-बालिकाओं एवं महिलाओं ने सीखे अधिकारों एवं सशक्तीकरण के गुर
-नौ दिन में बदल गई महिलाओं एवं बालिकाओं की दिनचर्या
-पांचलासिद्धा में उत्सव माँ कार्यक्रम का आयोजन
खींवसर (नागौर.) चाहे बाड़मेर की १८ वर्षीय मनीषा हो या बीकानेर की ५५ वर्षीय सुनीता। हर वर्ग की बालिकाओं एवं महिलाओं में पिछले नौ दिन में उनके जीवन की दिनचर्या में कई बदलाव आया है। श्रीदेव जसनाथ ट्रस्ट की ओर से पांचलासिद्धा में आयोजित उत्सव माँ कार्यक्रम में भाग लेने प्रदेश के कौने-कौने से आई बालिकाओं एवं महिलाओं ने प्रतिदिन आत्म विश्वास और सशक्तीकरण के गुर सीखे है। यहां प्रशिक्षिकाओं ने उन्हें सामाजिक परिवर्तन, सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, योग व ध्यान, स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के साथ आध्यात्मिकता के बारे में महत्वपूर्ण सीख दी। इससे उनके जीवन में बदलाव आया है। कल तक घर की चारदीवारी में कैद रहने वाली महिलाएं अब अपने हुनर के बल पर स्वाभिमानी जीवन जी सकेगी। यहां देशी के साथ विदेशी प्रशिक्षको ने भी उनमें आत्मविश्वास जाग्रत कर दक्ष बनाया है। सरकार ने महिलाओं को हर क्षेत्र में ५० प्रतिशत आरक्षण तो दे दिया, लेकिन धरातल पर उन्हें अधिकार नहीं मिलने से उन्हें घर की चार दीवारी में घुटन सी महसूस होती है। जसनाथ आसन में महिला सशक्तीकरण को लेकर आयोजित उत्सव मां कार्यक्रम में महिलाओं को आत्म सम्मान एवं स्वाभिमान के साथ जीने के अधिकार एवं स्वयं के बल पर घर की गाड़ी हांकना, गृह कलेश समाप्त करना, सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम, पारिवारिक एवं सामाजिक सतत विकास सहित पर्यावरण को बचाए रखने में महिलाओं की भूमिका पर प्रशिक्षित किया गया।
आसन पर मानव कल्याण के कार्य
पांचलासिद्धा के जसनाथ आसन पर मानव कल्याण को लेकर प्रतिवर्ष विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजना होता है। उत्सव मां कार्यक्रम सहित नशा मुक्ति शिविर, बालिका शिक्षा शिविर, महिला सशक्तिकरण सहित जल संरक्षण व मानव हित के शिविरों का आयोजन किया जाता है।
आत्मनिर्भर बनेगी महिलाएं
कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं एवं बालिकाओं का भविष्य जरूर निखरेगा। यहां आत्म विश्वास, आत्म निर्भरता, सशक्तीकरण सहित निर्णय शक्ति की क्षमता बढऩे के साथ नेतृत्व तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेम बढ़ेगा और महिलाएं आत्म निर्भर बनेगी।
-दुर्गा बेनीवाल, योग शिक्षिका, जसनाथ आसन
महिला सशक्तीकरण के लिए जरूरी
महिला सशक्तीकरण के लिए इस तरह के आयोजन समय-समय पर होने चाहिए। यह कार्यक्रम महिलाओं को उनके अधिकारों और समानता की दिशा में आगे बढ़ाता है। हमें भी उत्सव माँ कार्यक्रम में अनेक जानकारियां प्राप्त हुई है, जो निकट भविष्य में बहुउपयोगी साबित होगी।
-कोमल विश्नोई, बीकानेर
कार्यक्रम से ली पर्यावरण की सीख
कार्यक्रम में भाग लेकर मैने पर्यावरण संरक्षण के बारे में बहुत कुछ सीखा है। यहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर संकल्प लिया है और इस दिशा में विशेष रुचि लेकर काम करूंगी। बिगड़ता पर्यावरण भावी पीढ़ी के लिए अत्यंत खतरनाक होगा।
-अनुजा, झुंझुनूं
अधिकारों की हुई जानकारी
उत्सव मां कार्यक्रम से हमें महिला अधिकारों की जानकारी मिली है। महिलाओं को सरकार एवं महिला आयोग ने उन्हें क्या अधिकार दे रखे हैं यह जाना। उनके जरिये वो स्वाभिमानी जीवन जीने के साथ आत्मनिर्भर बन सकती है। उन्हें दिए गए अधिकारों का लाभ लेने की कार्यक्रम से जागृति आई है।
-गुड्डी मंगवाल, डीडवाना