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शराब के ठेकेदारों पर सरकार मेहरबान, आमजन का कौन रखेगा ध्यान

सरकार के लाखों रुपए दबाने वाले शराब के ठेकेदारों को फिर राहत दी गई है। राहत ऐसी कि मूल के तीन-चौथाई के साथ ब्याज तक पूरा माफ।

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शराब के बकायादारों का तीन-चौथाई मूलधन के साथ ब्याज तक माफ

एमनेस्टी योजना के नाम पर करीब 115 ठेकेदारों को किया उपकृत

नागौर. सरकार के लाखों रुपए दबाने वाले शराब के ठेकेदारों को फिर राहत दी गई है। राहत ऐसी कि मूल के तीन-चौथाई के साथ ब्याज तक पूरा माफ। वैसे सरकार ने इसे आबकारी एमनेस्टी योजना का नाम दिया है। अकेले नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले में अकेले शराब के ठेकेदारों पर करीब साठ करोड़ से अधिक का बकाया चल रहा है।

वैसे तो किसी लोन की इक्का-दुक्का किस्त बकाया रखने के जुर्माने के साथ प्रताडऩा से अधिकांश लोग वाकिफ हैं। बैंक से लोन हो तो कुछ महीनों तक इसमें रियायत बरती जा सकती है पर जुर्माने और ना ही बकाया में कोई रियायत दी जाती है। प्राइवेट फाइनेंस कम्पनी या फिर साहूकार के नाम पर दबंगों की वसूली/रिकवरी का तरीका इससे अधिक सख्त है। कहीं भी गाड़ी अथवा कोई सामान उठा ले जाएंगे, उसके बाद मार-पिटाई करेंगे वो ब्याज में। ऐसे में सरकार की रकम मय ब्याज कोई बरसों तक दबाए रखे और सरकार उसे बार-बार हर तरह की रियायत/छूट दे तो इस नाइंसाफी को क्या कहा जाए?सरकारी बैंक/एजेंसी किसी गाड़ी ही नहीं होम लोन तक में कुछ किस्तें बकाया होने पर नोटिस दे देती है। फिर मूल बकाया के साथ ब्याज पर ब्याज चुकाने की तारीख मुकर्रर कर नीलामी तक की चेतावनी ही नहीं देती, तैयारी तक शुरू कर देती है। इधर, हाल यह है कि किसी पर बीस लाख का बकाया तो किसी पर चालीस लाख का। यह बकाया एक-दो साल का नहीं किसी का छह साल का किसी का पांच साल का तो किसी का बारह साल का। बावजूद इसके उनसे वसूली के लिए उनकी सम्पत्ति नीलाम हो, उन पर कोई कानूनी कार्रवाई हो पर होता यह है कि उन्हें एमनेस्टी योजना के नाम पर उपकृत किया जाता है।

115 ठेकेदारों पर करीब साठ करोड़ बकाया

सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2011 से 2018 तक के कुल पांच मामलों में ठेकेदारों पर करीब 25 करोड़ 25 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं। इसमें सर्वाधिक बकाया अयोध्या निवासी राजेश पर है। वर्ष 2018 से 2022 तक के 81 मामलों में ठेकेदारों पर 28 करोड़ 35 लाख का बकाया है। वहीं पिछले वर्ष 2022 और 2023-24 के 29 प्रकरण में छह करोड़ 31 लाख रुपए आबकारी विभाग को इन ठेकेदारों से वसूलने हैं। अब वसूली तो हो नहीं पाती। ठेकेदारों से वसूली के नाम पर उनकी सम्पत्ति नीलाम करने की तमाम कवायद सिरे नहीं चढ़ पाई। कई ठेकेदारों के नाम सम्पत्ति ही नहीं मिली तो कुछ आबकारी विभाग की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए। इस तरह वसूली के नाम पर आबकारी विभाग के हाथ कुछ नहीं लगा।

इतनी छूट...मेहरबानी का राज क्या है

सूत्र बताते हैं कि हाल ही में यह योजना ठेकेदारों के लिए आबकारी विभाग ने जारी की है। इसके तहत 31 मार्च 2018 तक के सभी बकाया मामलों में केवल एक चौथाई राशि जमा करानी होगी। बकायादार से किसी तरह का ब्याज नहीं लिया जाएगा। यानी मूल बकाया राशि का तीन-चौथाई मय ब्याज माफ। इसके अलावा एक अप्रेल 2018 से 31 मार्च 2022 तक मूल बकाया में पचास फीसदी की छूट दी गई है। यानी सिर्फ बिना ब्याज के आधा ही जमा कराना है। एक अप्रेल 2022 से 31 मार्च 2024 तक बकाया राशि पर ब्याज पूरा माफ किया गया है।

वसूली का काम मुश्किल

सूत्रों का कहना है कि वसूली का काम आबकारी विभाग के लिए मुश्किल सा हो गया है। अयोध्या के ठेकेदार राजेश निगम ने करीब चौदह साल पहले ठेके लिए फिर बकाया कर फरार हो गया। उसके बाद से उस पर बकाया चढ़ता गया, यूं तो यह सौ करोड़ से भी अधिक है पर बार-बार मिलती छूट के चलते यह अब करीब 25 करोड़ बाकी है पर अभी तक एक पाई तक इससे वसूल नहीं हो पाई है। उसके बाद पिछले दो साल से आबकारी विभाग ने बकायादारों की सम्पत्ति जुटाकर उनकी कुर्की तक करवाने की तैयारी कर ली पर कभी राजनीतिक दबाव तो कभी अदालत में बकायादारों की शरण लेने से मामला जहां का तहां रह गया।

आम जनता के साथ अन्याय

नियम-कायदे सबके लिए बराबर होने चाहिएं, किसी को मामूली कर्ज की किस्त नहीं चुकाने पर जुर्माने के साथ प्रताडऩा झेलनी पड़ती है तो कुछ पर सरकार कृपा बरसाती है। शराब के ठेकेदारों पर इस तरह की रियायत आम जनता के साथ अन्याय है। शराब सामाजिक बुराई है, इसको रोकने के कदम उठाने के बजाय सरकार इसको बढ़ाने पर तुली है।

-लुम्बाराम जाट, निवासी राजपूत कॉलोनी, नागौर।

आखिर सख्ती कमजोर पर ही क्यों

यह अनोखी परम्परा है, बड़ा कर्जा बरसों तक दबाएं, सरकार को आंख दिखाएं। बावजूद इसके सरकार उनको ही छूट पर छूट क्यों देती है। आम व्यापारी तो मामूली जीएसटी नहीं दे तो ही उस पर कड़ा जुर्माना लग जाता है। यही है तो जीएसटी सभी दुकानदार देते हैं तो फिर शराब बेचने की आजादी सबको मिले। खास पर मेहरबानी बताती है कि दाल में काला है।

-धर्माराम भाटी, अध्यक्ष किराना मर्चेंट एसोसिएशन, नागौर।

सामाजिक बुराई को पनपाना गलत

शराब स्वास्थ्य के लिए तो हानिकारक है ही, इस सामाजिक बुराई को पनपाने वाले ठेकेदारों को भी सरकार का संरक्षण गलत है। कोई किसी भी तरह का बिल अथवा फीस तक जमा नहीं कराने पर जुर्माना लग जाता है। उस पर तो कभी कोई छूट/रियायत नहीं मिलती। किसी भी गलत काम/व्यवसाय को बढ़ाने में सरकार सहयोग करती दिखती है, जबकि उसे इसे बंद करने का काम करना चाहिए।

-राशिका मीना, स्टूडेंट, व्यास कॉलोनी, नागौर

संरक्षण गलत है

सबके लिए एक कानून बना है। जब हम जैसे साधारण लोगों का कोई ब्याज/कर्जा कभी माफ नहीं होता है तो शराब को बेचने वालों को सरकार इतनी रियायत क्यों देती है? सरकार को इस बात पर मंथन करना चाहिए कि भले ही सर्वाधिक राजस्व इससे मिलता हो पर इसका यह मतलब तो नहीं कि सरकार खुद इस सामाजिक बुराई को बढ़ाने में लग जाए। इस तरह का लाभ देने से जनता में गलत संदेश भी जाता है।

-हजारीराम जांगू, पूर्व पार्षद संजय कॉलोनी, नागौर

इनका कहना है

सभी बकायादारों को सरकार की एमनेस्टी योजना का लाभ दिया जा रहा है। यह योजना 31 दिसम्बर तक लागू रहेगी। अब इसमें भी लापरवाही बरतने वालों पर कुर्की/नीलामी के जरिए वसूली की जाएगी।

-मनोज बिस्सा, जिला आबकारी अधिकारी नागौर