शहर के सरकारी अस्पताल में कुत्ते के काटने के बाद जानलेवा बीमारी से बचाने वाला रैबीज इंजेक्शन का कोटा खत्म हो गया है और इधर शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढऩे से लोगों पर हमले की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इन घटनाओं के बीच चिंता की बात यह है कि गरीब परिवार के किसी व्यक्ति पर यदि कुत्ते का हमला होता है तो उसे इंजेक्शनों की यह कमी भारी पड़ सकती है।
बढ़े आवारा कुत्ते, नपा बेपरवाह
शहर के चौंतीस वार्डों में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ गई है। लगभग हर गली-मोहल्ले में आवारा कुत्ते लोगों के लिए परेशानी बन रहे हैं। आवारा कुत्तों के लोगों पर हमले भी होने के मामले हुए है। मगर इन सबसे नपा के अफसर बेपरवाह हैं। नपा की तरफ करीब एक दशक में एक बार भी आवारा कुत्तों को पकडक़र जंगल में छोडऩे का अभियान नहीं चलाया गया है।
बुलाए हैं
अप्रैल 2016 से अब तक 2 हजार से ज्यादा रैबीज इंजेक्शनों की खपत हो चुकी है। अब भी लोग लगातार कुत्तों के हमलों से घायल होकर आ रहे हैं। फिलहाल अस्पताल में इंजेक्शन नही हैं। बुधवार को 100 इंजेक्शन होशंगाबाद से मिलेंगे।
डॉ एके शिवानी, अधीक्षक डीएसपीएम अस्पताल
चर्चा कर लेते हैं
हम आवारा कुत्तों को पकडऩे के लिए अभियान चलाने के संबंध में टाफ से चर्चा कर लेते हैं। जल्द ही इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे।