नागौर जिले में इस साल 1 हजार से जयादा सोलर पम्प लगाए जाएंगे
सोलर पम्प योजना पर उद्यानिकी अधिकारी सीताराम रियाड़ से बातचीत
सोलर पंप योजना किसानों की संवार रही तकदीर
सोलर पंप योजना से किसानों की तकदीर बदल रही है। इसकी वजह से किसानों की डीजल एवं बिजली पर निर्भरता जहां कम हुई है, वहीं इसके उपयोग से वह खेतों की सही समय पर सिंचाई कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही इससे पर्यावरण को भी हानि नहीं पहुंचती है। इस संबंध में उद्यानिकी विभाग के कृषि अधिकारी एवं पीएम कुसुम योजना प्रभारी सीताराम रियाड़ से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि इस साल भी जिले में एक हजार से ज्यादा सोलर पम्प लगवाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। काश्तकारों की भी इसको लेकर दिलचस्पी बढ़ी है।
प्रश्न: बिजली की अघोषित कटौती एवं डीजल की मंहगाई से परेशान किसानों के लिए खेतों के सिंचाई की कोई येाजना है क्या…?
उत्तर: सोलर पंप योजना है। यह परियोजना प्रधानमंत्री किसान सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) के तहत इसका कियान्वयन किया जा रहा है।
प्रश्न: नागौर जिले में इस वर्ष कितने सोलर पंप लगाए जाने की योजना है…?
नागौर. जिले में इस वर्ष 1200 सोलर पंप लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रश्र: योजना में कौन से किसान इसके लिए पात्र होंगे…?
उत्तर: कृषि एवं उद्यानिकी के फसलों की सिंचाई ड्रिप या मिनी स्प्रिकंलर से काम लेना होगा। इसके साथ ही बिजली कनेक्शन नहीं होना चाहिए। डीजल चलित संयत्र से सिंचाई का शपथ पत्र प्रस्तुत करना होता है। उसके भूस्वामित्व में सिंचाई के लिए जल संग्रहण ढांचा होना चाहिए। इसका भी शपथ पत्र देना होगा। इसमें लघु व सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रश्न: योजना से लाभान्वित होने के साथ किसानों के पास कितनी जमीन होनी चाहिए…?
उत्तर: इसके लिए किसानों के पास 0.4 हेक्टेयर का भूखण्ड भूस्वामित्व होना चाहिए। इसके अलावा अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के किसानों के पास इसके लिए न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर का भूस्वामित्व होना चाहिए।
प्रश्न: काश्तकारों को कितनी क्षमता का सोलर पंप उपलब्ध कराया जाता है…?
उत्तर: काश्तकारों को तीन से 7.5 एचपी पंप क्षमता तक का उपलब्ध कराया जाता है।
प्रश्न: किसानों को इस येाजना में लागत पूरी खुद ही वहन करनी होगी या फिर अनुदान भी देय है…?
उत्तर: किसानों को लागत का केवल 40 प्रतिशत का खर्च वहन करना होगा,और 60 प्रतिशत का अनुदान सरकारी स्तर पर देय रहेगा।