
मेड़ता सिटी. गीता प्रेस की रामनाम बैंक का कार्यालय व सामने रखी पुस्तकें।
मेड़ता सिटी. रामलला के अयोध्या में बने मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित होने का समय नजदीक आ रहा है। ऐसे में इस मौके पर हम आपके साथ कुछ ऐसी अनूठा श्रद्धा व भक्ति का कार्य साझा करना चाहते हैं, जो राम नाम लेखन को लेकर आपको कई तरह से प्रेरित करेगी। गीता प्रेस की ओर से मेड़ता में एक बैंक संचालित हैं... नहीं, वहां नकद जमा नहीं होता। इस अनोखे बैंक में जमा होती है राम-नाम लिखी अमूल्य पूंजी। वो पूंजी जो आप एक कॉपीनुमा डायरी में लाल स्याही से "राम-राम' लिखकर भरते हैं।
ऐसा ही एक बैंक मेड़ता शहर के पुराना पोस्ट ऑफिस के पास स्थित है। रामनाम के इस बैंक की देशभर में कई जगह शाखाएं है। लाखों खाताधारक है, लेकिन बैंक की शाखा खोलने का जिम्मा उन्हीं को दिया जाता है, जिसने विशेष पूंजी रामनाम बैंक में जमा करवाई हो। रामनाम बैंक का संचालन गीता प्रेस गोरखपुर की ओर से किया जाता है। जिसका उद्देश्य यह है कि बुजुर्ग, युवा, महिला-पुरुष फ्री समय में हाथ से लिखने का कार्य करते हुए भगवान राम का नाम मन में जपने के साथ ही भक्ति कर सकें।
इस तरह 28860 बार पुस्तक में लिखे जाते हैं राम नाम
रामनाम बैंक में पुस्तकें ले जाने वाले श्रद्धालुओं का हिसाब भी रखा जाता है। इसके लिए एक खाता खोला जाता है। खाता खोलने के लिए व्यक्ति का नाम, पता लिखकर 30 पेज की एक या एक से अधिक कॉपी मांग के अनुसार दी जाती है। जिसमें लाल पेन की स्याही से राम नाम लिखना अनिवार्य होता है। एक पेज पर 108 बार 9 के क्रम में राम नाम लिखना होता है। एक किताब में 28 हजार 860 बार राम नाम लिखे जाते हैं। राम नाम लिखने वाले को कई तरह की चीजों से परहेज रखते हुए सात्विक व व्यावहारिक बने हुए रहना होता है।
बुजुर्ग लिखते हैं अधिक राम नाम
दरअसल, राम नाम की इस बैंक का सबसे अधिक फायदा बुजुर्ग लोगों को मिलता है। जो भक्ति करने के लिए ऐसी पुस्तकों में राम नाम लिखते रहते हैं। जिससे उनकी भक्ति भी हो जाती है तो वहीं दिन का समय भी अच्छे कार्य में व्यतीत होता है। इसके अलावा युवा, बच्चे और कई-कई दुकानों पर व्यापारी भी फ्री टाइम में पुस्तक में राम-नाम लिखते हैं।
मेड़ता में हुआ किताबों का भारी स्टॉक, "लॉकर' में सुरक्षित
मेड़ता में बैंक के पास रामनाम की किताबें भरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी हजारों में हैं। पिछले कई सालों से इस बैंक में राम नाम लिखित पुस्तकों का स्टॉक किया जा रहा है। नतीजन अब इतनी पुस्तकें हो गई कि किताबों के अब बड़े-बड़े बंडल बन चुके हैं। जिन्हें संभालकर रखा हुआ है। गीता प्रेस मेड़ता कार्यालय के रामप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि ऑफिस में जगह नहीं होने के कारण बतौर लॉकर के रूप में बड़ी संख्या में रामनाम की डायरियां कट्टों में भरकर शांतिप्रकाश अग्रवाल के मकान में रखी गई है।
संदेड़िया कांकड़ वाले बालाजी के यहां बनना है राम नाम का स्तम्भ
जानकारी के मुताबिक, समीपस्थ थांवला कस्बे के पास संदेड़िया कांकड़ वाले बालाजी मंदिर के यहां राम नाम का स्तम्भ बनाया जाना है। जिसमें यह राम-नाम की पुस्तकों को रखने का विचार किया जा रहा है। ताकि पुस्तकों का भी सदुपयोग हो सके और स्तम्भ की पवित्रता और भी बढ़ जाए। इसके अलावा इन पुस्तकों को ऋषिकेश भी भिजवाया जा सकता है।
Updated on:
12 Jan 2024 04:43 pm
Published on:
12 Jan 2024 04:42 pm
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