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अनोखा हनुमान धाम : बिना यह काम किए यहां से नहीं गुजरती ट्रेन

यात्रियों की कुशलता के लिए किया जाता है यह काम

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अनोखा हनुमान धाम : बिना यह काम किए यहां से नहीं गुजरती ट्रेन

अनोखा हनुमान धाम : बिना यह काम किए यहां से नहीं गुजरती ट्रेन

इटारसी/रामभक्त हनुमान के देश-दुनिया में कई अनोखे मंदिर (famous hanuman temple in madhya pradesh) हैं। मंदिरों की अपनी-अपनी विशेषताएं भी हैं। जो खास हैं। यहां पर लोग बजरंगवली की अपनी तरह से पूजा आराधना करते हैं। ऐसा ही ब्रिटिश काल का एक मंदिर है नगर में ओवरब्रिज के नीचे। यह हनुमान धाम क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। यहां की विशेषता है कि ट्रेन गुजरने के समय चालक हॉर्न बजाकर बाबा को सलामी देते हुए सुखद और सकुशल यात्रा की कामना करते हैं।

100 साल से भी अधिक पुराना है धाम
हनुमान धाम मंदिर समिति सदस्य लखन बैस बताते हैं कि मंदिर 100 साल से भी अधिक पुराना है। रेल के लिए पटरी बिछाने के दौरान अग्रेजों ने मंदिर को हटाने का प्रयास किया था लेकिन वे विफल रहे। इसकी बाद चर्चा आसपास फैली तो यहां के निवासी दुर्गाप्रसाद मुकदम ने इस स्थान को मढिय़ा का रूप दे दिया। धीरे-धीरे यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आने लगे। आज यह सिद्ध स्थान बन गया है। हनुमानधाम मंदिर रेलपटरी के बीच होने से 24 घंटे ट्रेनों की आवाजाही रहती है। चालक- परिचालक और गार्ड मंदिर के पास धीमी गति से ट्रेन निकालने के साथ हॉर्न बजाकर सलामी देते हैं। हनुमान जयंती, रामनवमी और नवरात्रि सर्वाधिक धूमधाम से मनाई जाती है।

गेट वाले बाबा से हनुमान धाम
बैस बताते हैं कि पहले लोग इस जगह को गेट वाले बाबा के नाम से जानते थे। शिक्षक एमएस चौहान ने 1989 में इस मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया। लोगों के जन सहयोग से मंदिर का संचालन हो रहा है। आज तक ट्रस्ट बनाने की जरूरत नहीं पड़ी। मंदिर का नाम हनुमान धाम हो गया। अब इसकी पहचान हनुमान धाम के रूप में है।

तीन माह बंटा नि_शुल्क भोजन
मंदिर के कोरोना की पहली लहर के बाद लगे लॉकडाउन में जब शहर के होटल- दुकानें बंद थी, तब हनुमानधाम में बाबा के आशीर्वाद और लोगों के सहयोग से लगातार 90 दिन नि:शुल्क भंडारा चला। सालभर पर्वों के समय भक्तगणों की ओर से भंडारा होता है, जिसमें सैकड़ों गरीबों और जरूरतमंदों की भूख और प्यास यहां बुझती है।