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नागौर. निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा कथित तौर आरटीई के तहत किए गए प्रवेश में गलत आधार कार्ड अंकन करने के मामले में शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पुनर्भरण राशि के भुगतान से पहले न केवल निजी शिक्षण संस्थानोंका भौतिक सत्यापन किया जाएगा, बल्कि प्रकरण की संख्या में बच्चे नहीं मिले तो पूरा प्रवेश ही फर्जी घोषित कर दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों कहना है कि जिले में इस तरह के सौ प्रकरण हैं।
शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि विभागीय जांच में निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा आरटीई के तहत नि:शुल्क प्रवेश के लिए बच्चों के आधार कार्ड नम्बर अंकित करने के कथित रूप से कुल सौ प्रकरण फर्जी सामने आए थे। संस्थानों ने आधार कार्ड संख्या के कॉलम में केवल जीरो-जीरो का अंकन किया था। एक-साथ इतनी अधिक संख्या में प्रकरण सामने आने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा दी जाने वाली सूचनाओं पर न केवल सवालिया निशान लग गया है, बल्कि इनकी पुनर्भरण राशि फंसने के साथ ही प्रवेश ही फर्जी होने का संकट उत्पन्न हो गया है। विभागीय जानकारों का कहना है कि ऐसे संस्थानों को बच्चों की संख्या के हिसाब से पुनर्भरण राशि फिलहाल नहीं दी जाएगी। राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया से पहले विभाग की ओर से गठित टीम शिक्षण संस्थानों में जांच करेगी। यह जांच भी उसी स्थिति में की जाएगी, जब आधार कार्ड संख्या का अंकन पोर्टल पर वास्तविक संख्या का सही तौर पर अंकन किया जाएगा। अन्यथा बिना जांच के ही पूरे प्रवेश को विभाग द्वारा फर्जी घोषित कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका की ओर से ‘डेढ़ हजार बच्चों के आधार फर्जी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाया था।
इनका कहना है...
आधार कार्ड संख्या का पोर्टल पर सही अंकन करने के बाद ही विभाग की ओर से पुनर्भरण राशि देने के पहले जांच की जाएगी। अन्यथा ऐसे आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
बेनीगोपाल व्यास, जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक द्वितीय), नागौर
Published on:
16 Jan 2018 06:41 pm
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