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स्माइल प्लीज …पल भर की खुशी भुला देती है जिंदगी के गम

हम जब खुश रहते हैं, तो न सिर्फ अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाते हैं, साथ ही समाज में सकारात्मकता और सहमति का माहौल भी तैयार करते हैं

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खुशी एक आंतरिक अवस्था है, जो दुनिया के हर इंसान का अधिकार है’ यह शब्द हमें अहसास दिलाता है कि खुशी सिर्फ एक व्यक्तिगत भावना नहीं, साझा अनुभव है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का अहम हिस्सा बनती है। हम जब खुश रहते हैं, तो न सिर्फ अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाते हैं, साथ ही समाज में सकारात्मकता और सहमति का माहौल भी तैयार करते हैं। इस उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए हर साल 20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस (इंटरनेशनल-डे ऑफ हैप्पीनेस) मनाया जाता है। यह दिवस हमें सिखाता है कि खुशी पाना दुनिया में हर व्यक्ति का अधिकार है । यह सशक्त विचारधारा है जो जीवन में खुशी की तलाश करने और उसे बांटने की प्रेरणा देती है।

मानसिक शांति में खुशी का महत्व अत्यधिक

अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस का महत्व आज के दौर में और भी बढ़ गया है। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मानसिक शांति में खुशी का महत्व अत्यधिक है। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हम व्यक्तिगत आनंद और मानसिक शांति को नजऱअंदाज कर रहे हैं। इस दिन का उद्देश्य लोगों इस बात के लिए प्रेरित करना है कि वे अपनी मानसिक और शारीरिक भलाई को प्राथमिकता दें। खुशी को आदत के रूप में अपनाएं।

खुशी को लक्ष्य से जोड़ें

खुशहाल जीवन जीने के लिए इसे किसी लक्ष्य से जोड़ें, न कि लोगों या वस्तुओं से, ये शब्द अल्बर्ट आइंस्टीन के हैं, जो हमें बताते हैं कि खुशी बाहरी तत्वों से नहीं, बल्कि आंतरिक संतुष्टि और उद्देश्य से जुड़ी होती है। इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत खुशी को बढ़ावा देना नहीं है। यह वैश्विक कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य और समावेशी विकास के लिए एक आंदोलन बन चुका है।

भूटान से मिली दिवस की प्रेरणा

इस दिवस की शुरुआत 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने की थी। लेकिन इसके पीछे प्रेरणा भूटान से मिली। जो अपनी ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस (जीएनएच) नीति के लिए प्रसिद्ध है। भूटान का मानना है कि राष्ट्रीय विकास को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, नागरिकों की खुशी और कल्याण से मापा जाना चाहिए। भूटान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस विचार को प्रस्तुत किया और 2012 में यूएन ने आधिकारिक रूप से 20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस घोषित किया।

साल 2025 की थीम

अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस 2025 की थीम ‘दीर्घकालिक खुशी आपसी देखभाल और बड़े उद्देश्यों से आती है’ रखी गई है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि लंबे समय तक खुशी पाने के लिए हमें अपने संबंधों को मजबूत करने के अलावा एक दूसरे की देखभाल करने और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने की आवश्यकता है।इसलिए मनाया जाए प्रसन्नता दिवस-आज मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे बढ़ रहे हैं।

इस दिन का उद्देश्य

लोगों को यह समझाना है कि खुशी मानसिक शांति की कुंजी है।प्रसन्नता का साझा अनुभव समाज में प्रेम और सहिष्णुता को बढ़ावा देता है। यह दिन हमें दूसरों के साथ मिलकर खुशियां बांटने का अवसर देता है।-खुशी और सकारात्मक सोच हमें जीवन की कठिनाइयों से निपटने में मदद करती है। इस दिन को मनाने से लोग अपने जीवन में अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण को अपना सकते हैं।प्रसन्नता दिवस ये संदेश देता है कि खुशी सिर्फ एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है। खुशी पाना और देना मानव जाति का अधिकार है।

टॉपिक एक्सपर्ट ...

जीवन में खुशियां हमारे आसपास ही है। सकारात्मक सोच होने पर हम खुशी पा सकते हैं। प्रसन्नता जीवन की कई समस्याओं को हल कर देती है। खासकर मानसिक स्वास्थ्य खुशी से जुड़ा होता है। स्ट्रेश और डिप्रेशन को खुशी खत्म कर सकती है। हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों को इससे काफी हद तक रोका जा सकता है। खुश रहने वाले लोग काफी सोशल कनेक्ट होते हैं। खुश रहने की आदत बनानी होगी। प्रसन्नता शरीर के सभी तरह के हार्मोन को बैलेंस कर देती है।

डॉ. गिरीश बानिया, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (साइकेट्री), राजकीय मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर

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