खुशहाल जीवन जी रहा था। कृषि मंडी के पास चाय की थड़ी लगा कर मुन्ना गुजारे लायक कमा लेता था। मुन्ना के जीवन में शायद खुशियां ज्यादा दिन के लिए नही थी। मुन्ना के बायें पैर में कैंसर होने पर उसे उपचार के लिए अजमेर ले जाना पड़ा, जिसके बाद चिकित्सकों ने मुन्ना के प्राण बचाने के लिए उसका बायां पैर काट दिया। कुछ दिनों बाद दायें पैर में भी सूजन व दर्द सहित अन्य तकलीफ होने पर अहमदाबाद ले जाया गया। उपचार के बाद आराम तो मिला लेकिन दायें पैर ने भी अच्छे से काम करना बंद कर दिया। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों हाथों की अंगुलियों में संक्रमण होने से हाथों की अंगुलियां खराब हो गई।
मुन्ना बताता है कि इस दौरान उसकी पत्नी भी उसे छोडक़र अपने मायके चली गई। अब मुन्ना के पास न रोजगार था व न ही जीवन में कोई खुशियां बची। बहन पर भी टूटा दु:खों का पहाड़ बहन मुन्नी (45) ने बताया कि भाई के लिए हमेशा बैचेन रहती थी। भाई की हंसती-खेलती जिन्दगी में ऐसा तूफान आया जो अपने साथ जीवन की सभी खुशियां बहा कर ले गया। भाई के दु:ख से दु:खी मुन्नी के भाग्य में भी शायद कुछ ओर ही लिखा था। लगभग 20 वर्ष पहले पति जगनसिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद मुन्नी अपने बेटों के साथ भाई के पास रहने आ गई। तब से मुन्नी अपने भाई मुन्ना का सहारा बनी हुई है। अब दोनों भाई बहन एक साथ जीवन यापन कर एक दूसरे का सहारा बने हुए हैं।
पिछले 18 वर्षों से भाई को लेकर जा रही है रामदेवरा
मुन्नी के लिए अपने भाई की खुशी ही सब कुछ है। 18 वर्ष पहले मुन्ना ने ट्राई साइकिल से रामदेवरा जाने की बात अपनी बहन से कही। बहन मुन्नी ने अपने भाई की आस्था को देखते हुए हां कर दी। पिछले 18 वर्षों से लगातार प्रत्येक वर्ष मुन्नी अपने भाई को रामदेवरा लेकर जाती है। खुद पैदल भाई की ट्राई साइकिल को सहारा देकर मुन्नी हर बार अपने भाई को रामदेवरा लेकर जाती है। शहर के रोडवेज बस स्टैंड पर बहन-भाई को मिठाई व फल देकर लोग रामदेवरा के लिए रवाना भी करते हैं।
साथ कमाते हैं साथ खाते हैं
शुरू में मुन्ना ने अपनी ट्राई साइकिल पर ही छोटी सी दुकान संचालित करने का प्रयास किया। मुन्ना अपनी ट्राई साइकिल पर टॉफी-बिस्किट सहित अन्य सामान बेचा करता था, लेकिन रोजगार चल नहीं पाया। इसके बाद मुन्ना ने अपनी ट्राई साइकिल पर माइक व बैटरी लगा ली। अब दोनों भाई-बहन दिन भर शहर में घूमकर अलग-अलग संस्थाओं का प्रचार-प्रसार करते हैं।
Published on:
22 Apr 2018 05:35 pm
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