
कुचामनसिटी.चिकित्सा विज्ञान की अत्याधुनिक तकनीकी व चिकित्सक के सामंजस्य से चार दिन के बच्चे को जिंदगी मिल गई। पीलिया संक्रमित ब्लड के साथ हर पल खतरे के साए में रह रहे चार दिन के बच्चे को भी जहां जन्मते मिली इस बीमारी से मुक्ति मिल गई, वहीं राजकीय हॉस्पिटल में पहली बार पीलिया संक्रमित ब्लड बदलने का कारनामा किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ एवं उनकी टीम ने तकरीबन डेढ़ घंटे की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। प्रक्रिया के सफल होने पर चिकित्सक की ओर से आल इज ओके सुनने के बाद बच्चे के परिजन ने राहत की सांस ली। इसके साथ ही राजकीय हॉस्पिटल के नाम पहली बार यह उपलब्धी भी जुड़ गई।
शहर के निकटवर्ती चितावा क्षेत्र की रहने वाली मंजू को चार दिन पूर्व ही बच्चे का प्रसव हुआ। जन्म के बाद ही बच्चे को पीलिया हो गया। पहले इसे औपचारिक तौर पर दवा दी गई, लेकिन राहत नहीं मिली। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशाक देवड़ा ने इसकी राजकीय हॉस्पिटल में ही जांच कराई तो पता चला कि बच्चे के ब्लड में ही पीलिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार पीलिया संक्रमित ब्लड के साथ बच्चे का संघर्ष करना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. ईशाक देवड़ा ने बच्चे का पीलिया संक्रमित ब्लड बदलने का निर्णय लिया। अभिभावकों को बताया कि यह जल्द ही करना पड़ेगा, नहीं तो फिर स्थिति विकट हो जाएगी। अभिभावकों की मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को इसका पीलिया संक्रमित ब्लड बदलने का निर्णय लिया गया। इसकी तैयारियां करने के बाद एनबीएसयू में तकरीबन डेढ़ घंटे तक डॉ. देवड़ा के साथ चिकित्साकर्मियों की टीम इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए जुटी रही। डॉ. देवड़ा के साथ कंपाउण्डर राजूराम चौधरी व मोनिका पारीक की टीम रही। प्रक्रिया सफल रहने पर डॉ. देवड़ा एवं उनकी टीम ने राहत की सांस ली। बाहर निकलने पर डॉ. देवड़ा ने जब बताया कि आल इज ओके रहा, प्रक्रिया सफल रही तो बच्चे के परिजन को जिंदगी मिलने का एहसास हुआ।
राजकीय हॉस्पिटल में पता चला कि मंजू के चार लड़कियां पहले से ही हैं। अब चार लड़कियों के बाद लड़का पैदा होने पर परिजन में जहां प्रसन्नता का एहसास था, वहीं बीमारी का नाम सुनते ही वह मायूस हो गए। वह जब डॉ. देवड़ा के पास पहुंचे, उन्हें बताया गया कि इसका ेबेहद सफलतापूर्वक इलाज हो सकता है तो भी उनकी चिंता गई नहीं। प्रक्रिया के सफल होने तक वह प्रार्थना करने में ही लगे रहे।
यह होती है पूरी प्रक्रिया
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशाक देवड़ा ने बताया कि पीलिया संक्रमित ब्लड एक गंभीर स्थिति होती है। इसमें पीडि़त का ब्लड निकालने के बाद उसमें दूसरा ब्लड डाला जाता है। इसमें बीमारी के साथ मुश्किल यह थी कि मां का ब्लड ्रग्रुप निगेटिव था, और बच्चे का पॉजिटिव। अब ऐसे में इसके लिए दूसरे वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। इसमें थोड़ी सी मुश्किल जरूर आई, लेकिन बरहाल पूरी मेहनत सफल रही।
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