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तिल संकटा चतुर्थी पर सिद्ध गणेश मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

तिल संकटा चतुर्थी पर सिद्ध गणेश मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब प्रथम पूज्य सिद्धि विनायक को लगाया तिल गुड़ के लड्डुओं का भोग

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Siddha Ganesh Temple

Siddha Ganesh Temple

Til Sankata Chaturthi

आस्था परंपरा और लोकविश्वास का संगम एक बार फि र ऐतिहासिक श्री गणेश देवस्थानम् सिद्धपीठ में देखने को मिला। तिल संकटा चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान सिद्धि विनायक का विशेष पूजन.अर्चन एवं अभिषेक श्रद्धापूर्वक हुआ। अलसुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और पूरे क्षेत्र में जय गणेश के जयघोष गूंजते रहे।
इस अवसर पर परंपरा अनुसार एक दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया। जिसमें नरसिंहपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढकऱ सहभागिता की। भक्तों ने भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं सहित विविध व्यंजनों का भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संकटों से मुक्ति की कामना की। इस मौके पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान विनायक का पावन अभिषेक, विशेष आरती एवं महाप्रसाद वितरण किया गया। जिससे आयोजन की भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा और अधिक बढ़ गई।


मेले ने बिखेरा उत्सव का रंग


मंदिर परिसर में लगे मेले ने श्रद्धा के साथ.साथ उत्सव का रंग भी बिखेरा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने झूलों, चाट-पकवानों और विभिन्न दुकानों पर जमकर खरीदारी की। देर रात तक मंदिर और मेले में श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा। आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से बेहतर सुरक्षा व्यवस्था रही। वहीं नगर पालिका द्वारा पूर्व में ही सफ ाई और विद्युत व्यवस्था दुरुस्त की गई थी।


फ हराई गई धर्म ध्वजा


मंदिर के व्यवस्थापक पं. शैलेष पुरोहित ने बताया कि सूर्योदय के तुरंत बाद पं. कृष्णकांत उदेनिया व पं. विनोद मिश्रा ने वेद मंत्रों के बीच विनायक सरकार का पावन अभिषेक, आरती व महाप्रसाद वितरण हुआ। उल्लेखनीय है सिद्धपीठ के संस्थापक स्व. पं. कृष्णकुमार पुरोहित के मार्गदर्शन में उक्त आयोजन शुरू किया गया था। जिसका पावन उद्देश्य महर्षि वेद व्यास के सांसारिक सार सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया को लेकर भगवान के भक्तों के भय,रोग, चिन्ता मुक्ति का रहता है। इस अवसर पर धर्मध्वजा भी फ हरायी गई। आयोजन में किशन गुप्ता, संजय जैन, श्रवण व जय मिश्रा, अरविंद दुबे, आशीष सोनकिया, बुद्धि प्रसाद विश्वकर्मा, राहुल व रोहित मेहरा, पप्पू पटेल, अन्नीलाल प्रजापति, पवन नेमा, मोहित सराठे, सौरभ नोरिया, राजेश विश्वकर्मा, हर्षित व दीप विश्वकर्मा, संजय व योगराज महोबिया ने सक्रिय योगदान दिया।