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VIDEO…आज सैतीस साल बाद शरद पूर्णिमा पर रहेगा खण्डग्रास चंद्रग्रहण का साया

Nagaur. शरद पूर्णिमा पर सौभाग्य योग, सिद्धि योग, बुधादित्य योग, गजकेसरी योग और शश योग का निर्माण

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-शनिवार को रात में लगेगा चंद्रग्रहण, सूतक नौ घंटे पहले लग जाएगा


नागौर. वर्ष के अंतिम चंद्रग्रहण का साया इस बार शरद पूर्णिमा पर रहेगा। 28 अक्टूबर केा शरद पूर्णिमा के साथ चंद्रग्रहण भी रहेगा। यह खण्डग्रास चंद्रग्रहण होगा। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि निर्णय सागर पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि में भारतीय समय अनुसार विरल छाया में प्रवेश रात्रि 11 बजकर 32 मिनट पर तथा ग्रहण का स्पर्श रात्रि 1 बजकर 5 मिनट पर शुरू होगा ग्रहण का मध्य रात्रि 1 बजकर 44 मिनट और मोक्ष देर रात 2 बजकर 23 मिनट पर होगा। शरद पूर्णिमा तिथि का समापन भी इसी समय रात्रि 1 बजकर 53 मिनट पर होगा। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 1 घंटे 18 रहेगी। बताते हैं कि यह संयोग 37 साल के बाद पड़ा है। इसी तरह का संयोग वर्ष 1986 में भी हुआ था। इस दिन भी मध्यरात्रि में ही चंद्रग्रहण लगा था। ज्योतिषिवदों के अनुसार हालांकि इसी दिन यानि की शरद पूर्णिमा पर इस बार ग्रहण का साया होने के कारण इस दौरान खीर चंद्रदेव की रोशनी में नहीं रखी जा सकती है, लेकिन शरद पूर्णिमा पर इस बार चंद्रग्रहण के साथ पांच शुभ योग का संयोग भी बन रहा है। शरद पूर्णिमा पर सौभाग्य योग, सिद्धि योग, बुधादित्य योग, गजकेसरी योग और शश योग का निर्माण हो रहा है। यह पांचों योग शुभ फलदायी है। ग्रहण के नौ घंटे पहले से सूतक लगने से मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। चूंकि ग्रहण का मोक्ष देर रात्रि में होगा इसलिए अगले दिन ही मंदिर खुलेगा।


ऐसे कर सकेंगे खीर का सेवन
चंद्रग्रहण मेष राशि में लगने जा रहा है। इस दिन शरद पूर्णिमा भी है और शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाने का विशेष महत्व है। कुछ ज्योतिषविदों का यह भी मानना है कि खीर को बनाने सकते हैं, लेकिन इसके लिए ध्यान रखना होगा कि खीर बनाने के लिए गाय के दूध में सूतक काल शुरू होने के पहले कुशा डाल दें। फिर उसे ढककर रख दें। इससे सूतक काल के दौरान दूध शुद्ध रहेगा। बाद में आप इसकी खीर बनाकर भोग लगा सकेंगे। इस दौरान खीर बनाने की प्रक्रिया ग्रहण खत्म होने के बाद शुरू की जाएगी। फिर भोर में आप अमृत वर्षा के लिए इसे खुले आसमान के नीचे रख सकते हैं। बाद में इसका सेवन किया जा सकता है।


चंद्रग्रहण पर रखे इसका ध्यान
ज्योतिषविदों के अनुसार गर्भवती महिलाएं चंद्र ग्रहण के दौरान अपने पास श्रीफल रखें। जब ग्रहण समाप्त हो जाए, तो उसे बहती जलधारा में प्रवाहित कर दें। चूंकि, देर रात तक चंद्र ग्रहण है। इसलिए नारियल को सुबह काल में भी बहा सकती हैं। ज्योतिषियों की मानें तो ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपने पेट पर गेरू लगाकर रखना चाहिए। इससे पेट में पल रहे शिशु पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही शिशु स्वस्थ रहता है।ग्रहण के दौरान जगत के पालनहार भगवान विष्णु या देवों के देव महादेव के निमित्त मंत्र जाप करें। आप विष्णु और शिव बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। गायत्री और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी श्रेष्ठ होता है।


इससे बरते सावधानी
ज्योतिषवदों का कहना है कि चंद्र ग्रहण के दौरान भूलकर भी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श नही करना चाहिए। इसके साथ ही चंद्र ग्रहण के दौरान किसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं भूलकर भी कैंची, चाकू, सुई आदि चीजों का प्रयोग न करें। चंद्र ग्रहण की रात श्मशान एवं नकारात्मक जगहों पर जाने से बचना चाहिए।