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कान कथा श्रवण व जीभ परमात्मा स्मरण को

भादवासी में एक शाम मूर्तिराम महाराज के नाम भजन संध्या, आश्रम में मनाया मूर्तिराम महाराज का 18 वां निर्वाण महोत्सव

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कान कथा श्रवण व जीभ परमात्मा स्मरण को

नागौर/कुचेरा. भादवासी धाम स्थित करूणामूर्ति आश्रम में मूर्तिराम महाराज का 18 वां निर्वाण महोत्सव बुधवार को एक शाम मूर्तिराम महाराज के नाम भक्ति संध्या व गुरुवार सुबह समाधि पूजन, महाआरती एवं महाप्रसादी के साथ सम्पन्न हुआ। भक्ति संध्या के दौरान आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता त्यागी संत हेतमराम महाराज ने कहा कि परमात्मा ने हमें ज्ञानेन्द्रियां दी है, उनका प्रयोग जीवन के उद्धार के लिए करना चाहिए। संत ने कहा कि कानों का उपयोग कथा व ज्ञानमृत सुनने में, जीभ का उपयोग परमात्मा स्मरण व सत्य बोलने में, नयनों का उपयोग परमात्मा दर्शन व अच्छाईयां देखने में, हाथों का उपयोग माता- पिता व गुरूजनों, गाय सहित बड़ों की सेवा व दान करने में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तन राम में मन काम में लगाते हुए परमात्मा का स्मरण कर जीवन सफल बनाना चाहिए। इस मौके पर पौ धाम महंत रामनिवासदास ने गुरु महिमा बताते हुए कहा कि गुरु वह है जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर तथा पापकर्म से पुण्यकर्म की ओर ले जाता है। महंत ने कहा कि गुरु व महापुरुष हमें जीवन उद्धार करने तथा स्वयं, परिवार व समाज को आगे बढ़ाने की युक्तियां बताते हैं। हमें महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलते हुए जीवन सफल बनाना चाहिए। इस अवसर पर हरिद्धार के संत डॉ. केशवानन्द महाराज, रेवाशापीठ के जगद्गुरु राघवाचार्य , कोलिया महंत खेमदास महाराज, केशवदास महाराज की बगीची नागौर के महंत जानकीदास महाराज, कपिलदास महाराज, मेड़ता के ध्यानीराम महाराज व संत रमणराम ने अपने प्रवचनों से धर्म का प्रचार-प्रसार किया। आश्रम के बालसंत बलवीरदास ने चेतावनी भजन मनवा चेत सके तो चेत के माध्यम से लोगों को चेताया।
आश्रम के संत तुकाराम महाराज, संत भागीरथदास, संत सुखदेव महाराज कुचेरा, संत चेतनदास धनेरी, मानदास, मण्डित मुकेश दाधिच, पण्डित विजय वशिष्ठ, वेणुगोपाल सहित संतों व महापुरूषों ने वाणी, और भजनों की प्रस्तुतियां दी। त्यागी संत नेमिराम महाराज ने गुरुवाणी का पाठ किया। गुरुवार सुबह गुरुवाणी की पुर्णाहुति के बाद समाधिपूजन, महाआरती व महाप्रसादी का आयोजन हुआ।

भजनों व संतों की वाणी का लिया आनन्द
डेह. कस्बे के रामद्वारा में आयोजित भजन संध्या में कई संतों ने शिरकत की। इनमें नरेना पीठाधीश्वर गोपाल दास महाराज दादूपंथी एवं रेन खेड़ापा रामधाम के उत्तराधिकारी तथा टांकला चाडी पौ धाम भोजास के मुख्य संत शामिल थे। संत आनंदीरामाचार्य ने बताया कि रामद्वारा के संस्थापक मदराम महाराज की 165 वीं पुण्यतिथि धूमधाम से मनाई गई। नरेना पीठाधीश्वर ने प्रवचन दिए। संत पांचाराम संत श्रीराम ने भजनों की प्रस्तुतियां दी। बुद्ध सागर चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने भजन संध्या में मंदिर निर्माण के लिए भामाशाह का सम्मान किया। शाम को भण्डारे का हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं और संतों ने प्रसादी ग्रहण की।