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जीआई टैग से बढ़ेगी देश भर में मशहूर नर्मदांचल के तुअर की मिठास

मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान सहित अन्य राज्यों में रहती है मांग  

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नर्मदापुरम.

जल्दी ही देश भर में ना केवल हमारी दाल गलेगी बल्कि खूब चलेगी भी...! प्रदेश सरकार ने बजट में पिपरिया तुअर दाल को जीआई टैग दिलाने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन होने का एलान किया था। जिससे क्षेत्र के दाल उत्पादक किसानों और व्यापारियों में जबरदस्त उत्साह है।

नर्मदा किनारे पैदा होने वाली पिपरिया की तुअर दाल में मिठास के साथ इसमें पॉलिश करने की भी आवश्यकता नहीं होती। यहां की दाल बिना पॉलिश के चमचमाती है। इन्हीं खास वजहों से पिपरिया की तुअर दाल सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी इसकी खासी मांग रहती है।

पांच जिलों से पिपरिया मंडी आती है दालें-

पिपरिया की ए-क्लास कृषि उपज मंडी में दाल की अच्छी कीमत मिलती है। यही वजह है। रायसेन, बैतूल, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर और सागर तक से किसान तुअर बेचने यहां आते हैं। हर साल पिपरिया मंडी में लगभग डेढ़ लाख क्विंटल क्विंटल दाल की खरीद-फ्रोख्त होती है। खास बात यह भी है कि आसपास की कृषि मंडियों के मुकाबले पिपरिया में अधिक दाम पर दाल की खरीदी-बिक्री होती है। यही वजह है दाल उत्पादक किसान मंडी में बड़ी संख्या में आते हैं।

अभी इन्हें मिल चुका जीआई टैग-

महाबलेश्वर स्ट्रॉबेरी, जयपुर की ब्लू पॉटरी, बनारसी साड़ी और तिरुपति के लड्डू तथा मध्यप्रदेश के झाबुआ का कडकऩाथ मुर्गा, चिन्नोर धान सहित कई उत्पादों को जीआइ टैग मिल चुका है।

इनका कहना है...

तुअर दाल को जीआई टैग दिलाने के लिए पंजीयन करना होता है। पंजीयन के लिए केंद्र सरकार को आवेदन किया है। संभवत: इस सप्ताह पंजीयन हो जाएगा। टीम आकर अवलोकन करेगी। पिपरिया और नर्मदा किनारे बड़े पैमाने पर किसान इसका उत्पादन करते हैं। जीआइ टैग मिलने से किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलेगा।

-जेआर हेडाऊ, उपसंचालक कृषि नर्मदापुरम

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