
The forest itself has been transformed in Rajasthan's Nagaur district
नागौर जिले में अब तक दो लाख से ज्यादा लगा दिया गया करौंदा...!
कहां, कितने हेक्टेयर में लगेगा करौंदा: फैक्ट फाइल
जंगली रेंज हेक्टेयर
नागौर 175
जायल 195
मेड़ता 285
कुचामनसिटी 1530
परबतसर 435
अब तक इतने करौंदा लग चुके हैं
जंगल एरिया लगे करौंदा बीजों की संख्या
नागौर 169 20589
जायल 175 33278
कुचामनसिटी 1492 165898
परबतसर 435 56987
अब तक वन विभाग की ओर से 2271 हेक्टेयर एरिया में दो लाख 76 हजार 752 बीजों का रोपण किया जा चुका है। जबकि अभी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार और बीजों को लगाए जाने का काम वन कर्मियों की ओर से किया जा रहा है। इसमें अभी मेड़ता रेंज के 285 हेक्टेयर एरिया में बीजों का रोपण करने का काम शुरू नहीं हो पाया है। यहां पर भी जल्द ही करौंदा के बीजों का रोपण किया जाना है।
पर्यावर्णीय परिदृष्य को बदल देगा करौंदा
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार करौंदा का पौधा मिट्टी को रोकने के साथ ही पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद कारगर काम करता है। यह हवा, पानी एवं मिट्टी के साथ ही मानसून की दृष्टि से भी बेहतर उपयोगी पेड़ माना जाता है। खेजड़ी, पीपल एवं बरगद के साथ करौंदा का पेड़ विकसित होने पर जंगल का पूरा रंग ही बदल जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से अन्य फलदार पौधों को भी लगाए जाने की योजना है। फिलहाल अभी करौंदा लगाया जा रहा है। इसका परिणाम बेहतर मिलेगा तो फिर अन्य फलदार पौधे भी लगाए जाएंगे।
पर्यावरणविद की नजर में करौंदा
पर्यावरण के क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हिम्मताराम भांभू भी मानते हैं कि नागौर में रेतीली आंधी चलती है। यह लगभग एक डेजर्ट एरिया की तरह है। यहां पर यदि खेजड़ी, पीपल व बरगद के साथ ही करौंदा का पेड़ विकसित होता है तो निश्चित रूप से नागौर के जंगलों का न केवल रंग बदल जाएगा, बल्कि यह फल स्वास्थ्य के साथ ही अन्य दृष्टियों से भी बेहद महत्वूपूर्ण सिद्ध होगा। वन विभाग की ओर से किया जा रहा नवाचार एक बेहतर प्रयास है। अब यह इस प्रयास में करौंदा का फल नागौर के जंगलों में नजर आने पर निश्चित रूप से पर्यावरणीय दृष्टि से काफी अच्छा होगा।
एक्सपर्ट की राय
कृषि महाविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रो डॉ. विकास पावडिय़ा कहते हैं कि वन विभाग की ओर से किया जा रहा नवाचार वास्तव में मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब तक जंगलों में तो केवल खेजड़ी ही नजर आते थे। अब करौंदा भी नजर आएगा तो यह वास्तव में जिले के लिए काफी बेहतर सिद्ध हो सकता है। जंगल में फलदार पेड़ होंगे तो निश्चित रूप से पर्यावरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। फलदार होने के साथ ही इसके संरक्षण के लिए लोग खुद भी प्रयास करेंगे, क्यों कि यह फल देने वाला पेड़ है। प्रयास तो बेहतर है, अब यह नागौर की मिट्टी एवं मौसम के अनुकूल होकर यह विकसित होगा तो प्रत्येक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होने के साथ ही बहुउपयोगी भी होगा। इस पौधे के विकसित होने से मृदा संरक्षण, जैव विविधता तथा फलों की प्राप्ति से महत्वता और अधिक हो जाती है। इसके साथ ही यह पक्षियों के आवासीय उपयोग की दृष्टि से न केवल बेहतर हो सकता है, बल्कि पक्षियों के बसेरा होने से पर्यावरणीय दृष्टि से अच्छा होगा।
Published on:
18 Jul 2023 10:16 pm
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