
जिले के अधिकांश स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं है, खुले परिसर में शाम होते ही तत्व पहुंचते हैं।
The security arrangements नरसिंहपुर. जिले में प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की कमी तो है ही साथ ही सुरक्षा के मामले में भी स्थिति गंभीर है। जिले में करीब 593 स्कूल तो ऐसे हैं जिनमें बाउंड्रीवाल ही नहीं है। जिससे दिन को जहां स्कूल परिसरों में मवेशियों की आवाजाही रहती है वहीं शाम होते ही आसामाजिक तत्वों का जमघट लगता है और तत्व स्कूल परिसर, दालान में ही गंदगी, नशे की सामग्री फेंककर चले जाते हैं। जिससे जब सुबह स्कूल खुलते हैं तो शिक्षकों को ही सफाई कराने की नौबत बनती है। कई बार तत्व स्कूल के संसाधनों को भी नुकसान पहुंचा जाते हैं।
जिले के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था गंभीर लापरवाही की तस्वीर पेश कर रही है। जिला शिक्षा केंद्र के आंकड़े कहते हैं कि कुल 1280 स्कूलों में से 593 स्कूल ऐसे हैं, जहां अब तक बाउंड्रीवाल ही नहीं है। यह स्कूल खुले मैदान की तरह संचालित हो रहे हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। जिले में केवल 433 स्कूलों में ही पक्की बाउंड्रीवाल है, जबकि 81 स्कूलों की बाउंड्रीवाल टूट चुकी है। वहीं 111 स्कूलों में सिर्फ कंटीले तार की फेंसिंग है, जो किसी भी तरह से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देती। इसी तरह 37 स्कूलों में अधूरी बाउंड्रीवाल है और 12 स्कूलों में निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। यह स्थिति स्पष्ट कर रही है कि जिम्मेदार विभाग बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। जैसे-तैसे स्कूल परिसरों की सुरक्षा के जतन तो किए जा रहे हैं लेकिन वह नाकाफी है। जिले के स्कूलों की यह स्थिति सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है। सवाल यह है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर जिम्मेदार विभाग कब सक्रिय होगा।
नरसिंहपुर ब्लाक में सर्वाधिक बाउंड्रीवाल विहीन स्कूल
ब्लॉकवार आंकड़ों को देखें तो नरसिंहपुर ब्लॉक में 267, गोटेगांव में 243, चांवरपाठा में 235, चीचली में 199, करेली में 185 और साईंखेड़ा में 151 स्कूल शामिल हैं। हर ब्लॉक में बड़ी संख्या में स्कूल बिना बाउंड्रीवाल के संचालित हो रहे हैं। बाउंड्रीवाल नहीं होने से स्कूल परिसरों में कभी भी बाहरी लोगों का प्रवेश हो जाता है। पशुओं का खुलेआम प्रवेश, असामाजिक तत्वों की गतिविधियां, चोरी और तोडफ़ोड़ की आशंका बनी रहती है। छोटे बच्चों के स्कूल से बाहर निकलकर भटकने या सडक़ की ओर जाने का खतरा भी लगातार बना रहता है। ऐसे में किसी भी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। नया सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों में चहल-पहल बढ़ रही है, शैक्षणिक गतिविधियां हो रही हैं, ऐसे में जरूरी है कि स्कूलों की सुरक्षा के लिए सार्थक और कारगर प्रबंध किए जाएं ताकि बच्चों के साथ शिक्षकों और स्कूल भवनों की सुरक्षा भी निर्धारित हो सके।
आंकड़े जो बढ़ा रहे चिंता
कुल स्कूल- 1280
पक्की बाउंड्रीवाल- 433
बिना बाउंड्रीवाल- 593
टूटी बाउंड्रीवाल-81
कंटीले तार फेंसिंग- 111
आंशिक- 37
निर्माणाधीन- 12
ब्लाकवार बाउंड्रीवाल विहीन स्कूल
नरसिंहपुर- 267
गोटेगांव - 243
चावरपाठा- 235
चीचली- 199
बाउंड्रीवाल न होने के खतरे
बच्चों की सुरक्षा पर सीधा खतरा
बाहरी व असामाजिक तत्वों की आसान आवाजाही
पशुओं के घुसने से हादसे की आशंका
चोरी और तोडफ़ोड़ का जोखिम
छोटे बच्चों के स्कूल से बाहर निकलने का खतरा
वर्जन
राज्य शिक्षा केंद्र से स्कूलों की बाउंड्रीवाल के लिए राशि का प्रावधान नहीं रहता है। इसलिए अन्य मदों से ही यह कार्य हो पाते हैं, पंचायतें भी कार्य करा देती हैं।
मनीष चौकसे, डीपीसी नरसिंहपुर
Published on:
08 Apr 2026 01:01 pm
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