वोट देने का जज्बा फस्र्ट टाइम वोटर को ही नहीं झुर्रियों वाले बुजुर्गो में भी दिखा स्वीप टीम मतदान केन्द्रों पर भी जागरूक करती रही वोटरों को, देर रात तक चाय पर चुनावी चौपाल
नागौर. सपने सच होने की उम्मीद से चेहरे दमक रहे थे। जिम्मेदारी का अहसास भी था तो इसे पूरा करने का जज्बा भी। फस्र्ट टाइम वोटर हो या फिर सफेद बालों के साथ चेहरों पर झुर्रियों वाले बुजुर्ग। समूह में चलती महिलाएं हों या फिर युवतियां अथवा अन्य पुरुष। हर तरफ वोट देने की ललक दिख रही थी। तेज धूप व गर्मी भी मतदान केन्द्र तक जाने का उत्साह कम नहीं कर रही थी। नागौर शहर के मतदान केन्द्रों पर पहले की तरह हो-हुल्लड़ नहीं था, भीड़ कहीं-कहीं थी हालांकि वोट देने वाले निरंतर अपनी उपस्थिति बनाए हुए थे। तैनात बीएसएफ के जवान हर आने वाले की पर्ची देखते फिर मोबाइल बाहर रखने की नसीहत थमा रहे थे। मतदान केन्द्र के बाहर आज की स्थिति विधानसभा चुनाव जैसी नहीं थी। कहीं-कहीं तो दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के कारिंदे नदारद दिखे। सड़कें सूनी थी तो अधिकांश बाजार भी बंद रहे। जगह-जगह लोग अलग-अलग समूह में बैठे दिखे। पंचर समेत अन्य छोटा-मोटा काम करने वाले लोग हमेशा की तरह आज भी व्यस्त रहे। चौपाल पर चाय के साथ चर्चा करते लोगों के हुजूम दिखे तो गांधी चौक पर एक पंचर बनाने वाले युवक ने तमाम उत्साह को यह कहकर ठण्डा कर दिया कि चुनाव से हम जैसों का क्या बंटेगा। नाम नहीं बताते हुए उसने कहा कि हमको तो रोज कमाकर खाना है, नाराजगी ऐसी थी कि उसने वोट देने तक से मना कर दिया। सुगनसिंह सर्किल पर बैठे सुरेश पोलक , ज्ञानेश मिश्रा, वकील राहुल हो या फिर देवेश। जोश से वोट देकर आए थे, यही कहते मिले कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान जरूरी है। बासनी पुलिया के पास चाय का ढाबा चलाने वाले पंडित हो या काम करने वाला सलाम, दुकानदार सुरेश बेनीवाल हो या फिर फस्र्ट टाइम वोटर विनीता। वोट किसको देकर आए, कौन जीत रहा है, क्या लग रहा है, फिर क्या होगा, जैसे सवाल चारों तरफ से शोर मचा रहे थे। परेशानियां कम होने का सपना पूरा होने की उम्मीद एक बार फिर हर वोटर के चेहरे पर दिखने लगी थी।
...मोबाइल ने किया बवाल
दोपहर करीब बारह बजे का समय था। अचानक अंदर से एक महिला कांस्टेबल एक फस्र्ट टाइम वोटर को पकड़कर बाहर लाती दिखी। मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर रहा था,यह कहकर उसने कहीं फोन किया। पुलिस आई भी और उसकी समझाइश भी की। इसके बाद कई मतदान केन्द्रों पर बाहर लगी टेबल या फिर साथ आए लोगों के हाथ अपने मोबाइल को लोग संभालते दिखे।
कांकरिया स्कूल में फैलाते दिखे जागरूकता
कांकरिया स्कूल में मतदान अपनी रफ्तार पर था। आदर्श मतदान केन्द्र में प्रतीक्षालय बना दिखा जहां मतदाता कुर्सी पर बैठ सकते थे। सेल्फी प्वाइंट पर लोग फोटो लेते दिखे। यहां स्वीप कॉॅर्डिनेटर मनीष पारीक अपनी टीम की इंद्रा विश्नोई, भूमिका चौबीसा, जितेंद्र व्यास, विनोद वर्मा आदि मतदाता जागरूकता का संदेश देते दिखे। साथ ही यहां दिख रहे सभी लोगों से अपने जानकारों को वोट देने के लिए फोन करने की अपील करते नजर आए।
बख्तासागर बूथ पर मधुमक्खियों का हमला
सोनी जी की बाड़ी निवासी पारसमल पत्नी संतोष के साथ बख्तासागर बूथ पर पहुंचे। यहां उन्हें वोट डालना था, इस दौरान मधुमक्खियों ने हमला कर दिया, इसकी सूचना पर प्रेमसुख कावा व एम्बुलेंस चालक वहां पहुंचे और कम्बल की मदद से उन पर मधुमक्खियों को हटाकर उन्हें जेएलएन अस्पताल पहुंचाया।
पुलिसकर्मी बदलते रहे पॉजिशन
पूरे दिन पुलिस अफसर के साथ कुछ कर्मी पॉजिशन बदलते दिखे। एसपी ऑफिस में जहां अपराध शाखा प्रभारी जेठाराम, एएसआई जयसिंह राठौड़ समेत अन्य अफसर मतदान बूथों की रिपोर्ट लेते रहे, साथ ही होमगार्ड अथवा पुलिसकर्मियों को जरुरत पडऩे पर अन्यत्र भेजते रहे। फोर्स प्रभारी अरशद हुसैन तैनात कर्मियों की पॉजिशन पूछते रहे।
दूल्हा-दुल्हन भी खूब दिखे
वोट देने में दूल्हा-दुल्हन भी खूब दिखे। कोई सुबह ही दुल्हन को विदा कर लाया और सीधे मतदान केन्द्र पहुंच गया तो किसी की शादी एक दिन बाद है पर वोट देने से कै से पीछे हटते। इन दूल्हा-दुल्हन के वोट देने के समय लोगों का रोमांच भी देखते ही बन रहा था।
फस्र्ट टाइम नहीं एवरी टाइम
नागौर शहर में मतदान केन्द्र पर फस्र्ट टाइम वोटरों की भी अच्छी-खासी तादात देखी गई। ललक के साथ झिझक भी थी तो रोमांच भी। वोट किसको देंगे, इस पर चुप्पी थी। फस्र्ट टाइम वोट देने पर प्रमाण पत्र भी बांटे गए। एक युवक राजेश ने तो कहा कि यह फस्र्ट टाइम नहीं एवरी टाइम देना है।