
जिले के स्कूलों में वर्ष 2017-18 में विद्यार्थियों की संख्या तीन लाख पचास हजार 305 रही, जबकि वर्ष 2022-23 में यानी छह साल में 18 हजार 420 विद्यार्थियों की बढ़ोत्तरी हुई। हर साल प्रवेशोत्सव में लगने वाले बीस हजार से अधिक शिक्षकों की मेहनत के परिणाम से शिक्षा विभाग के आला अफसर तो क्या मंत्री तक संतुष्ट नहीं है।
नागौर. सरकारी स्कूलों के प्रवेशोत्सव में इस बार वीरानी का आलम है। नामांकन बढ़ाने की तमाम सरकारी कवायद फेल साबित हो रही है। बारहवीं पास करने के बाद सरकारी स्कूल छोडऩे वाले बच्चों के मुकाबले अभी एक तिहाई तक बच्चे नहीं जुड़ पाए हैं। प्रवेशोत्सव की अंतिम तिथि तीस जुलाई कर दी गई है। पिछले साल के मुकाबले इस बार करीब 35 हजार यानी करीब दस फीसदी नामांकन/बच्चे कम होने के आसार दिखाई देने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार बारहवीं कक्षा पास करने के बाद करीब 47 हजार बच्चे इन स्कूलों से टीसी कटा चुके हैं जबकि शुद्ध रूप से इस नए सत्र में अभी पंद्रह हजार बच्चे तक भी नहीं जुड़े। सरकारी आंकड़े भले ही नए नामांकन 21 हजार 919 बता रहे हों पर इनमें चालीस फीसदी से अधिक तो वे हैं जिन्होंने प्राथमिक/उच्च प्राथमिक अथवा माध्यमिक स्कूल से पांचवी, आठवीं या दसवीं पास कर दूसरे सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। पहली कक्षा में सर्वाधिक 11 हजार 447 तो दूसरी में 1472 बच्चों ने प्रवेश लिया है। पूरे जिले के तीन हजार 29 स्कूलों में चले प्रवेशोत्सव का यह हाल है। करीब एक महीने का यह हाल बता रहा है कि असल में पंद्रह हजार के आसपास ही नामांकन पहुंचा है। शेष छह हजार आगे की कक्षा में अन्य सरकारी स्कूल में प्रवेश लेने वाले हैं।
सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2022-23 बच्चों की संख्या तीन लाख 68 हजार 725 थी। इनमें से करीब 47 हजार ने बारहवीं पास कर टीसी कटा ली है। करीब 21 हजार जुड़े यानी अभी भी करीब 26 हजार तो इस हिसाब से ही पीछे हैं। अभी अन्य स्कूलों से टीसी कटाकर प्राइवेट स्कूलों में जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या का हिसाब लगाना बाकी है। ऐसा माना जा रहा है कि पिछले सत्र के मुकाबले इस बार करीब 30 से 35 हजार बच्चे/नामांकन कम रहने वाला है। शायद इसी स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रवेशोत्सव की तिथि आगे बढ़ाकर तीस जुलाई कर दी है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की तमाम कोशिश सिरे नहीं चढ़ पा रही है। कोरोना काल में निजी स्कूलों की फीस वसूली के चलते जरूर एक बारगी बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ था, लेकिन हालात सामान्य होते ही उन्होंने वहां वापसी कर ली।
एक नजर उतार-चढ़ाव पर
नागौर जिले के स्कूलों में वर्ष 2017-18 में विद्यार्थियों की संख्या तीन लाख पचास हजार 305 रही, जबकि वर्ष 2022-23 में यानी छह साल में 18 हजार 420 विद्यार्थियों की बढ़ोत्तरी हुई। हर साल प्रवेशोत्सव में लगने वाले बीस हजार से अधिक शिक्षकों की मेहनत के परिणाम से शिक्षा विभाग के आला अफसर तो क्या मंत्री तक संतुष्ट नहीं है। वर्ष 2022-23 में हर ब्लॉक के सीबीइओ को दस-दस फीसदी की वृद्धि का लक्ष्य भी दिया गया था। लक्ष्य तो पूरा हुआ नहीं बल्कि जो विद्यार्थी पढ़ रहे थे, उनमें से ही काफी संख्या में टीसी कटाकर निजी स्कूल में भर्ती हो गए। नोटिस पर नोटिस दिए गए पर इसका कोई लाभ स्कूलों को तो नहीं मिला। ऐसे में सत्र 2022-23 में रहे करीब तीन लाख 68 हजार से घटकर संख्या तीन लाख तीस हजार के आसपास रहने का अनुमान बताया जा रहा है।
इस प्रवेशोत्सव का सरकारी आंकड़ाइस बार पहली में 11 हजार 447, दूसरी में 1472, तीसरी में 966, चौथी में 803 तो पांचवीं कक्षा में 824 नामांकन हो पाए हैं। शिक्षा विभाग की गाइड लाइन के अनुसार भी इन्हीं को नए नामांकन की श्रेणी में माना जा रहा है। शेष छठी से बारहवीं तक के अधिकांश प्रवेश सरकारी स्कूल के ही क्रमोन्नत कक्षा के लिए हुए हैं।
तैयारी के बाद भी फ्लॉप शो
ऐप समेत अन्य प्रशिक्षण के चलते इस बार प्रवेशोत्सव धूमधाम से होने के आसार थे, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। इस बार ना तो सीबीइओ को कोई लक्ष्य दिया गया ना ही कोई लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी। ऐसे में करीब बीस हजार शिक्षकों की प्रवेशोत्सव में मेहनत रंग नहीं दिखा पाई। हमेशा की तरह इस बार भी नए नामांकन में बेटियां बेटों से अधिक हैं।
इनका कहना
अभी नामांकन के आंकड़े देखकर बताऊंगा, नामांकन बढ़ाने के लिए सभी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपेंगे। 25 जुलाई को इस संबंध में बैठक भी रखी गई है।
-मुंशी खान, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, नागौर
Published on:
23 Jul 2023 09:59 pm
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