
नागौर. लोहिया चौक स्थित घोड़ावतों की पोल के बाहर दुकान ।
नागौर. बदलते दौर में जहां ऑनलाइन शॉपिंग ने गली-मोहल्लों तक पैर पसार लिए है। वहीं रिटेल दुकानदारों के महत्व को भी कम कर दिया है। आज संकट की घड़ी में ये दुकानदार ही साथी बनकर साथ खड़े हैं। संकट के समय सहायता करने वाला ही सच्चा साथी होता है इस घड़ी गली में नुक्कड़ पर दुकान चलाने वाला पंसारी हमारी सहायता के लिए साथ खड़ा है।
व्हाट्स एप पर लिस्ट भेजते ही घर के दरवाजे तक पूरा राशन पहुंचा रहा है। यही लोग इस संकट में हमारे सारथी की भूमिका निभा रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन है तो भी इनसे ही खरीदारी कीजिए, वो ही मजा आएगा। आप मोबाइल से लिस्ट भेज कर सामान मंगवा लीजिए, घर तक पहुंचाने आएंगे। कहते भी हैं मित्र की पहचान संकट की घड़ी में ही होती है। विपदा के इस दौर में कहां हैं वे बड़ी-बड़ी ऑनलाइन मल्टीनेशनल और इ-कॉमर्स कंपनियां। अच्छे समय में बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुनाफा कमाती हैं और संकट में गायब हो जाती हैं। जैसे ही लॉकडाउन खत्म होगा ये कंपनियां फिर सक्रिय हो जाएंगी और छोटे दुकानदार और असंगठित कामगार फिर से भुला दिए जाएंगे। लेकिन प्रतिकूल हालातों में साथ देने वाला ही है हमारा रियल इंडिया। इसी रियल इंडिया को समर्पित है हमारी यह सीरीज-संकट के सारथी...।
घर-घर पहुंच रही मोबाइल दुकान
संकट के इस दौर में नागौर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार ने विशेष तौर से दुकान शुरू की है। शहर में किराणा सामान को लेकर भंडार की कोई दुकान नहीं थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों को उचित मूल्य पर चीजें उपलब्ध कराने के लिए दुकान शुरू कर दी। यह भी एक तरह से मोबाइल दुकान की तरह संचालित की जा रही है, ताकि लोगों को घर से बाहर न आना पड़े। गली-मोहल्लों में आपूर्ति के लिए तिपहिया वाहन व शहर के बाहरी इलाकों में माल आपूर्ति के लिए पिकअप वाहन में दुकान संचालित की जा रही है।
दुकानों पर उधार की खातेदारी
लॉकडाउन में जिन सेवाओं को जारी रखा गया है उनमें खाद्य सामग्री की दुकानें पहले पायदान पर है। दाल, चावल, आटा, मसाले, तेल जैसी राशन सामग्री गली के दुकानदार आसानी से उपलब्ध करा रहे है। खास बात तो यह कि कई परिवारों के इन दुकानों पर खातेदारी चलती है। ऐसे में दुकानदार उधारी में भी लोगों को सेवाएं और सामग्री दे रहे हैं। दुकान संचालकों ने बताया कि ग्राहक हित सर्वोपरि है। गली के ग्राहकों से ही हमारी आमदनी होती है। इस संकट के समय में उन्हें उचित मूल्य पर जरूरी सामान उपलब्ध कराना जिम्मेदारी है। तय समय पर रोजाना दुकान खोल रहे है और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए लोगों को सामान दे रहे है।
घर तक देने जाते हैं सामग्री
शहर में लोहिया चौक स्थित घोड़ावतों की पोल के बाहर दुकान चलाने वाले पंकज जैन ने बताया कि ग्राहक उनके व्हाट्स एप पर लिस्ट भेज देते हैं। यह सामान पैकेट बनाकर उनके घर तक पहुंचाया जा रहा है। हमारे पास इस तरह के लगभग पचास नियमित ग्राहक है। इन सभी को लॉक डाउन की स्थिति में घर तक सामान पहुंचा रहे हैं। कई लोग उधार में भी सामान लेते हैं। उनको खाते में लिख रहे हैं, जिसे वे बाद में चुकारा कर देंगे।
मुश्किलों के बाद भी सेवारत
दिल्ली दरवाजा के समीप दुकान संचालक अरविंद सैनी ने बताया कि मोबाइल पर लिस्ट आने पर घर तक सामान पहुंचा रहे हैं, लेकिन इसमें समस्या भी आ रही है। नियमित ग्राहकों के लिए हम हमेशा ही तत्पर रहते हंै, लेकिन सामान देने जाते समय अक्सर पुलिसकर्मी रोक देते हैं। सफाई देने के बाद भी दुव्र्यवहार करते हैं इसलिए ज्यादा दूर तक सामान पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। हम लोगों को पास जैसी सुविधा दी जाए तो सहूलियत हो सकती है।
संकरी गलियों में ऑटो से आपूर्ति
उपभोक्ता होलसेल भंडार के लेखापाल निर्मलकुमार ने बताया कि शहर में लोगों को सुविधा देने के लिए मोबाइल दुकान संचालित की जा रही है। पिकअप वाहन में जरूरत का सामान लेकर गली-मोहल्लों में फेरी लगाई जा रही है, ताकि लोगों को घर के बाहर ही सामान मिल सके। ऑनलाइन बुकिंग करवाने पर पार्सल बनाकर भेज रहे हैं। शहर के भीतरी भागों में संकरी गलियां होने से तिपहिया वाहन से आपूर्ति की जा रही है। पिकअप वाहन दिनभर में जहां लगभग ४५ किमी का सफर तय करता है वहीं तिपहिया वाहन २० किमी की दूरी नाप लेता है।
Published on:
13 Apr 2020 01:16 pm
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