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नागौर के आंगनबाड़ी केन्द्रों को कब मिलेगा नंदघर…

Nagaur. योजना शुरू होने के सात साल बाद भी नागौर को नहीं मिल पाया नंदघरवर्ष 2015 में योजना शुरू होने के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में नंदघर तो बन गए, लेकिन नागौर जिला अब तक इससे रहा अछूता-जिले के 824 आंगनबाड़ी केन्द्रों का नंदघर में परिवर्तित करने की है योजना

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Nagaur. Anganwadi center will be made, if Nandghar is built, it will look like this

नागौर. प्रदेश के अन्य जिलों में करीब छह साल पहले ही अधिकतर आंगनबाड़ी केन्द्र अब नंदघर में परिवर्तित हो चुके हैं। नंदघर में बदलने के ही साथ ही बच्चों को जहां एलईडी आदि के साथ स्कूलों तर्ज पर सुव्यवस्थित कक्षा-कक्ष मिल गए हैं, वहीं नागौर इससे अब तक अछूता रहा है। जबकि जिले में चयनित हुए करीब साढ़े 800 आंगनबाड़ी केन्द्रों को अब भी नंदघर बनने का इंतजार है। आईसीडीएस के अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में नंदघर के लिए चयनित केन्द्रों का फिर से स्क्रीनिंग की जाएगी। ताकि योजना के क्रियान्वयन में कोई किन्तु-परन्तु की स्थिति न रहे।


जिले में महिला बाल विकास विभाग के तहत कुल 13 परियोजना क्षेत्र हैं। इनमें से प्रत्येक परियोजना क्षेत्र से पैसठ केन्द्रों का चयनित किया गया था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार करीब छह माह पूर्व हुए सर्वे के दौरान इन केन्द्रों का चयन किया गया था। चयन करने के दौरान पक्का भवन के साथ ही खुद का विभागीय भवन होने को प्राथमिकता दी गई। इसके ही केन्द्रों में बच्चों की स्थिति, केन्द्र में बैठने की जगह, प्रवेशद्वारों की स्थिति आदि को भी जांचा गया था। इसमें बेहतर स्थिति पाए जाने के बाद ही इन केन्द्र्रों को नंदघर के रूप में परिवर्तित करने के लिए चुना गया था। आईसीडीएस अधिकारियों का कहना है कि नागौर में नंदघर बनाए जाने का काम सत्र 2023-24 में पूरी तरह से शुरू हो जाएगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर एक फिर से इन केन्द्रों की स्क्रीनिंग की जाएगी।


यह हैं जिले के परियोजना क्षेत्र
नागौर, मुण्डावा, खींवसर, जायल, डीडवाना, लाडनूं, कुचामन सिटी, नावा, परबतसर, ड़ेगाना, मकराना, मेडतासिटी, रियाँबड़ी आदि परियोजना क्षेत्र हैं। अधिकारियों का कहना है कि योजना इन परियोजना क्षेत्रों में चयनित केन्द्रों की स्थिति का जल्द ही पुर्नमूल्यांकन किया जाएगा। ताकि केन्द्रों की वर्तमान में सही वस्तुस्थिति सामने आ सके।


क्या है नन्द घर योजना
नन्द घर योजना के तहत शाला पूर्व शिक्षा से संबंधित गतिविधियां जिसमें आंगनबाड़ी केन्द्रों में शाला पूर्व शिक्षा किट, खेलने के खिलौने, गुडिया घर, स्लाईडर, फिसलपट्टी, घोडा, बच्चों के टीशर्ट व हॉफ पेन्ट, व्हाइट बोर्ड, नोट बुक, कॉपी, पेन्सिल आदि उपलब्ध करवाये जायेगें। इसके साथ ही योजना के तहत आंगनबाड़ी भवन को रखरखाव, मरम्मत, सफेदी, नये भवन के निर्माण, किचन से संबंधित सुविधाएं, टॉयलेट व बाउण्ड्री निर्माण, खेल के मैदान आदि की सुविधा भी मिलेगी। योजना के तहत केन्द्रों के विकास के लिए अतिरिक्त कार्यो के रूप में वेईंग स्केल, दरी-पट्टी, वॉटर प्यूरीफायर, बर्तन, खाद्य सामग्री के भण्डारण के लिए अलमारी आदि भी मुहैया करवाई जाएगी। हालांकि इसको विकसित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से वेदांता ग्रुप से अनुबंध किया गया। वेदांता ग्रुप इन केन्द्रों की आंशिक मरम्मत आदि के साथ ही बच्चों के खेल उपकरणों व मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराने में सहयोगी की भूमिका निभाएगी।


इनका कहना है...
जिले के 13 परियोजना क्षेत्रों से करीब साढ़े आठ सौ आंगनबाड़ी केन्द्रों को नंदघर में परिवर्तित किया जाएगा। नंदघर बनने के साथ ही बच्चों को निजी स्कूलों के तर्ज पर खेलने व पढऩे आदि के साथ मूलभूत सुविधाओं आदि की उपलब्धता कराई जाएगी।
सुभाष बिश्नोई, उपनिदेशक आईसीडीएस नागौर