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video–राजकीय सम्मान के साथ किया एयरफोर्स के जवान का अंतिम संस्कार

कुचामनसिटी/चितावा. निकटवर्ती ग्राम दौलतपुरा (अडक़सर) में मौसेरे भाई को बचाने के लिए फार्म पौंड में कूदे एयरफोर्स जवान नरेन्द्र सिंह का मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ गांव में अंतिम संस्कार किया गया।

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– नम आंखों से बेटे ने दी मुखाग्नि

– नरेन्द्र सिंह अमर रहे के जयघोष से गूंज उठा दौलतपुरा का आसमान

कुचामनसिटी/चितावा. निकटवर्ती ग्राम दौलतपुरा (अडक़सर) में मौसेरे भाई को बचाने के लिए फार्म पौंड में कूदे एयरफोर्स जवान नरेन्द्र सिंह का मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ गांव में अंतिम संस्कार किया गया। मौसेरे भाई मानसिंह का भी साथ में ही परिजनों ने अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मोक्षधाम परिसर में एयरफोर्स के जयपुर व जोधपुर के ऑफिसर व जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। मृतक नरेन्द्र सिंह के पिता मांगीलाल सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर (तिरंगा) भेंट किया। इसके बाद में दोनों भाईयों को उनके पुत्रों ने मुखाग्नि दी। इस दौरान मोक्षधाम परिसर ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा नरेन्द्र सिंह अमर रहेगा’ के जयघोष से गूंज उठा। इस मौके पर चितावा थानाधिकारी महावीर प्रसाद, तहसीलदार, सरंपच प्रतिनिधि व जिला परिषद सदस्य कैप्टन शंकर सिंह, बिड़दाराम बगडिय़ा, चेनारामभुकर अडक़सर, पं. हरिशंकर दाधीच, अडक़सर, टोडास, लालास, दौलतपुरा, चावण्डिया व चितावा सहित अन्य गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर जवान नरेन्द्र सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

एक साथ दो अर्थी उठने से फूट पड़ी रूलाई, परिजनों को बढाया ढांढस

मृतक नरेन्द्र सिंह व मौसेरे भाई मानसिंह की मौत होने से दोनों के परिवार में ही रक्षाबंधन के दिन की खुशियां एक दम से शोक (मातम) में बदल गई। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही पूरे गांव में एक साथ दो युवकों की मौत की सूचना से शोक की लहर छा गई। मंगलवार को अंतिम संस्कार के लिए जब एक साथ दोनों भाइयों की अर्थी उठी तो परिजनों की रूलाई फूट पड़ी। इस गमगीन माहौल में सेना के ऑफिसर, जवानों व प्रशासन के अधिकारियों सहित अन्य ग्रामीणों ने परिजनों को ढांढस बंधाया।

कहां चले गए पापा, अब कब आएंगे वापस

एयरफोर्स जवान नरेन्द्र सिंह के दो पुत्र है। बड़ा बेटा यशवर्धन सिंह (11) तथा दूसरा पुत्र प्रद्युमन सिंह (8) है। इस दौरान पुत्रों ने परिजनो से पूूछा आज घर में इतनी भीड़ क्यों है। पापा कहां चले गए, अब पापा कब आएंगे, कितने दिनों से तो पापा घर आए थे। मृतक की बहिन भी राखी लेकर अपने भाई को राखी बांधने आई थी। लेकिन उससे पहले ही भाई बहिन से जुदा हो गया। बहिन भाई को बिना राखी बांधे ही रह गई।