
Nagaur. Devotees chanting 'Jai' at Jaimal Jain Nursery.
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में जयमल जैन श्रावक संघ की ओर से चल रहे कार्यक्रम के तहत चातुर्मास में चल रहे प्रवचन में जयगच्छीय जैन साध्वी बिंदुप्रभा ने कहा कि शिष्ट पुरुषों के आचार की प्रशंसा करनी चाहिए। व्याकरण की दृष्टि से शिष्ट का मतलब अनुशासित होता है। इसे हम दूसरे शब्दों में अनुशासन में चलने वाला कह सकते हंै। उद्धरण देते हुए समझाया कि पशुओं की तर्ज पर मूर्ख मनुष्यों पर भी डंडों का प्रयोग किया जाता है। शिक्षित ज्ञानी और नीतिनिष्ट को डंडे से नहीं चलाया जाता है। यही नही, भय का अस्त्र भी उन पर प्रभावहीन रहता है। यह केवल ज्ञान-विवेक नामक तत्व से ही चालित व अनुशासित होते हैं। ज्ञानियों , वृद्ध पुरुषों की एवं गुरुओं की सेवा में रहकर विनय पूर्वक शिक्षा, सदाचार एवं अनुभव का लाभ प्राप्त करने वाला अपना अनुशासन स्वयं करता है। स्वयं अपने कर्तव्य का निर्णय करता है। ज्ञान प्राप्त कर अनुभव का खजाना मिलने पर कर्तव्य भावना से उस पर आचरण करने वाला ही शिष्ट पुरुष है। साध्वी ने कहा कि केवल पोथी पढऩे वाला पंडित नहीं होता। विवेक के साथ कर्तव्य का निर्णय करने की बुद्धि की योग्यता से परिपूर्ण व्यक्तित्व का आचार ऊंचा होता है। ऐसे शिष्ट व्यक्ति से समाज भी पोषित व शोभित होता है। राष्ट्र का नैतिक बल ऊंचा उठता है।
जयमल जाप प्रतिदिन जारी
प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीपक सैनी, तीजादेवी पींचा, रेखा सुराणा एवं सुशीला नाहर ने दिए। दोपहर में महाचमत्कारिक जयमल जाप का अनुष्ठान किया गया। प्रकाशचंद, प्रदीप, विवेक बोहरा की ओर से प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेता को पुरस्कृत किया गया। प्रवचन तथा जय जाप की प्रभावना वितरित की गयीं। आगंतुकों के भोजन का लाभ महावीरचंद, पारस भूरट ने लिया। संचालन संजय पींचा ने किया। इस मौके पर लहराबाई ललवानी, गुणवंती जैन, मंजूदेवी ललवानी, के.रेखा सुराणा आदि श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहें।
Published on:
06 Aug 2021 09:39 pm
