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गली में घंटी बजती है तो समझ जाए कुल्फी नहीं सब्जी आई है

गर्मी में कुल्फी, आइसक्रीम व गन्ना रस बेचने वालों ने लगाए सब्जी के ठेले, गांव-शहर घूमकर पेट पालने वाले मजदूरों ने बदला जीवन यापन का तरीका

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गली में घंटी बजती है तो समझ जाए कुल्फी नहीं सब्जी आई है

नागौर. शहर में कुल्फी के ठेले में बिक रहे फल-सब्जी।

जीतेश रावल

नागौर. घर के बाहर गली में यदि घंटी बजती है तो समझ जाए यह कुल्फी या आइसक्रीम नहीं बल्कि सब्जी वाला है। जी हां, गर्मी की शुरुआत के साथ ही घर तक पहुंचने वाली कुल्फी इन दिनों लॉक डाउन में पिघल चुकी है। इस पर गांव-शहर घूमकर पेट पालने वाले मजदूरों ने भी अपने जीवनयापन का तरीका बदल लिया है।

ठेला चलाने वाले कोरोना संक्रमण के कारण घर बैठने से बढिय़ा अपना रोजगार करना श्रेयस्कर मानते हैं। यही कारण है कि गर्मी के दिनों में कुल्फी, आइसक्रीम व गन्ना रस का ठेला लगाने वाले कई लोग अब सब्जी बेच रहे हैं। आवश्यक सेवा में शुमार होने से सब्जी का ठेला लगाने में कोई दिक्कत भी नहीं आ रही। ठेला संचालक बताते हैं कि पहले जितनी कमाई तो नहीं हो रही, लेकिन घर बैठे खाने से अच्छा है मेहनत मजदूरी की जाए।

ठेले ज्यादा और ग्राहक कम

वैसे रोजगार के लिए ठेला लगाने वाले इन लोगों के लिए परेशानी अब भी कम नहीं है। उनका कहना हैं कि फल-सब्जी का ठेला लगाने पर भी ग्राहक नहीं मिल रहे। फल-सब्जी के ठेलों की संख्या बढ़ गई और ग्राहक वही के वही। ऐसे में इनकी ग्राहकी नहीं हो रही है। फिर भी दिनभर खाने लायक कमाई तो हो ही जाती है।

कमाई पर असर पड़ा है

एक ठेला संचालक ने बताया कि वह काफी पहले से ही सब्जी बेच रहा है, लेकिन इन दिनों कई लोग फल-सब्जी के धंधे में आ गए है। फल-सब्जी मंडी में माल लेने को आने वाले लोगों की संख्या इन दिनों अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। गांधी चौक में फल बेच रहे हनीफ ने बताया कि ठेले ज्यादा हो गए हैं इसलिए ग्राहकी कम हो रही है। लोगों के पास रोजगार नहीं होने से सस्ती दरों में फल बेचने पर भी ग्राहक नहीं आ रहे।

दोस्त के साथ साझेदारी कर दी

मंडी में होलसेलर के पास मजदूरी करने वाला महेंद्र भी इन दिनों अपने दोस्त अनिल के साथ साझेदारी में फल-सब्जी का ठेला लगाता है। उसने बताया कि अनिल पढ़ाई छोडऩे के बाद से ही सब्जी बेच रहा है। सीजनेबल फल तरबूज, खरबूजा आदि का ठेला करता है। मजदूरी छूट गई तो उसने भी अनिल के साथ ही ठेला शुरू कर दिया।