23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

80 वर्षीय तेजराम पिछले 20 वर्षों से कर रहे कुछ ऐसा जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

बीस साल से स्टेशन पर जलसेवा कर तेजराम बढ़ा रहे पुण्य का तेज, कांकरिया स्कूल के उप प्राचार्य पद से हुए थे सेवानिवृत्त, तभी से जुटे हैं जल सेवा में

2 min read
Google source verification
Nagur news

nagaur hindi news

नागौर. सेवा कर पुण्य कमाने के कई तरीके होते हैं, लेकिन जलसेवा को अलग ही दर्जा प्राप्त है। पिछले बीस साल से रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जलसेवा कर रहे सेवानिवृत उप प्राचार्य तेजराम लखारा से शहर का प्रत्येक नागरिक वाकिफ है। करीब अस्सी साल की उम्र में आज भी इनकी सेवा का जज्बा देख लोग गलातर करने के बाद दिल से दुआएं देते हैं। लखारा जल सेवा के दौरान यह नहीं देखते कि सामने वाला इंसान बच्चा है या बुजुर्ग। वे हर किसी के पास जाकर पानी पिलाते हैं। आमतौर पर सेवा का ऐसा जज्बा बहुत कम देखने को मिलता है। वे मानव सेवा समिति के सदस्य भी है। लखारा अप्रेल से जुलाई तक रोजाना 12 बजे रेलवे स्टेशन पर आते हैं और तीन घंटें जलसेवा करते हैं।

सेवा करना ही धर्म
लखारा का कहना है कि सेवा ही सबसे बड़ा कार्य है। यह जिंदगी दो दिन की है, इसमें जितनी सेवा कर सको उतनी कर लो। इससे पुण्य मिलता है। पुण्य की नींव हमेशा हरी रहती
है।
पांच संतान
लखारा ने बताया कि उनके पांच पुत्र है। जिनमें एक जोधपुर, दो नागौर, एक मेड़ता व एक उदयपुर में नौकरी कर रहे हैं।

पेंशन सामाजिक कार्यों पर खर्च
लखारा अप्रेल 1994 में सेठ किशनलाल कांकरिया स्कूल के उप प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए थे। उसके बाद इन्होंने सेवा का संकल्प लिया और तब से आज तक लोगों की सेवा में जुटे हैं। पेंशन की पूरी राशि वे समाज के सेवा कार्यों में खर्च करते है। मजहब, जाति, धर्म से ऊंचा उठकर सिर्फ इंसान की हर संभव मदद करना इनका नजरिया है।

सुकून की बारिश
पानी पिलाने का काम कितना सहज लगता है। आखिर क्यों ऐसे शिक्षाविद को स्टेशन पर पानी पिलाना ही अच्छा लगा? ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनके जवाब हर वो शख्य ढूंढने लगता है जो तेजराम को ऐसा करते देख रहा है। यहां यह भी बता दें कि नागौर स्टेशन पर पानी पिलाने वाले और भी कई संगठन अपना हुनर दिखाते हैं। इस बाबत जब तेजराम से पूछा गया तो उनका जवाब था कि दिल को सुकून मिलता है। प्यासे को तृप्त होने की खुशी देखना उनका शगल बन गया है। उन्हें अच्छा लगता है कि वे पानी के लिए बच्चा हो या बड़ा, उसके पास जाकर मनुहार करें। अपने हाथों से पानी पिलाकर सुकून प्राप्त करें।