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भोजन तो आपको भरपेट खिला देंगे, लेकिन भरपेट पानी नहीं पिला पाएंगे

पिछड़ चुके ग्राम में प्रत्याशी पहुंचेंगे भी या नहीं

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नागदा

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Lalit Saxena

Nov 02, 2018

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नागदा (कमलेश वर्मा ) हमारा गांव ऐसा है, भोजन तो आपको भरपेट खिला देंगे, लेकिन भरपेट पानी नहीं पिला पाएंगे। चौंक गए ना, लेकिन उक्त कथन ग्राम किलोडिय़ा के ग्रामीणों का है। दरअसल शहर से करीब 11 किमी दूर स्थित ग्राम किलोडिय़ा में भीषण पेयजल संकट व्याप्त है।
ग्रामीण तीन किमी दूर स्थित समीप के ग्राम खुरमुड़ी से पेयजल जुटाते है। खरीदी के लिए नागदा व खाचरौद पहुंचने वाले ग्रामवासी पानी की कैन साथ रखते है। कारण शहरी आबादी में जहां पेयजल उपलब्ध हो जाए वह जुटा लेते हैं। विकास की उम्मीद लगाए ग्रामीणों को विधानसभा चुनाव से उम्मीद नजर आ रही है।
शिकायतों से कान पर जूं तक नहीं रेंगती
ग्राम की बदहाली की दशा गांव में प्रवेश करते ही दिखाई पड़ती है। मौजूदा हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है। जो पानी उगल रहे है, वह भी पीने योग्य नहीं है। कारण ग्राम की भूमी का प्रदूषित होना है। हालांकि इस बारे में ग्रामीणों ने खुलकर जिक्र नहीं किया। लेकिन ग्राम में सालों से विकास नहीं हुए इस बात को दबे मुंह स्वीकार किया। चुनाव से उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों का कहना है, कि क्या पता गांव में पेयजल उपलब्ध नहीं होने से प्रत्याशी गांव में प्रचार के लिए पहुंचेंगे भी या नहीं।
विकास कार्यों के लिए तरस रहा ग्राम किलोडिय़ा
पेयजल ही नहीं ग्राम की मूलभूत सुविधा कही जाने वाली सड़क भी गायब है। उबड़-खाबड़ भूखंडपर बसे ग्राम में जनप्रतिनिधि पहुंचने पहले ही पेयजल साथ लेकर पहुंचते है। सैकड़ों मुश्किलों से गुजर रहे ग्राम में रिश्तेदार आने से डरते है। बीते पांच सालों से परेशानियों को मन में दबाए बैठे ग्रामीण प्रत्याशियों से सवाल जवाब करेंगे।
शिकवे शिकायत कर करके थक चुके है। आगामी विधान सभा हमारे लिए पूर्व की तरह ही रहेगा। कारण ग्राम में पेयजल संकट का व्याप्त होना है। पिछड़ चुके हमारे ग्राम में क्या पता प्रत्याशी पहुंचेंगे भी या नहीं।
योगेंद्र गुर्जर, ग्रामीण
विकास की उम्मीद लगाए ग्रामीणों को विधानसभा चुनाव से उम्मीद नजर आ रही है। ग्रामीण प्रत्याशी को मत उसी शर्त पर देंगे, यदि वैकल्पिक व्यवस्था के रुप में पानी के टैंकर गांव नहीं पहुंचेंगे। उसके बाद ही मतों के प्रयोग के बारे में सोचेंगे।
समरथ गुर्जर, ग्रामीण
हमारा गांव ऐसा है, भोजन तो आपको भरपेट खिला देंगे, लेकिन भरपेट पानी नहीं पिला पाएंगे। ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है, कि हमारा खिलौना बन चुका है। परेशानियों के निराकरण के लिए किसी पास समय नहीं है।
राकेश गुर्जर, ग्रामीण
शिकायतों से कान पर जूं तक नहीं रेंगती। ग्राम की बदहाली की दशा गांव में प्रवेश करते ही दिखाई पड़ती है। मौजूदा हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है। जो पानी उगल रहे है, वह भी पीने योग्य नहीं है। कारण ग्राम की भूमी का प्रदूषित होना है। दरबार, गुर्जर